- सलीम खान उर्फ सलीम अहमद उर्फ सलीम वास्तिक की सच्चाई उजागर — हाईप्रोफाइल मामलों की जांच में खुला राज, इंसाफ की राह पर बढ़ा परिवार
गाजियाबाद। नाम बदलकर, पहचान छुपाकर और जगह-जगह ठिकाने बदलकर कानून से बचने की कोशिश करने वाला सलीम खान उर्फ सलीम अहमद उर्फ सलीम वास्तिक आखिरकार अपने ही कर्मों के जाल में फंस गया। 26 साल पहले महज 30,000 रुपये के लालच में एक 13 वर्षीय मासूम की बेरहमी से हत्या करने वाला यह शातिर अपराधी पुलिस की नजरों में मृत घोषित हो चुका था, लेकिन वक्त ने एक बार फिर उसकी असलियत दुनिया के सामने ला दी है।
हाल ही में एक हाईप्रोफाइल मामले की जांच के दौरान जब पुलिस की नजर इस चेहरे पर पड़ी, तो शक की सुई गहराई तक गई। बारीकी से पड़ताल हुई, पुरानी फाइलें खुलीं और सच सामने आया—वही शख्स, जिसे वर्षों पहले मृत मान लिया गया था, असल में जिंदा था और कानून से आंख-मिचौली खेल रहा था।
‘देर से ही सही, लेकिन इंसाफ की शुरुआत’
इस पूरे मामले पर कांग्रेस नेता अक्षय वीर ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह गिरफ्तारी भले देर से हुई हो, लेकिन यह पीड़ित परिवार के लिए न्याय की एक अहम शुरुआत है। उन्होंने कहा कि एक मां, जिसने अपना बच्चा खोया, एक पिता और पूरा परिवार-सभी अब इंसाफ की उम्मीद कर सकते हैं।
नफरत की राजनीति पर भी साधा निशाना
कांग्रेस नेता अक्षय वीर ने तीखे शब्दों में कहा कि जो लोग समाज में नफरत फैलाने का काम करते हैं, अक्सर उनकी अपनी सच्चाई खोखली होती है। उन्होंने मांग की कि ऐसे लोगों की पूरी कुंडली खंगाली जानी चाहिए, क्योंकि अक्सर इनके तार अवैध गतिविधियों से जुड़े मिलते हैं।
यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि अपराधी चाहे कितनी भी चालाकी कर ले, वक्त और कानून की पकड़ से बच पाना नामुमकिन है। 26 साल बाद ही सही, लेकिन एक मासूम की हत्या का हिसाब अब शुरू हो चुका है।












