श्रावस्ती जनपद के नासिरगंज कस्बे में स्थित हुसैनिया इमामबाड़े में करबला के शहीदों की याद में सय्यूम (तीजे की मजलिस) का आयोजन किया गया। इस आयोजन में स्थानीय शिया समुदाय के लोगों ने बड़ी संख्या में भाग लिया और इमाम हुसैन व उनके 72 साथियों की शहादत को याद किया। मजलिस की शुरुआत सोज़-ओ-सलाम से हुई। इसके बाद जाकिर अम्मार रिजवी ने करबला के ऐतिहासिक घटनाक्रम पर प्रकाश डाला। उन्होंने इमाम हुसैन के अधर्म के सामने न झुकने और मानवता व सत्य के लिए दिए गए बलिदान का उल्लेख किया। मजलिस के दौरान पूरा माहौल ‘या हुसैन’ की सदाओं से गूंज उठा। कार्यक्रम के अंतिम चरण में शिया अकीदतमंदों ने नौहाख्वानी (शोक गीत) की और सीनाजनी (मातम) कर करबला के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम के दौरान कस्बे में शांति और सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। मजलिस के समापन पर देश में अमन-चैन, भाईचारे और खुशहाली की दुआ मांगी गई। इस मजलिस में नासिरगंज के शिया समाज के गणमान्य लोग, युवा और बुजुर्ग उपस्थित रहे।
करबला शहीदों की याद में सय्यूम:हुसैनिया इमामबाड़े में शिया समुदाय ने इमाम हुसैन की शहादत को याद किया
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