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प्रो. प्रसांत चंद्र महालनोबिस: भारतीय सांख्यिकी के जनक, जिनके आंकड़ों ने देश का भविष्य गढ़ा


नई दिल्ली। आज देशभर में राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस मनाया जा रहा है। यह दिन आधुनिक भारतीय सांख्यिकी के जनक प्रो. प्रसांत चंद्र महालनोबिस की जयंती के अवसर पर मनाया जाता है। उन्होंने सांख्यिकी को केवल आंकड़ों का विज्ञान नहीं रहने दिया, बल्कि इसे देश के विकास, आर्थिक नियोजन और नीति निर्माण का मजबूत आधार बनाया।
29 जून 1893 को कोलकाता में जन्मे प्रो. महालनोबिस ने प्रेसिडेंसी कॉलेज से भौतिकी की पढ़ाई की। इसके बाद कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में अध्ययन के दौरान उनकी रुचि सांख्यिकी की ओर बढ़ी और उन्होंने इसी क्षेत्र में अपना जीवन समर्पित कर दिया। भारत लौटने के बाद वर्ष 1931 में उन्होंने इंडियन स्टैटिस्टिकल इंस्टीट्यूट (ISI) की स्थापना की, जो आज विश्व के प्रमुख सांख्यिकी एवं अनुसंधान संस्थानों में गिना जाता है।
प्रो. महालनोबिस का सबसे चर्चित योगदान ‘महालनोबिस डिस्टेंस’ (Mahalanobis Distance) है, जिसका उपयोग आज मशीन लर्निंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा साइंस जैसे आधुनिक क्षेत्रों में भी किया जाता है। इसके अलावा, उन्होंने वर्ष 1950 में राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण (NSS) की शुरुआत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसके आंकड़े आज भी सरकार की सामाजिक और आर्थिक नीतियों का आधार बनते हैं।
स्वतंत्र भारत की दूसरी पंचवर्षीय योजना भी उनके आर्थिक मॉडल पर आधारित थी। इस योजना के माध्यम से देश में भारी उद्योगों के विकास को प्राथमिकता दी गई, जिसने भारत के औद्योगिकीकरण की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने 1933 में अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका ‘संख्या’ की भी शुरुआत की, जो आज भी सांख्यिकी जगत की प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में शामिल है।
प्रो. महालनोबिस तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के प्रमुख सलाहकारों में थे। उनकी वैज्ञानिक सोच और साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण की अवधारणा ने स्वतंत्र भारत की विकास योजनाओं को नई दिशा दी। उनके योगदान के लिए भारत सरकार ने वर्ष 1968 में उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया। 28 जून 1972 को, अपने 79वें जन्मदिन से एक दिन पहले, उनका निधन हो गया।
भारत सरकार ने वर्ष 2007 से उनकी जयंती पर प्रत्येक वर्ष 29 जून को राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस मनाने की शुरुआत की। इसका उद्देश्य आधिकारिक सांख्यिकी के महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाना, युवाओं को डेटा साइंस और अनुसंधान की ओर प्रेरित करना तथा साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण को बढ़ावा देना है।
आज जब भारत डिजिटल अर्थव्यवस्था और ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है, तब प्रो. पी.सी. महालनोबिस का संदेश पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक है। उनका मानना था कि मजबूत नीतियों की नींव विश्वसनीय आंकड़ों पर ही रखी जा सकती है। यही सोच आज भी भारत के विकास की दिशा तय करने में मार्गदर्शक बनी हुई है।
राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस के अवसर पर देशभर में विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी संगठनों द्वारा संगोष्ठियों, व्याख्यानों और प्रतियोगिताओं का आयोजन कर प्रो. महालनोबिस के योगदान को याद किया जा रहा है।

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