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बस्ती। आर्य समाज नई बाजार में पुरुषोत्तम मास के शुभारंभ पर साप्ताहिक सत्संग का आयोजन किया गया। इस अवसर पर वैदिक यज्ञ और आध्यात्मिक कार्यक्रम संपन्न हुआ। कार्यक्रम का नेतृत्व प्रधान ओम प्रकाश आर्य ने किया। श्रद्धालुओं ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ यज्ञ में आहुतियां दीं और पुरुषोत्तम मास के महत्व को समझा। यज्ञ के दौरान योगाचार्य गरुण ध्वज पाण्डेय और योग शिक्षक नितीश कुमार ने पुरुषोत्तम मास के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह मास आत्मशुद्धि, संयम और आध्यात्मिक उन्नति का श्रेष्ठ अवसर है। उनके अनुसार, सात्विक आहार, योग, यज्ञ, तप, दान और भक्ति के माध्यम से इस अवधि में महापुण्य अर्जित किया जा सकता है। इस मास में किए गए दान और सत्कर्म को अत्यंत फलदायी माना जाता है। वक्ताओं ने पुरुषोत्तम मास, जिसे अधिक मास या मलमास भी कहते हैं, के वैदिक और वैज्ञानिक महत्व को समझाया। उन्होंने बताया कि वैदिक काल से ही समय की गणना सूर्य और चंद्रमा की गति के आधार पर होती रही है। सौर वर्ष लगभग 365 दिन 6 घंटे का होता है, जबकि चंद्र वर्ष लगभग 354 दिन का। इन दोनों के बीच प्रतिवर्ष लगभग 11 दिनों का अंतर आता है। इस अंतर को संतुलित करने के लिए हर तीसरे वर्ष एक अतिरिक्त मास जोड़ा जाता है, जिसे अधिक मास कहा जाता है। यह व्यवस्था ऋतुओं, व्रतों और त्योहारों का संतुलन बनाए रखती है। भारत स्वाभिमान ट्रस्ट यूनिट बस्ती के कोषाध्यक्ष नवल किशोर चौधरी ने कहा कि यह मास ईश्वर आराधना, मंत्र जाप, ध्यान और आत्मचिंतन के लिए समर्पित है। उन्होंने बताया कि इस अवधि में किए गए जप, भजन, कीर्तन और दान का पुण्य अक्षय होता है। कार्यक्रम में भजन-कीर्तन, वैदिक ग्रंथों का स्वाध्याय और सामूहिक जलपान भी आयोजित किया गया। इस अवसर पर राजेश्वरी गौतम, उपेन्द्र आर्य, गणेश आर्य, श्रद्धा, शुभम, अरविंद साहू, विश्वनाथ आर्य, रिमझिम, पुनीत कुमार, परी, शेखर श्रीवास्तव सहित कई श्रद्धालु उपस्थित थे।
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बस्ती में आर्य समाज के पुरुषोत्तम मास का शुभारंभ:वैदिक यज्ञ और आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित
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