HomeHealth & Fitnessभीषण गर्मी में बिजली कर्मियों की छंटनी पर रोक की मांग तेज

भीषण गर्मी में बिजली कर्मियों की छंटनी पर रोक की मांग तेज

लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड द्वारा भीषण गर्मी, हीट वेव तथा प्रदेश में लगातार बढ़ रही रिकॉर्ड बिजली मांग को देखते हुए स्थानांतरण सत्र 2026-27 की अवधि आगे बढ़ाने के प्रस्ताव का हवाला देते हुए कहा है  कि पावर कारपोरेशन प्रबंधन ने स्वयं यह स्वीकार किया है कि वर्तमान समय में निर्बाध विद्युत आपूर्ति बनाए रखने, विद्युत लाइनों एवं उपकरणों के बेहतर अनुरक्षण तथा फील्ड में त्वरित फॉल्ट अटेंड करने के लिए अनुभवी अधिकारियों एवं कर्मचारियों की मौजूदा तैनाती स्थल पर आवश्यकता है। यही कारण है कि तबादलों की समय सीमा 31 मई से बढ़ाकर 15 जुलाई 2026 तक करने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है।

संघर्ष समिति ने कहा कि जब प्रबंधन स्वयं यह मान रहा है कि भीषण गर्मी और बढ़ती बिजली मांग के इस कठिन दौर में बड़े पैमाने पर तबादले होने से विद्युत व्यवस्था प्रभावित हो सकती है, तब इसी संदर्भ में वर्टिकल सिस्टम के नाम पर संविदा कर्मचारियों की गई और की जा रही छंटनी, अनुभवी नियमित कर्मचारियों को हटाए जाने तथा डाउनसाइजिंग के नाम पर लगभग 45 प्रतिशत तक संविदा कर्मियों को कार्यमुक्त किए जाने का निर्णय भी तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाना चाहिए।

संघर्ष समिति ने कहा कि इसी संदर्भ में मार्च 2023 और निजीकरण के विरोध में चल रहे शांतिपूर्ण आंदोलन के फलस्वरूप बिजली कर्मियों पर की गई समस्त उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां भी तत्काल वापस ली जाए जिससे इन  बिजली कर्मियों का भीषण गर्मी में निर्बाध बिजली आपूर्ति करने में पूरा योगदान लिया जा सके।

संघर्ष समिति ने कहा कि वर्तमान समय में प्रदेश की विद्युत व्यवस्था अत्यंत चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रही है। लगातार बढ़ती बिजली मांग, भीषण गर्मी, हीट वेव और सीमित मानव संसाधनों के बीच बिजली कर्मी दिन-रात कार्य कर रहे हैं। ऐसे समय में अनुभवी कर्मचारियों और संविदा कर्मियों की संख्या कम करना विद्युत व्यवस्था को और अधिक संकटग्रस्त बना सकता है।

संघर्ष समिति ने स्पष्ट कहा कि विद्युत व्यवस्था को सामान्य बनाए रखने में संविदा कर्मियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। फील्ड में फॉल्ट अटेंड करने, लाइन अनुरक्षण, उपभोक्ता शिकायतों के समाधान तथा आपातकालीन परिस्थितियों में यही कर्मचारी सबसे आगे रहकर कार्य करते हैं। इसलिए किसी भी प्रकार की जल्दबाजी में की जा रही छंटनी और कर्मचारियों को हटाने की कार्यवाही जनहित एवं विद्युत व्यवस्था — दोनों के लिए नुकसानदेह सिद्ध होगी।

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने मांग की है कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए वर्टिकल सिस्टम के नाम पर जारी सभी कर्मचारी विरोधी कार्यवाहियों पर तत्काल रोक लगाई जाए, संविदा कर्मियों की सेवाएं बहाल रखी जाएं, अनुभवी कर्मचारियों को हटाने के निर्णय वापस लिए जाएं तथा समस्त उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां समाप्त की जाए ताकि प्रदेश में निर्बाध एवं गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।

RELATED ARTICLES
- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments