ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और उसकी सरकारों पर गौ रक्षा के मुद्दे को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने पश्चिम बंगाल की बीजेपी सरकार के एक फैसले को लेकर पार्टी पर जमकर हमला बोला। हाल ही में बंगाल सरकार ने एक आदेश जारी किया था जिसमें 14 साल से कम उम्र की गायों को काटने पर रोक लगा दी गई थी। सरकार के इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि चुनाव के समय गाय को गौ माता बताने वाले नेता सत्ता में आने के बाद उसे भूल जाते हैं।
शंकराचार्य ने कटाक्ष करते हुए कहा, ‘ 14 साल तक गाय मां रहेगी, उसके बाद सब्जी-भाजी हो जाएगी। यह इनता हिंदु्त्व है। बीजेपी के हिंदुत्व की कलई अब खुल चुकी है। असम के मुख्यमंत्री ने भी यही कहा था। जब उनसे पूछा गया कि गाय का मांस खाने वालों की वोट चाहिए तो उन्होंने कहा था कि क्यों नहीं चाहिए? हम मना नहीं करते। इनकी कलई अब परत दर परत खुल रही है।’ उनके इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है।
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गौ रक्षा को लेकर उठाए सवाल
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद लंबे समय से गाय को राष्ट्र माता या राज्य माता घोषित करने की मांग उठाते रहे हैं। हाल ही में उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार को 40 दिन का अल्टीमेटम देते हुए कहा था कि यदि सरकार वास्तव में हिंदुत्व और गौ सेवा के प्रति प्रतिबद्ध है तो उसे गाय को राज्य माता घोषित करना चाहिए।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि देश में गौ हत्या और गौ मांस का कारोबार बंद नहीं हुआ है, जबकि चुनावी मंचों से गौ रक्षा के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं। शंकराचार्य ने कहा कि केवल भगवा वस्त्र पहन लेने या भाषण देने से कोई हिंदुत्ववादी नहीं हो जाता, बल्कि गौ रक्षा के लिए ठोस कदम उठाने पड़ते हैं।
गौमांस का निर्यात जारी
अपने हालिया बयानों में शंकराचार्य ने सरकार पर यह कहते हुए भी निशाना साधा कि एक तरफ रामराज्य की बात की जाती है, जबकि दूसरी तरफ देश से बड़े पैमाने पर गौमांस निर्यात होने के आरोप लगते रहते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सरकार वास्तव में गौ भक्त है तो फिर गौ हत्या पर सख्त राष्ट्रीय कानून क्यों नहीं बनाया गया।
पहले भी कर चुके हैं विरोध
यह पहली बार नहीं है जब शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने केंद्र सरकार या बीजेपी की नीतियों पर सवाल उठाए हों। इससे पहले भी वह गौ हत्या पर रोक लगाने, गाय को राष्ट्र माता घोषित करने और गौ संरक्षण कानून को सख्त बनाने की मांग को लेकर धरना दे चुके हैं। छत्तीसगढ़ के भिलाई में उन्होंने सार्वजनिक प्रदर्शन कर सरकार से गौ हत्या रोकने के लिए कड़े कानून बनाने की मांग की थी। अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा को लेकर भी उन्होंने कुछ फैसलों पर आपत्ति जताई थी, जिसके बाद वे राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आए थे।
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गाय को राष्ट्रीय पशु बनाने पर बहस
भारतीय जनता पार्टी गाय को लेकर लंबे समय से राजनीतिक बहस करती आई है। पार्टी के तमाम नेता खुद को गौ सेवल घोषित करने में लगे हैं। पार्टी के नेता और समर्थक गौ हत्या के खिलाफ खुलकर बोलते हैं और गाय को राष्ट्रीय पशु बनाने की मांग करते हैं। हालांकि, एक सच्चाई यह भी है कि बीजेपी शासित राज्यों में गाय के मांस का व्यापार होता है। बंगाल में नई सरकार बनने के बाद गौ हत्या पर रोक लगी लेकिन 14 साल से ऊपर की गाय को काटने की अनुमति भी मिली। इसको लेकर राजनीतिक बवाल जारी है। वहीं, ईद पर कई जगहों पर मुस्लिम समुदाय के लोगों ने गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग की।












