HomeHealth & Fitnessउत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां वापस न लेने पर बिजली कर्मियों में आक्रोश 

उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां वापस न लेने पर बिजली कर्मियों में आक्रोश 

लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने कहा है कि बिजली कर्मियों के विरुद्ध की गई उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां वापस न लिए जाने से कर्मचारियों में भारी असंतोष और आक्रोश व्याप्त है। निजीकरण और दमनात्मक नीतियों के विरोध में चल रहे जनजागरण अभियान के अंतर्गत आज गाजीपुर और वाराणसी में संघर्ष समिति द्वारा जोरदार विरोध सभाएं आयोजित की गईं।

संघर्ष समिति ने कहा कि प्रबंधन की नाकामी के कारण भीषण गर्मी के दौरान प्रदेश की बिजली व्यवस्था चरमराने की स्थिति में पहुंच गई है। इसके बावजूद प्रबंधन बिजली कर्मियों का सहयोग लेने के बजाय उत्पीड़न और टकराव का रास्ता अपना रहा है, जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और गैर-जिम्मेदाराना रवैया है।

संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि एक ओर डाउनसाइजिंग के नाम पर 20-25 वर्षों से बिजली व्यवस्था संभाल रहे अत्यंत अल्प वेतनभोगी संविदा कर्मियों को नौकरी से निकाला जा रहा है, वहीं दूसरी ओर वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग के नाम पर नियमित कर्मचारियों के पद समाप्त कर दिए गए हैं। इससे बिजली व्यवस्था में भारी अव्यवस्था पैदा हो गई है और उपभोक्ताओं को दर-दर भटकने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

संघर्ष समिति ने कहा कि यदि प्रबंधन वास्तव में गर्मियों में निर्बाध बिजली आपूर्ति बनाए रखना चाहता है तो उसे तत्काल विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति से वार्ता करनी चाहिए तथा टकराव का रास्ता छोड़कर बिजली कर्मियों को विश्वास में लेकर ठोस कार्ययोजना बनानी चाहिए।

संघर्ष समिति ने स्पष्ट कहा कि बिजली कर्मचारियों पर की गई अधिकांश उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां किसी कदाचार के कारण नहीं, बल्कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों में भाग लेने के कारण की गई हैं। यह सीधे-सीधे कर्मचारियों का दमन और उत्पीड़न है, जिसे तत्काल वापस लिया जाना चाहिए। आज गाजीपुर और वाराणसी में आयोजित विरोध सभाओं को संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारी जितेंद्र सिंह गुर्जर, महेंद्र राय, माया शंकर तिवारी तथा मोहम्मद वसीम ने मुख्य रूप से संबोधित किया।

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