गाजियाबाद । लोनी में अपहरण, रंगदारी और हत्या के आरोपी सलीम वास्तिक की गिरफ्तारी के बाद पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि पुलिस ने बिना उसका आपराधिक रिकॉर्ड खंगाले ही उसे सुरक्षा मुहैया करा दी। इतना ही नहीं, जिन मकानों में वह किराए पर रह रहा था, उनका सत्यापन भी नहीं कराया गया, जिससे पुलिस की लापरवाही उजागर हुई है।
लोनी क्षेत्र में बड़ी संख्या में बाहरी लोग किराए के मकानों में रहते हैं। आमतौर पर मकान मालिक बिना पुलिस सत्यापन के ही किरायेदार रख लेते हैं। इस मामले में भी यही स्थिति सामने आई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते किरायेदारों का सत्यापन किया जाता, तो सलीम वास्तिक जैसे आरोपी पहले ही पकड़ में आ सकते थे।
बताया जाता है कि वर्ष 2010 में सलीम लोनी में आकर बस गया था और उसने सलीम खान उर्फ सलीम वास्तिक के नाम से नई पहचान बना ली। यहां उसने महिलाओं के कपड़ों की दुकान खोली और जैकेट के आयात-निर्यात का कारोबार शुरू किया। साथ ही उसने सोशल मीडिया पर भी सक्रियता बढ़ाई और एक यूट्यूब चैनल के जरिए धार्मिक मुद्दों पर अपने विचार रखने लगा।
27 फरवरी 2026 को उसके कार्यालय पर जीशान और गुलफाम नाम के दो हमलावरों ने चाकू से जानलेवा हमला किया, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गया। इस घटना के बाद मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए एक मार्च को मुख्य आरोपी जीशान और तीन मार्च को गुलफाम को मुठभेड़ में मार गिराया और सलीम को सुरक्षा भी दी गई।
हालांकि बाद में जांच में सामने आया कि सलीम का आपराधिक इतिहास काफी पुराना है, जिसकी जानकारी स्थानीय पुलिस को नहीं थी।
चौंकाने वाली बात यह रही कि उसके ही परिवार के एक सदस्य ने दिल्ली क्राइम ब्रांच को उसकी पुरानी एफआईआर और अदालत के आदेशों की जानकारी दी। इसी सूचना के आधार पर पुलिस ने सटीक लोकेशन पर दबिश देकर उसे गिरफ्तार कर लिया।पुलिस सूत्रों के अनुसार, सलीम के विचारों और गतिविधियों के कारण परिवार और समाज में असंतोष बढ़ रहा था। इसी वजह से परिवार के एक सदस्य ने आगे आकर उसकी जानकारी पुलिस को दी।
अब इस पूरे मामले में बीट पुलिस और खुफिया तंत्र की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित पुलिसकर्मियों की कार्यप्रणाली की जांच शुरू कर दी है।












