लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने ऊर्जा निगमों के शीर्ष प्रबंधन पर दमनकारी रवैया अपनाने, संवादहीनता बनाए रखने तथा शासन एवं मुख्य सचिव के स्पष्ट निर्देशों की लगातार अवहेलना करने का गंभीर आरोप लगाया है। संघर्ष समिति का कहना है कि प्रबंधन की हठधर्मिता और कर्मचारी विरोधी नीतियों के कारण ऊर्जा निगमों में औद्योगिक अशांति का वातावरण लगातार गहराता जा रहा है,जिसका प्रतिकूल प्रभाव विद्युत व्यवस्था पर भी पड़ रहा है।
संघर्ष समिति ने कहा कि प्रदेश के मुख्य सचिव द्वारा समय-समय पर सभी विभागों को निर्देश दिए जाते रहे हैं कि मान्यता प्राप्त श्रमिक संगठनों एवं सेवा संघों के साथ नियमित वार्ता कर उनकी समस्याओं का समाधान किया जाए। किंतु अत्यंत आश्चर्य और दुर्भाग्य का विषय है कि पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन ने पिछले तीन वर्षों में एक बार भी विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति,उप्र से औपचारिक वार्ता करना आवश्यक नहीं समझा।
संघर्ष समिति ने कहा कि विगत वर्षों में ऊर्जा मंत्री के साथ संघर्ष समिति के कई महत्वपूर्ण लिखित समझौते हुए, परंतु पॉवर कॉरपोरेशन प्रबंधन ने उन्हें पूरी तरह ठंडे बस्ते में डाल दिया। जब इन समझौतों को लागू कराने के लिए मार्च 2023 में संघर्ष समिति ने सांकेतिक आंदोलन किया, तो समस्याओं का समाधान करने के बजाय बिजली कर्मियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई तथा उनके विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराई गई। संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि सामान्य धरना-प्रदर्शनों तक को आधार बनाकर कर्मचारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाइयाँ की जा रही हैं। दूसरी ओर निजीकरण और डाउनसाइजिंग की नीति के तहत लगातार संविदा कर्मियों की सेवाएं समाप्त की जा रही हैं। इससे कर्मचारियों का मनोबल प्रभावित हो रहा है तथा विद्युत आपूर्ति व्यवस्था पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
दमनकारी रवैये से ऊर्जा निगमों में अशांति: संघर्ष समिति
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