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म्यांमार से बढ़ती शरणार्थियों की आमद मिजोरम पर बन रहे बोझ : मुख्यमंत्री लालदुहोमा

शिलांग (मेघालय)। मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने गुरुवार को कहा कि म्यांमार से विस्थापित लोगों का लगातार राज्य में आना अब मिजोरम के लिए एक बड़ा बोझ बनता जा रहा है। उन्होंने आशंका जताई कि पड़ोसी देश में जारी राजनीतिक और सुरक्षा संकट के कारण आने वाले महीनों में और अधिक लोग शरण लेने के लिए मिजोरम पहुंच सकते हैं।

मेघालय की राजधानी शिलांग में एक कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि म्यांमार की मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियों के चलते बड़ी संख्या में विस्थापित लोग मिजोरम में शरण ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि वहां की स्थिति के कारण आजकल हमारे यहां बहुत से विस्थापित लोग आ रहे हैं। संभावना है कि सुरक्षा की तलाश में और भी लोग आएंगे। यह हमारे लिए एक बोझ बन गया है।

मिजोरम, जिसकी म्यांमार के साथ एक खुली अंतरराष्ट्रीय सीमा लगती है और दोनों ओर रहने वाले समुदायों के बीच लंबे समय से जातीय और सांस्कृतिक संबंध रहे हैं। यही कारण है कि म्यांमार में राजनीतिक अस्थिरता और सशस्त्र संघर्ष के बाद हजारों लोग सीमा पार कर मिजोरम में शरण ले चुके हैं।

मुख्यमंत्री की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब राज्य लंबे समय से शरणार्थी संकट से उत्पन्न मानवीय, प्रशासनिक और वित्तीय चुनौतियों का सामना कर रहा है। राज्य सरकार का कहना है कि विस्थापितों की बढ़ती संख्या के कारण स्थानीय संसाधनों, बुनियादी ढांचे और जनकल्याण सेवाओं पर लगातार दबाव बढ़ रहा है।

हालांकि, चुनौतियों के बावजूद मिजोरम सरकार मानवीय आधार पर म्यांमार से आए लोगों को सहायता और आश्रय उपलब्ध करा रही है। राज्य सरकार का मानना है कि सीमा के दोनों ओर रहने वाले समुदायों के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को देखते हुए उनकी मदद करना आवश्यक है।

मुख्यमंत्री लालदुहोमा के बयान के बाद केंद्र सरकार से अतिरिक्त सहायता और शरणार्थी संकट से निपटने के लिए समन्वित रणनीति की मांग एक बार फिर चर्चा में आ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि म्यांमार की स्थिति में जल्द सुधार नहीं हुआ, तो मिजोरम पर शरणार्थियों का दबाव और बढ़ सकता है। 

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