उन्नाव। निर्यातोन्मुखी इंटीग्रेटेड पशुवधशालाओं और मांस प्रसंस्करण इकाइयों में लंबे समय से तैनात पशु चिकित्साधिकारियों को हटाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। पशुपालन विभाग के निदेशक, रोग नियंत्रण एवं प्रक्षेत्र डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने 29 मई 2026 को उन्नाव समेत शामली, आगरा, बाराबंकी, अलीगढ़, बुलन्दशहर, झांसी, हापुड़, सहारनपुर, रामपुर, संभल, बरेली, गाजियाबाद, मेरठ। इन जिलों के मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारियों को पत्र जारी कर ऐसे चिकित्सकों के स्थान पर नए नाम प्रस्तावित करने के निर्देश दिए हैं। पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि जिन पशु चिकित्साधिकारियों का एक ही स्थान पर एक वर्ष अथवा सम्पूर्ण सेवाकाल में दो वर्ष से अधिक समय पूरा हो चुका है, उनके स्थान पर अन्य नजदीकी पशु चिकित्साधिकारियों के नाम तत्काल भेजे जाएं। साथ ही यह भी कहा गया है कि प्रस्तावित चिकित्सक ने पूर्व में किसी पशुवधशाला अथवा मांस प्रसंस्करण इकाई में कार्य न किया हो। बताया जा रहा है कि 16 अप्रैल को दैनिक तरुणमित्र में प्रकाशित खबर के बाद इस पूरे मामले का अपर मुख्य सचिव मुकेश मेश्राम ने संज्ञान लिया था। इसके बाद विभागीय स्तर पर मंथन शुरू हुआ और अब शासन स्तर से आदेश जारी होने के बाद विभाग में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
तरुणमित्र की खबर का असर, पशुवधशालाओं में जमे चिकित्सकों को हटाने के आदेश जारी
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