इटवा विकास क्षेत्र के ग्राम सेमरा में शनिवार को भारतीय बौद्ध महासभा के नेतृत्व में एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें ग्रामीणों ने मृत्यु भोज जैसी सामाजिक कुरीति का बहिष्कार करने और भविष्य में इसे न करने का सामूहिक संकल्प लिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीण, महिलाएं और बच्चे उपस्थित थे। कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान तथागत बुद्ध और संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर के चित्रों पर पुष्प अर्पित कर हुआ। भारतीय बौद्ध महासभा के जिला उपाध्यक्ष डॉ. जे.पी. बौद्ध ने उपस्थित लोगों को त्रिशरण एवं पंचशील का पाठ कराया। उन्होंने अपने संबोधन में मृत्यु भोज को एक ऐसी सामाजिक कुरीति बताया, जो परिवारों पर आर्थिक और मानसिक बोझ डालती है। डॉ. बौद्ध ने जोर दिया कि मृत्यु भोज के आयोजन से शोकाकुल परिवार पर अनावश्यक आर्थिक बोझ पड़ता है। उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसे अवसरों पर होने वाले खर्च को शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक विकास के कार्यों में लगाया जाना चाहिए। इससे समाज में सकारात्मक बदलाव आएगा और लोगों का जीवन स्तर सुधरेगा। उन्होंने सभी से इस कुरीति को त्यागने की अपील की। भारतीय बौद्ध महासभा के तहसील अध्यक्ष अनिल गौतम ने बताया कि संगठन लगातार जनजागरूकता अभियान चला रहा है। इसका उद्देश्य समाज में फैले ढोंग, आडंबर और अन्य कुरीतियों के प्रति लोगों को जागरूक करना है। उन्होंने कहा कि जिस तरह अन्य सामाजिक बुराइयों को त्यागा जा रहा है, उसी तरह मृत्यु भोज की परंपरा को भी समाप्त किया जाना चाहिए। कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित ग्रामीणों ने मृत्यु भोज का बहिष्कार करने और समाज में इसके प्रति जागरूकता फैलाने का सामूहिक संकल्प लिया। इस अवसर पर आयोजक सिद्धार्थ गौतम, राम पुजारी, अजय कुमार, अंग्रेज, राजेंद्र कुमार, अनुज कुमार सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।
सेमरा में ग्रामीणों ने मृत्यु भोज का बहिष्कार किया:भारतीय बौद्ध महासभा ने लिया सामाजिक सुधार का संकल्प
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