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नवजात के मौत मामले में सर्जन से तीन घंटे पूछताछ:सिद्धार्थनगर पुलिस ने कब्जे में लिया सीसीटीवी डीवीआर, लोकेशन खंगालेगी पुलिस


सिद्धार्थनगर के इटवा स्थित जनता सेवा हॉस्पिटल में प्रसव के दौरान नवजात शिशु की मौत के मामले में शनिवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में कथित सर्जन डाली शर्मा का करीब तीन घंटे तक बयान दर्ज किया गया। इटवा पुलिस ने अस्पताल में लगे सीसीटीवी कैमरों का डीवीआर और फुटेज अपने कब्जे में ले लिया है। जांच एजेंसियों का मानना है कि डिजिटल साक्ष्य और संबंधित व्यक्तियों की लोकेशन रिपोर्ट से पूरे घटनाक्रम की तस्वीर साफ हो सकेगी। पुलिस अब सीडीआर (कॉल डिटेल रिकॉर्ड) और लोकेशन भी खंगालेगी।
पीड़ित परिवार लगातार आरोप लगा रहा है कि ऑपरेशन के समय कोई योग्य सर्जन, स्त्री रोग विशेषज्ञ या एनेस्थीसिया के डॉक्टर मौजूद नहीं थे। वहीं, शनिवार को बयान देने पहुंचीं डाली शर्मा ने स्वास्थ्य विभाग को बताया कि उन्होंने ही 23 मई की रात लगभग 11 बजे जनता सेवा हॉस्पिटल में ऑपरेशन किया था। मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में हुए बयान के दौरान जांच टीम ने डाली शर्मा से उनकी मौजूदगी, ऑपरेशन की परिस्थितियों, अस्पताल से जुड़े दस्तावेजों तथा चिकित्सकीय प्रक्रिया को लेकर कई सवाल पूछे।
सूत्रों के अनुसार, जांच टीम ने उनके दावों और उपलब्ध अभिलेखों का भी मिलान किया है। अब जांच अधिकारी बयान, दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों का तुलनात्मक परीक्षण कर रहे हैं। सीसीटीवी डीवीआर की फुटेज की जांच से यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना के समय अस्पताल में कौन-कौन लोग मौजूद थे, ऑपरेशन थिएटर में किसकी आवाजाही हुई और चिकित्सकीय प्रक्रिया में किन व्यक्तियों की भूमिका रही। प्रभारी निरीक्षक इटवा संजय मिश्रा ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट मिलने के बाद पुलिस सभी बयानों का विश्लेषण करेगी। इसके साथ ही मामले से जुड़े चिकित्सकों, अस्पताल कर्मियों और अन्य संबंधित व्यक्तियों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) तथा लोकेशन भी खंगाली जाएगी। उन्होंने कहा कि तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर यह पता लगाया जाएगा कि घटना के समय मौके पर कौन मौजूद था, ऑपरेशन किसने किया, एनेस्थीसिया किसने दिया और उपचार प्रक्रिया में कितने लोग शामिल थे। ग्राम सहदेड्या निवासी चंद्रमणी ने आरोप लगाया था कि प्रसव के लिए भर्ती कराई गई उनकी पत्नी वंदना का बिना आवश्यक विशेषज्ञ डॉक्टरों और पर्याप्त सुविधाओं के ऑपरेशन किया गया, जिसके बाद नवजात की मौत हो गई। मामले में अस्पताल संचालक और स्टाफ के खिलाफ मुकदमा दर्ज है तथा स्वास्थ्य विभाग की तीन सदस्यीय टीम जांच कर रही है।

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