आईआईटी व एनआईटी के विद्यार्थियों से ही सोन नदी को करा लें जांच , खुल जाएगा भ्रष्टाचार का पोल और काले कारनामे
रवीश कुमार मणि
पटना, 19 मई ( तरूणमित्र ) । भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की बात सम्राट सरकार पुरज़ोर रूप से कर रही है । सभी जिलों के कार्यकलाप देखने के लिए प्रभारी मंत्री, प्रभारी सचिव व प्रभारी पुलिस अधिकारी को दायित्व दिया गया है । दौड़ा और निरीक्षण की खबरें आती है लेकिन जिले में पदस्थापित पदाधिकारी क्या गुल खिला रहें और उनके विरुद्ध क्या कार्रवाई की अनुशंसा की गई है इसकी आज तक कोई खबर साझा नहीं किया जाता है । पैरवी- पहुंच पर पोस्टिंग होती है तो कार्रवाई करने की किसकी हिम्मत है , समझदार लोगों के लिए इशारा ही काफ़ी है ….॥
सूबे के विकास के लिए राजस्व की प्राप्ति अहम है । शराबबंदी के बाद सबसे अधिक ( एक या दूसरे नंबर ) राजस्व की प्राप्ति खनन विभाग से हों रही है । पिछले वित्तीय वर्ष में जो लक्ष्य सरकार ने दिया था उसे पुरा करने के लिए हर हथकंडे को अपनाया गया , यहां तक की अवैध बालू खनन करने की छूट दी गयी और कार्रवाई को नजरंदाज किया गया । यह आरोप मिथ्या नहीं है । सोन नदी में अवैध खनन मुख्यालय के अधिकारियों व जिला के ज़िलाधिकारियों को भले ही दिखाई नहीं दें लेकिन गुगल अर्थ में साधारण व्यक्ति भी अवैध खनन से हुए सोन नदी की दुर्दशा को देख सकता है और कहं सकता है की नियमों के विपरीत खुलेआम ई सी एरिया से बाहर और सोन नदी के प्राकृतिक प्रवाह ( धारा ) को अवरुद्ध कर अवैध खनन किया जा रहा है । नये खनन मंत्री के रूप में पदभार ग्रहण करने के पूर्व डा प्रमोद कुमार चंद्रवंशी ने शंखनाद कर बालू माफियाओं को चेतावनी दिया है की बालू के अवैध खनन और काले कारोबार बंद होंगे ।
खनन मंत्री डा प्रमोद कुमार चंद्रवंशी ने बालू माफियाओं के खिलाफ बिगुल फूंक दिया है , कार्रवाई होती है या फिर समझौता यह समय तय करेगा . मंत्रीजी का जी का मनोबल टाइट रहें इसके लिए ध्यान आकृष्ट करना चाहता हूँ की पांच जिलों में फैले सोन नदी ( क्रमशः रोहतास, औरंगाबाद, अरवल, भोजपुर, पटना ) का भ्रमण जाकर करें बढ़ती गर्मी में संभव शायद न हो लेकिन सचिवालय में बैठकर लैपटॉप- कम्प्यूटर पर गुगल अर्थ के माध्यम से सोन नदी में खुलेआम हो रहे अवैध खनन , ई सी एरिया से बाहर अवैध खनन , प्राकृतिक प्रवाह ( धारा ) के बीचोंबीच पानी के अंदर से बालू का अवैध खनन होने की पुष्टि हो जाएगा और तय करने में कोई देर नहीं लगेगा की आख़िर खेल कैसे चल रहा है ।
एनजीटी का गाइडलाइन और बालू खनन अधिनियम 2019 , कार्रवाई के लिए गीता और रामायण है । यह दोनों को एक बार देख लेंगे तो निर्णय लेना आसान होगा । यह भी मालूम होना चाहिए की बिहार में बालू खनन सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हो रहा है और बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में शपथ पत्र दाखिल किया है की एनजीटी के गाइडलाइन का अक्षरशः पालन किया जाएगा । यहां तो 80% खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है । अवैध बालू खनन से हुए सोन नदी की दुर्दशा गुगल अर्थ पर साफ़ दिखाई दे रहा है , अगर यह बात सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गयी तो जबाब देना मुश्किल हो जाएगा और राज्य सरकार को हज़ारों करोड़ रूपए जुर्माना देना पड़ सकता है ।
मंत्री जी व सचिव जी , बिहार बालू खनन अधिनियम 2019 में अवैध बालू खनन व अवैध बालू कारोबार रोकने के लिए जिले में टास्क फ़ोर्स गठित है । इसमें जिला के ज़िलाधिकारी अध्यक्ष तो पुलिस अधीक्षक सदस्य है । पांच जिले में फैले सोन नदी को कितने बार उक्त जिलों के ज़िलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक ने दौरा कर नदी का निरीक्षण किया है । अगर किया है तो अवैध बालू खनन पर अपने स्तर से क्या कार्रवाई किये है । जिले में गठित टास्क फ़ोर्स क्या हाथी के दाँत समान है । ई सी जारी करने वाली संस्था सीआ ने कितने बार निरीक्षण किया है शायद एक भी बार नही, प्रदूषण विभाग का भी हाल कुछ ऐसा ही है । मंत्री जी , सोन नदी का निरीक्षण क्यों नहीं किया जा रहा है आप समझ सकते है । विशेषज्ञों की छोड़िए सचिवालय से महज 30 किलोमीटर की दूरी पर बिहटा आईआईटी व एनआईटी है वहां पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों से ही गुगल अर्थ के माध्यम से सोन नदी का जांच करा लिजिए, भ्रष्टाचार का पोल और काले कारनामे उजागर हो जाएंगे । पूर्व के मंत्री जी भी अवैध बालू खनन व अवैध बालू कारोबार पर बोलते बहुत थे लेकिन हुआ कुछ नहीं । बालू माफियाओं के खिलाफ नये खनन मंत्री का शंखनाद कितना असरदार रहता है यह आगे देखना होगा ।












