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 44 की उम्र में ‘बुजुर्ग’ बन गए लोग, वृद्धावस्था पेंशन फर्जीवाड़े पर एफआईआर दर्ज

शिमला। हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां चरम पर हैं औऱ उम्मीदवारों के नामांकन का दौर चल रहा है।

इस बीच शिमला जिला के रोहड़ू उपमंडल की तागनू-जांगलिख पंचायत में वृद्धावस्था पेंशन योजना से जुड़ा ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सरकारी रिकॉर्ड, पंचायत व्यवस्था और दस्तावेजों की सत्यता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

यहां 44 से 54 साल की उम्र के कई लोगों को कागजों में “बुजुर्ग” दिखाकर वृद्धावस्था पेंशन दिलाए जाने के आरोप लगे हैं। मामला सामने आने के बाद अब पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

यह मामला जिला कल्याण अधिकारी शिमला की ओर से भेजी गई ई-मेल शिकायत के आधार पर दर्ज हुआ। पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468 और 471 के तहत थाना चिडग़ांव में केस दर्ज किया है।

इन धाराओं में धोखाधड़ी, जालसाजी, फर्जी दस्तावेज तैयार करना और नकली दस्तावेजों का इस्तेमाल करने जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं।

एफआईआर के अनुसार रोहडू उपमंडल के चिडग़ांव तहसील की ग्राम पंचायत तागनू-जांगलिख में वर्ष 2021 से 2025 के बीच फर्जी जन्म प्रमाण पत्रों और कथित तौर पर बदले गए रिकॉर्ड के आधार पर लोगों को गलत तरीके से वृद्धावस्था पेंशन का लाभ दिया गया।

शुरुआती जांच में यह भी सामने आया कि पंचायत के परिवार रजिस्टर में छेड़छाड़ की गई और कई लोगों की उम्र बढ़ाकर उन्हें पात्र दर्शाया गया।

सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर है कि जिन लोगों को “वृद्धावस्था” पेंशन मिल रही थी, उनमें से कई की वास्तविक उम्र 44 से 54 वर्ष के बीच बताई जा रही है। मामले के अनुसार करीब 45 संदिग्ध लाभार्थियों की पहचान हुई है।

इनमें तागनू गांव के लगभग 20 और जांगलिख क्षेत्र के करीब 25 लोग शामिल बताए जा रहे हैं। इनमें पुरुष और महिलाएं दोनों हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत में लंबे समय से इस गड़बड़ी की चर्चाएं चल रही थीं, लेकिन अब रिकॉर्ड की जांच शुरू होने के बाद मामला खुलकर सामने आया है। आरोप यह भी हैं कि कुछ लोगों को वर्ष 2018-19 से ही पेंशन मिल रही थी, जबकि कुछ नाम बाद में सूची में जोड़े गए।

जांच के दौरान अब पंचायत से जारी परिवार रजिस्टर की नकल, जन्म प्रमाण पत्र, पेंशन आवेदन और सत्यापन से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा रही है।

अधिकारियों को शक है कि बिना मिलीभगत के इतने बड़े स्तर पर रिकॉर्ड में बदलाव संभव नहीं था। इसी वजह से तत्कालीन पंचायत सचिव और कुछ अन्य कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में आ गई है।

मामला सामने आने के बाद कल्याण विभाग में भी हलचल तेज हो गई है। विभाग द्वारा सभी तथ्यों की बारीकी से जांच के बाद पुलिस में मामला दर्ज करवाया गया है।

पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि संबंधित दस्तावेजों और रिकॉर्ड को कब्जे में लेकर जांच की जाएगी। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि फर्जी दस्तावेज किस स्तर पर तैयार किए गए और सरकारी रिकॉर्ड में बदलाव किसने किया।

 

 

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