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ब्लॉक कार्यालय में बाहरी व्यक्ति चला रहा कंप्यूटर:सफाईकर्मी कर रहा दफ्तर की ड्यूटी, सिद्धार्थनगर CDO बोले- कराई जाएगी जांच


सिद्धार्थनगर के बर्डपुर विकासखंड में सरकारी व्यवस्थाओं और पंचायत संचालन की पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि एक ओर ग्राम पंचायत में तैनात सफाई कर्मचारी को उसके मूल कार्यस्थल से हटाकर ब्लॉक कार्यालय में काम कराया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर एक बाहरी व्यक्ति कार्यालय के कंप्यूटर सिस्टम पर नियमित रूप से कार्य करता दिखाई दे रहा है। मामले से जुड़ा एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें रहमान नामक व्यक्ति सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) कार्यालय में कंप्यूटर संचालित करते हुए दिखाई दे रहा है। स्थानीय लोगों का दावा है कि रहमान कोई सरकारी कर्मचारी नहीं है, बल्कि एक बाहरी व्यक्ति है। लाखों के भुगतान से जुड़ा नाम मामले को और गंभीर बनाने वाली बात यह है कि रहमान के नाम से संचालित मेसर्स रहमान ट्रेडर्स को बर्डपुर विकासखंड की विभिन्न ग्राम पंचायतों से लाखों रुपए का भुगतान किए जाने की जानकारी सामने आई है। जिस व्यक्ति की फर्म पंचायतों से भुगतान प्राप्त कर रही हो, वही यदि ब्लॉक कार्यालय में बैठकर कंप्यूटर संचालन और कार्यालयी कार्य करता दिखाई दे, तो यह हितों के टकराव (कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट) का मामला बन सकता है। सूत्रों के मुताबिक, पंचायतों में हुए विभिन्न भुगतान और खरीद प्रक्रियाओं में इस फर्म का नाम सामने आया है। अब यह जांच का विषय है कि भुगतान किन कार्यों के लिए किए गए, प्रक्रिया कितनी पारदर्शी रही और क्या सभी नियमों का पालन किया गया। सफाईकर्मी गांव छोड़ ब्लॉक कार्यालय में तैनात विवाद का दूसरा पहलू सिंहोरवा बुजुर्ग ग्राम पंचायत से जुड़ा है। आरोप है कि वहां तैनात सफाई कर्मचारी फूलचंद ग्राम पंचायत में सफाई कार्य कराने के बजाय विकासखंड कार्यालय में कार्य कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि नियुक्त सफाई कर्मचारी ब्लॉक कार्यालय में ड्यूटी करेगा तो गांव की सफाई व्यवस्था कौन संभालेगा। लोगों का आरोप है कि इससे ग्रामीण क्षेत्र की स्वच्छता व्यवस्था प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार गांवों में स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर रही है। इसके बावजूद यदि सफाईकर्मियों से उनके निर्धारित कार्य के बजाय कार्यालयी काम लिया जा रहा है, तो इसका सीधा असर गांवों की साफ-सफाई पर पड़ना स्वाभाविक है। मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। लोगों का कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह केवल कर्मचारियों की तैनाती का मामला नहीं होगा, बल्कि पंचायतों में हुए भुगतान, खरीद प्रक्रिया और कार्यालय संचालन की पारदर्शिता पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करेगा। मुख्य विकास अधिकारी बलराम सिंह ने कहा कि मामला संज्ञान में आने पर इसकी जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

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