नवीन मॉडर्न थाना क्षेत्र अंतर्गत राजगढ़ गुलरिहा स्थित द्विवेदी सदन में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दौरान रविवार रात्रि कथा व्यास पंडित अशोक जी महाराज ने कालिया नाग मर्दन, गोवर्धन लीला एवं कंस वध की भावपूर्ण कथा का श्रवण कराया। कथा सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। कथा व्यास ने बताया कि श्रीधाम वृंदावन में कालिया नाग, गरुड़ के भय से यमुना नदी में आकर रहने लगा था। उसके विषैले प्रभाव से यमुना का जल दूषित हो गया, जिससे पशु-पक्षियों की मृत्यु होने लगी। भगवान श्रीकृष्ण ने यमुना को प्रदूषण से मुक्त कराने के लिए कालिया नाग का दमन किया। ग्वाल-बालों के साथ खेलते हुए वे यमुना में उतरे और कालिया नाग के फनों पर चढ़कर तांडव किया। अंततः कालिया नाग ने प्रभु को पहचान कर क्षमा मांगी और वहां से चला गया। गोवर्धन लीला का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र के अभिमान को तोड़ने के लिए अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा की। बाद में देवराज इंद्र ने अपनी भूल स्वीकार कर भगवान से क्षमा याचना की। कथा स्थल पर गोवर्धन पूजा का भी आयोजन किया गया। कंस वध प्रसंग में बताया गया कि कंस ने अक्रूर के माध्यम से श्रीकृष्ण और बलराम को मथुरा बुलाकर उन्हें विभिन्न षड्यंत्रों से मारने का प्रयास किया, लेकिन भगवान ने सभी बाधाओं को पार करते हुए कंस का वध कर दिया और मथुरा को उसके अत्याचारों से मुक्त कराया। इसके बाद उन्होंने अपने माता-पिता वसुदेव और देवकी को कारागार से मुक्त कराया तथा उग्रसेन को पुनः मथुरा का राजा बनाया। कार्यक्रम का समापन आरती के साथ हुआ। इस दौरान स्वामी नाथ द्विवेदी, गोपी नाथ द्विवेदी, हरि ओम द्विवेदी, राज नारायण शुक्ल, मनोज शुक्ल, नीरज पांडेय, शुभम शुक्ल, संदीप, दीपा, दीपिका, दीप शिखा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
राजगढ़ गुलरिहा के द्विवेदी सदन में श्रीमद्भागवत कथा:कालिया नाग मर्दन से कंस वध तक की कथा सुन भाव-विभोर हुए ग्रामीण
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