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शंकरपुर मेंकरोड़ों खर्च के बावजूद भौसिया कैनाल सूखी:धान रोपाई के समय किसानों को सिंचाई के लिए नहीं मिल रहा पानी

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विक्रमजोत विकास क्षेत्र के भौसिया गांव में स्थित चौधरी चरण सिंह पंप कैनाल सूखी पड़ी है, जिससे किसानों को धान की रोपाई के लिए सिंचाई का पानी नहीं मिल पा रहा है। करोड़ों रुपये की लागत से बनी यह नहर हर साल की तरह इस बार भी किसानों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। किसानों का कहना है कि यह समस्या हर साल सामने आती है। जब उन्हें सिंचाई के लिए पानी की सबसे अधिक आवश्यकता होती है, तब नहर में पानी नहीं होता। वहीं, जब खेतों में पहले से पानी भरा होता है, तो नहरों के कटने या रिसाव से उनकी फसलें बर्बाद हो जाती हैं। सरकार ने किसानों को सस्ती सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से भौसिया गांव में करोड़ों रुपये की लागत से चौधरी चरण सिंह अयोध्या पंप नहर और पंप हाउस का निर्माण कराया था। इस क्षेत्र में नहरों का एक बड़ा जाल भी बिछाया गया है। हालांकि, विभागीय उदासीनता के कारण धान की नर्सरी डालने का समय बीत चुका है, लेकिन भौसिया पंप कैनाल से निकलने वाली नहरों में केवल बाढ़ या मानसूनी बारिश के दौरान ही पानी उपलब्ध रहता है। शंकरपुर निवासी पतिराम यादव, अशोक मौर्य, संजीत यादव और बस्थनवां निवासी करुणेश यादव, धर्मपाल सिंह, राम कुमार प्रजापति जैसे किसानों ने बताया कि नहर स्थापित होने पर उन्हें उम्मीद थी कि सिंचाई की समस्या दूर हो जाएगी। लेकिन, इस नहर में साल में केवल 2 से 3 महीने ही पानी छोड़ा जाता है, वह भी बरसात के दिनों में। बाकी समय नहर सूखी रहती है। इससे किसानों को अपनी फसलों की सिंचाई के लिए महंगे ईंधन से चलने वाले निजी सिंचाई यंत्रों का उपयोग करना पड़ता है। रैदासपुर निवासी संदीप सिंह सहित अन्य किसानों का कहना है कि नहर होने या न होने का कोई मतलब नहीं है, क्योंकि यह साल भर में केवल दो-तीन महीने ही चलती है, वह भी बाढ़ आने पर। किसानों ने सरकार और विभागीय अधिकारियों से नहर में पानी की स्थायी व्यवस्था करने की मांग की है। इस संबंध में एस.डी.ओ. पी. जायसवाल ने बताया कि नहर चलाई गई थी, लेकिन नदी में पानी नहीं था। उन्होंने उम्मीद जताई कि शाम से पानी बढ़ रहा है और कल तक नहर में पानी आ जाएगा।
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