लखनऊ । बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के अस्थिकलश को शहर के ऐशबाग में बन रहे अंबेडकर पेरणा स्थल में विस्थापित करने की चर्चा बीते कई माह से तेज है। इसे लेकर कुछ राजनीतिक दलों एवं अनुयाइयों द्वारा धरना प्रदर्शन एवं आंदोलन किया जा रहा है। मंगलवार को आरपीआई ने शांति मार्च निकाल विरोध जताया। इसी बीच पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि डॉ आंबेडकर के अस्थिकलश को किसी भी प्रकार का स्थानांतरण संबंधी निर्णय नहीं लिया गया है। इसे स्थानांतरित किए जाने संबंधी चर्चा भ्रामक एवं तथ्यहीन हैं।
जयवीर सिंह ने बताया कि सरकार बाबा साहेब से जुड़े सभी स्थलों को गरिमापूर्ण स्वरूप देने और उन्हें सांस्कृतिक एवं सामाजिक चेतना के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। ऐशबाग में निमार्णाधीन लगभग 16.20 करोड़ रुपये की लागत से स्मारक परिसर के बाह्य विकास, फसाड और हॉर्टीकल्चर से जुड़े कार्य तेजी से चल रहे हैं। बाउंड्रीवाल, स्टोन क्लैडिंग, तीन गेटों एवं तीन गार्ड रूम के स्ट्रक्चर, तोरण द्वार तथा प्रतिमा के पैडेस्टल का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है। लगभग 43.69 करोड़ रुपये की लागत से आंबेडकर स्मारक एवं सांस्कृतिक केन्द्र के निर्माण कार्य पहले ही पूर्ण किए जा चुके हैं। इसमें कार्यालय भवन, बेसमेंट, प्रतिमा हेतु फाउंडेशन, सब-स्टेशन, पम्प रूम, गार्ड रूम, आंतरिक सड़क, सीवर लाइन का निर्माण कराया गया है। वहीं लगभग 44.43 करोड़ रुपये की लागत से 500 सीट क्षमता वाले अत्याधुनिक प्रेक्षागृह एवं आॅडिटोरियम की आंतरिक और बाहरी साज-सज्जा का कार्य भी तेजी से प्रगति पर है। इस परियोजना को 31 जुलाई 2026 तक पूर्ण किए जाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने लोगों से अपील की कि अस्थिकलश के संबंध में किसी भी प्रकार की अपुष्ट अथवा भ्रामक जानकारी पर विश्वास न करें।
नहीं हटेगा अंबेडकर का अस्थि कलश
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