रिपोर्ट:हेमन्त कुमार दुबे।
महराजगंज, 19 मई।पंचायत चुनाव टलने की स्थिति में ग्राम प्रधानों को ही प्रशासक बनाए जाने की मांग को लेकर सूबे में प्रशासनिक और राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। प्रधान संगठन के प्रदेश नेतृत्व के आह्वान पर बुधवार (20 मई) को राजधानी लखनऊ में प्रस्तावित प्रदेश स्तरीय महासम्मेलन को रोकने के लिए पुलिस-प्रशासन ने जिले में धरपकड़ शुरू कर दी है। इसी क्रम में मंगलवार सुबह पुलिस बल ने राष्ट्रीय प्रधान संगठन के जिलाध्यक्ष अनिल कुमार जोशी को उनके आवास पर हाउस अरेस्ट (नजरबंद) कर लिया। जिलाध्यक्ष को नजरबंद किए जाने की खबर फैलते ही पंचायत प्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं में भारी रोष व्याप्त हो गया है।
*शांतिपूर्ण आंदोलन का दमन निंदनीय।*
आवास पर नजरबंद किए जाने के बाद जिलाध्यक्ष अनिल कुमार जोशी ने पत्रकारों से वार्ता करते हुए पुलिस प्रशासन की इस कार्रवाई पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी जायज मांगों के लिए शांतिपूर्ण ढंग से आवाज उठाना हर नागरिक और जनप्रतिनिधि का संवैधानिक अधिकार है। महासम्मेलन में जाने से रोकने के लिए सुबह-सुबह उनके आवास पर पुलिस की तैनाती करना निहायत ही अलोकतांत्रिक और दमनकारी कृत्य है।
*2021 की पुनरावृत्ति का सता रहा डर।*
जोशी ने स्पष्ट किया कि ग्राम प्रधान या संगठन का कोई भी प्रतिनिधि सरकार के खिलाफ नहीं है। हमारी लड़ाई सिर्फ ग्रामीण विकास की व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए है। उन्होंने कहा कि प्रधानों को यह डर सता रहा है कि कहीं वर्ष 2021 की तरह सरकार पुनः एडीओ (ADO) पंचायत को प्रशासक नियुक्त न कर दे। सरकारी अधिकारियों के हाथ में कमान जाने से गांवों का विकास पूरी तरह ठप हो जाता है और आम जनता को छोटे-छोटे कार्यों के लिए ब्लॉक के चक्कर काटने पड़ते हैं।
*शीघ्र घोषणा करे सरकार।*
जिलाध्यक्ष ने सरकार से मांग की है कि वह लोकतांत्रिक व्यवस्था से चुने हुए प्रधानों के प्रति अपनी निष्ठा व विश्वास दिखाए। ग्रामीण क्षेत्रों में विकास की निरंतरता को बनाए रखने के लिए जब तक अगले चुनाव नहीं हो जाते, तब तक वर्तमान प्रधानों के कार्यकाल का विस्तार किया जाए अथवा वर्तमान प्रधानों की ही ‘प्रशासक समिति’ बनाने के आदेश की अविलंब घोषणा की जाए।












