दोहा। कतर की राजधानी दोहा में अमेरिका और ईरान के बीच बहुप्रतीक्षित वार्ता अब भी शुरू नहीं हो सकी है। दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल मौजूद हैं, लेकिन ईरान ने अंतिम समझौते पर बातचीत से पहले कई कड़ी शर्तें रख दी हैं। तेहरान ने स्पष्ट किया है कि जब तक लेबनान में इजराइली सैन्य कार्रवाई नहीं रुकती और अमेरिका तेल प्रतिबंधों में राहत देकर ईरान की फ्रीज संपत्तियां जारी नहीं करता, तब तक प्रत्यक्ष वार्ता संभव नहीं होगी।
ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर घालीबाफ ने कहा कि वार्ता का माहौल तभी बनेगा जब क्षेत्रीय तनाव कम होगा। ईरान का कहना है कि वह फिलहाल कतर की मध्यस्थता से केवल अप्रत्यक्ष बातचीत के लिए तैयार है। दूसरी ओर अमेरिकी प्रतिनिधियों ने कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान अल थानी से मुलाकात कर आगे की रणनीति पर चर्चा की।
इस बीच होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा भी वार्ता का प्रमुख मुद्दा बन गई है। अमेरिकी सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित न हो, इसलिए समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना दोनों पक्षों की प्राथमिकता है। अमेरिका चाहता है कि कतर और अन्य खाड़ी देश इस दिशा में मध्यस्थ की भूमिका निभाएं।
उधर इजराइल ने दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह के एक लड़ाके को मार गिराने का दावा किया है। इस घटनाक्रम के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि युद्धविराम संबंधी समझ का उल्लंघन हुआ तो वह जवाबी कार्रवाई करेगा।विशेषज्ञों का मानना है कि दोहा वार्ता की सफलता केवल अमेरिका और ईरान के रिश्तों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर पूरे पश्चिम एशिया, वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार पर भी पड़ेगा। फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम हैं, जिससे वार्ता शुरू होने की संभावनाएं अनिश्चित बनी हुई हैं।












