कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने लोकसभा में मंगलवार को चेतावनी दी कि देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों का असली असर अगले महीने सामने आने वाला है। उन्होंने कहा कि आगामी राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों के कारण फिलहाल सरकार कीमतों को नियंत्रित रख रही है, लेकिन 1 मई 2026 के बाद जनता को नई आर्थिक वास्तविकता का सामना करना पड़ेगा। तिवारी ने पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध का हवाला देते हुए कहा कि अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच संघर्ष का असर भारत की अर्थव्यवस्था पर बहुत गहरा पड़ा है।
सरकार के कर्ज और आर्थिक दबाव पर सवाल
तिवारी ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार पुराना कर्ज चुकाने के लिए नया कर्ज ले रही है और यही वजह है कि वित्तीय अनुमान अब पूरी तरह से ध्वस्त हो चुके हैं। उन्होंने सवाल किया कि जब सरकार कॉर्पोरेट जगत को बड़ी छूट दे रही है और भारी खर्च कर रही है, तब भी निजी निवेश क्यों नहीं बढ़ रहा। तिवारी ने डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरावट को लेकर भी कटाक्ष किया और कहा कि इसे जनता के सामने साफ-साफ बताया जाना चाहिए।
कच्चे तेल की कीमतों से बढ़ेगा भार
कांग्रेस सांसद ने बताया कि अगर कच्चे तेल की कीमत 10 डॉलर प्रति बैरल बढ़ती है, तो भारत पर 10 से 15 अरब डॉलर का अतिरिक्त बोझ आता है। तिवारी ने चेतावनी दी कि आने वाले दिन अर्थव्यवस्था के लिए चुनौतीपूर्ण होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हालिया भाषण में देश को इस मुश्किल स्थिति के लिए तैयार किया जा रहा था। उनके अनुसार, चुनाव खत्म होने के तुरंत बाद यह असर स्पष्ट हो जाएगा।
भविष्य की आर्थिक स्थिति पर सस्पेंस
तिवारी का कहना है कि 29 अप्रैल तक पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण के विधानसभा चुनाव तक सरकार पेट्रोल और डीजल की कीमतों को नियंत्रित रखने की कोशिश करेगी, लेकिन उसके बाद देश को वास्तविक आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि जनता को सच बताने में कोई देरी न की जाए और भविष्य के खर्च और कर्ज के प्रबंधन पर स्पष्टता लायी जाए।
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