कृषि विज्ञान केंद्र सोहना के कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रवेश कुमार देहाती ने सोमवार को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर किसानों को आग से फसल बचाने के उपाय बताए। जनपद सिद्धार्थनगर में रबी की प्रमुख फसल गेहूं लगभग पककर तैयार हो गई है और इसकी कटाई भी शुरू हो गई है। उन्होंने बताया कि बढ़ते तापमान और शुष्क मौसम के कारण गेहूं की पकी फसल में आग लगने का खतरा बढ़ गया है। प्रति वर्ष सैकड़ों बीघा गेहूं की फसल जलकर नष्ट हो जाती है, जिससे किसानों को भारी नुकसान होता है। डॉ. देहाती के अनुसार, गेहूं की पकी फसल में लगने वाली 65 प्रतिशत से अधिक आग खेतों के ऊपर से गुजरने वाले बिजली के तारों में शॉर्ट सर्किट, ढीले तारों के टकराने या ट्रांसफार्मर में खराबी के कारण लगती है। इसके अलावा, सूखी फसल में बीड़ी-सिगरेट पीकर फेंक देना भी आग लगने का एक प्रमुख कारण है। उन्होंने कहा कि कुछ जरूरी उपाय और सावधानियां बरतकर आग से होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है। प्रमुख उपायों में गांवों के लोगों के मोबाइल में अग्निशमन विभाग, पुलिस और एम्बुलेंस के टोल फ्री नंबर सेव करना और इन नंबरों को गांव के प्रमुख स्थानों पर लिखना शामिल है, ताकि आग लगने की दुर्घटना होने पर तत्काल सहायता मिल सके। किसानों को सलाह दी गई है कि वे ट्रांसफार्मर और बिजली के खंभों के आसपास की फसल पहले काट लें और उस जगह को साफ रखें। ढीले या जर्जर तारों को तुरंत बदलवाएं। फसल के खेत में, खेत के किनारे या खलिहान में बीड़ी-सिगरेट बिल्कुल न पिएं और यदि कोई ऐसा करते पाया जाए तो उसे दंडित किया जाए। कंबाइन हार्वेस्टर या थ्रेशर का उपयोग करते समय विशेष सावधानी बरतें। ट्रैक्टर के साइलेंसर का मुंह ऊपर की तरफ रखें ताकि चिंगारी फसल पर न गिरे। मशीन चलाते समय पानी का स्प्रेयर साथ रखें। खेतों के बीच फायर लाइन (10-15 फुट चौड़ी खाली पट्टी) बनाएं और डिस्क हैरो या कल्टीवेटर से जुताई कर दें। खेतों में पानी की टंकियों में पानी भरकर रखें। कटाई के बाद पराली न जलाएं, क्योंकि इससे पड़ोसी खेतों में भी आग फैल सकती है। आग लगने की स्थिति में तुरंत मिट्टी डालें या पानी का छिड़काव करें।
इटवा में गेहूं की फसल में आग का खतरा:कृषि वैज्ञानिक ने कहा- मशीन चलाते समय पानी का स्प्रेयर साथ रखें
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