बाबागंज और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में मोहर्रम की सातवीं पर मंगलवार रात जुलूस निकाले गए। इन जुलूसों में बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग शामिल हुए। इस अवसर पर पैगंबर मोहम्मद साहब के नवासे इमाम हुसैन और उनके साथियों के बलिदान को याद किया गया। इस्लाम धर्म में मोहर्रम का महीना पैगंबर मोहम्मद साहब के नवासे इमाम हुसैन और उनके साथियों की शहादत की याद में मनाया जाता है। यह अन्याय और अत्याचार के खिलाफ उनके संघर्ष और बलिदान का प्रतीक है। इमाम हुसैन ने अपने दर्जनों साथियों के साथ दस दिनों तक भूखे-प्यासे रहकर संघर्ष किया था। जुलूस में बच्चों और महिलाओं वा युवाओं सहित सैकड़ों की संख्या में लोग शामिल हुए। उन्होंने इमाम हुसैन और उनके साथियों के दस दिवसीय संघर्ष को याद करते हुए नारे लगाए और मातम किया। इस अवसर पर समाजसेवी मुन्ना अली, जो मुन्ना मोबाइल शॉप के प्रोपराइटर हैं, ने लोगों को सिन्नी और पानी पिलाकर जरूरतमंदों की मदद की। उन्होंने कहा कि मोहर्रम की इन दस तारीखों में गरीबों को अधिक से अधिक भोजन कराना और उनकी सहायता करना महत्वपूर्ण है। इस मौके पर प्रधान प्रतिनिधि शेरू, राजा, शाकिर, डल्लू भाई, शाहिद सहित कई अन्य लोग मौजूद रहे। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए चौकी इंचार्ज शिवेश शुक्ला, कांस्टेबल घननू कुमार, प्रशांत वर्मा, उचित गौतम और भीष्म यादव,सत्यम सोनी भी उपस्थित थे।
बहराइच में मोहर्रम की सातवीं पर जुलूस निकाले गए:अकीदतमंदों ने हजरत इमाम हुसैन की शहादत को किया याद
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