उन्नाव। जिला अस्पताल में अनियमितताओं का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक ओर जहां चिकित्सकों द्वारा निशुल्क उपचार की बात कही जाती है, वहीं दूसरी ओर मरीजों को बाहर से महंगी दवाएं लिखे जाने के आरोप सामने आ रहे हैं। स्थानीय मरीजों में अमर सिंह, सरिता, कुलदीप कुमार, राहिल और नजरुन सहित कई लोगों ने बताया कि वे इलाज के लिए जिला अस्पताल पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों द्वारा पर्ची पर खुलेआम बाहर की महंगी दवाएं लिखी जा रही हैं।
इससे आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मरीजों का कहना है कि सरकारी अस्पताल का उद्देश्य सस्ती और सुलभ चिकित्सा उपलब्ध कराना है, लेकिन बाहर की दवाएं लिखे जाने से यह उद्देश्य प्रभावित हो रहा है। लोगों ने संबंधित अधिकारियों से मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है, ताकि मरीजों को राहत मिल सके। ट्रामा सेंटर में बाहरी युवकों को लगाकर खूब मनमानी की जा रही है। चर्चा है कि लम्बे समय से आकाश नाम का युवक जो कि किसी पद पर असीन नही है फिर भी अस्पताल का कामकाज देखता है। अधिकारी ऐसी रूम से बाहर नही निकलते है जिसका खामियाजा आम मरीजों को भुगतना पड़ता है। शासनादेश के इतर जाकर चिकित्सक एमआर की इंट्री पर कोई रोक नही लगाते है, मरीजों को मजबूरन इलाज के लिए बाहर की महंगी दवाएं लेनी पड़ती है। मामले को लेकर ज़ब डिप्टी सीएम बृजेश पाठक से बात करने के लिए फोन किया गया तो उनके पीए ने जानकारी दी की अभी वे विधानसभा में है। निकलने पर जानकारी देंगे।
क्या बोले सीएमएस?
मामले में सीएमएस डॉ राजीव गुप्ता ने बताया की हम सर्कुलर जारी करते रहते है, बाहर की दवा कोई नही लिखेगा। अस्पताल की या जन औषधि केंद्र की दवाए हो। मामले को संज्ञान में लेकर स्पष्टीकरण मांगेंगे।












