लखनऊ। शुक्रवार लविवि में निष्कासित छात्रों को परीक्षा में शामिल होने से रोके जाने पर को नया विवाद खड़ा हो गया। परीक्षा केंद्र पर पहुंचे निष्कासित छात्रों और प्रॉक्टोरियल बोर्ड के सदस्यों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। छात्र परीक्षा देने की मांग पर अड़े रहे, जबकि प्रॉक्टोरियल बोर्ड ने परीक्षा नियंत्रक के आदेश का हवाला देते हुए उन्हें प्रवेश देने से इनकार कर दिया।
इस दौरान परीक्षा केंद्र के बाहर काफी देर तक हंगामे की स्थिति बनी रही। छात्रों का कहना था कि परीक्षा में शामिल होने का अवसर उनका शैक्षणिक अधिकार है, जबकि विश्वविद्यालय प्रशासन अनुशासनात्मक कार्रवाई के आधार पर उन्हें परीक्षा से वंचित कर रहा है।
काफी देर तक चले विवाद के बाद छात्रों को परीक्षा केंद्र में प्रवेश नहीं मिला। सभी छात्र पुनः अपने धरना स्थल पर पहुंच गए और आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया। उधर, धरना स्थल पर छात्रों का समर्थन करने के लिए विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय और अरविंद सिंह गोप पहुंचे। उन्होंने छात्रों से पूरे मामले की जानकारी ली और विश्वविद्यालय प्रशासन के फैसले को अन्यायपूर्ण बताते हुए आंदोलन को समर्थन देने की बात कही। छात्रों ने धरना स्थल पर “अनिश्चितकालीन धरना, निष्कासन नहीं न्याय चाहिए” का बैनर भी लगाया।
बैनर में तीनों निष्कासित छात्र नेताओं की बहाली, छात्र हितों की बात करने पर हुई अनुशासनात्मक कार्रवाई वापस लेने और फीस वृद्धि को निरस्त करने की मांग की गई है। लविवि में छात्र नेताओं के निष्कासन और फीस वृद्धि को लेकर चल रहा आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। बीते 11 दिनों से छात्रों का धरना जारी। इनके समर्थन में पूर्व छात्र संघ पदाधिकारियों के अलावा कई राजनीतिक दल भी खुलकर बोल रहे है। जबकि विश्वविद्यालय प्रशासन अपने निर्णय पर कायम है।












