मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला विवाद में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए परिसर को मंदिर माना है। अदालत ने कहा कि यदि मस्जिद पक्ष चाहे तो वह सरकार से अलग जमीन आवंटित करने के लिए आवेदन कर सकता है।
क्या है भोजशाला विवाद?
धार की भोजशाला लंबे समय से धार्मिक पहचान को लेकर विवादों के केंद्र में रही है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा संरक्षित इस परिसर को हिंदू पक्ष मां सरस्वती का प्राचीन मंदिर और विद्या केंद्र मानता है। दूसरी ओर मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता रहा है। जैन समुदाय के एक वर्ग का दावा है कि यह स्थल प्राचीन जैन मंदिर और गुरुकुल था।
हिंदू पक्ष को पूजा का अधिकार
इस मामले में हिंदू पक्ष की ओर से दायर याचिका में भोजशाला को मंदिर घोषित करने और वर्ष भर पूजा-अर्चना की अनुमति देने की मांग की गई थी। फैसले के बाद हिंदू पक्ष के अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने कहा कि अदालत के निर्णय से हिंदू समाज को पूजा का अधिकार मिला है।
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