HomeHealth & Fitnessधमोरा से निकला खेती का नया फार्मूला:प्राकृतिक खेती,मक्का और सह-फसल मॉडल बनेगा...

धमोरा से निकला खेती का नया फार्मूला:प्राकृतिक खेती,मक्का और सह-फसल मॉडल बनेगा किसानों की नई ताकत

रामपुर:उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद  के सचिव जगदीश कुमार का कृषि विज्ञान केंद्र,धमोरा दौरा खेती के भविष्य की नई दिशा तय करने वाला साबित हुआ।उन्होंने वैज्ञानिकों को सुझाव देते हुए कहा कि अब खेती का फोकस केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए,बल्कि किसानों की आय,मिट्टी की सेहत और कम लागत वाली टिकाऊ खेती पर भी बराबर ध्यान देना होगा।

 प्राकृतिक खेती मॉडल का कराया अवलोकन

धमोरा केंद्र में वर्ष 2022 से चल रहे प्राकृतिक खेती,जैविक खेती और परंपरागत खेती के परीक्षणों का निरीक्षण करते हुए सचिव ने कहा कि किसानों को खेती का सिर्फ उत्पादन नहीं,बल्कि उसका पूरा आर्थिक मॉडल समझाना जरूरी है।उन्होंने इन परीक्षणों का सामाजिक एवं आर्थिक विश्लेषण कराने के सुझाव दिए ताकि किसानों को व्यवहारिक और लाभकारी खेती का मॉडल मिल सके।उन्होंने कहा कि स्वस्थ मिट्टी ही समृद्ध खेती की असली नींव है।इसी क्रम में ऑर्गेनिक कार्बन की जांच को जरूरी बताते हुए वैज्ञानिकों को मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने पर विशेष ध्यान देने को कहा।

 सह-फसल मॉडल को बताया भविष्य की खेती 

निरीक्षण के दौरान गन्ने के साथ उर्द,मूंग,लोबिया,भिंडी और मक्का जैसी सह-फसलों की बेहतर स्थिति देखकर सचिव ने इसे “खेती की नई क्रांति” बताया।उन्होंने कहा कि एक खेत में कई फसलें लेने का मॉडल किसानों की आय बढ़ाने के साथ जोखिम भी कम करेगा और भविष्य में यही खेती का सबसे सफल तरीका बनेगा।सचिव ने ढैंचा जैसी हरी खाद को बढ़ावा देने की बात कहते हुए सुझाव दिया कि खेती को रसायन आधारित पद्धति से निकालकर प्राकृतिक संतुलन आधारित मॉडल की ओर ले जाना समय की मांग है।

 मक्का उत्पादन को बताया लाभकारी विकल्प 

मक्का उत्पादन को लेकर उन्होंने कहा कि ग्रीष्मकालीन धान की अपेक्षा मक्का किसानों के लिए अधिक लाभकारी विकल्प बन सकता है।साथ ही उन्होंने मक्का के सुरक्षित भंडारण और नमी नियंत्रण पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी।उन्होंने कहा कि मक्का में नमी की मात्रा 14 प्रतिशत से कम रखना गुणवत्ता बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी है।

 नवाचार गांव-गांव पहुंचाने पर जोर

इस दौरान धान की सीधी बुवाई तकनीक,उन्नत प्रजातियों के चयन और आधुनिक कृषि तकनीकों पर भी विस्तार से चर्चा हुई।सचिव ने कृषि विज्ञान केंद्र के नवाचारों और अनुसंधान कार्यों का सोशल मीडिया एवं किसान समूहों के माध्यम से व्यापक प्रचार-प्रसार कर गांव-गांव तक पहुंचाने पर जोर दिया।भ्रमण के दौरान उप कृषि निदेशक राम किशन सिंह,डॉ. मयंक कुमार राय,डॉ. सुनीता पंत,डॉ. नरेंद्र सिंह,डॉ. अनुज बंसल,डॉ. हमवीर सिंह,डॉ. आर.एन. सिंह एवं बी.एस. नेगी सहित कई वैज्ञानिक एवं अधिकारी उपस्थित रहे।

RELATED ARTICLES
- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments