- ईवीएम खराबी और वोट डाले जाने के आरोपों से विवाद
- तमिलनाडु में भारी मतदान, शांतिपूर्ण प्रक्रिया से आयोग संतुष्ट
कोलकाता/चेन्नई/नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव के तहत गुरुवार को मतदान के दौरान दो अलग-अलग तस्वीरें सामने आईं। जहां पश्चिम बंगाल में पहले चरण की वोटिंग हिंसा, झड़पों और आरोप-प्रत्यारोप के बीच हुई, वहीं तमिलनाडु में मतदान शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न होता दिखा और मतदाताओं में खासा उत्साह नजर आया।
पश्चिम बंगाल में पहले चरण के तहत 16 जिलों की 152 सीटों पर सुबह 7 बजे मतदान शुरू हुआ। शुरूआत से ही कई संवेदनशील इलाकों में तनाव की स्थिति बनी रही। बीरभूम, मुर्शिदाबाद, कूचबिहार और पश्चिम मेदिनीपुर समेत कई जिलों से हिंसा, तोड़फोड़ और हमलों की खबरें आईं। बीरभूम के लाभपुर में एक राजनीतिक दल के पोलिंग एजेंट पर हमला हुआ, जिससे इलाके में तनाव फैल गया।
मुर्शिदाबाद के नाओदा में दो दलों के समर्थकों के बीच टकराव हुआ, जिसमें वाहनों में तोड़फोड़ और पत्थरबाजी की घटनाएं सामने आईं। हालात बिगड़ने पर केंद्रीय बलों को हस्तक्षेप करना पड़ा। कूचबिहार में मतदाताओं को प्रभावित करने और पैसे बांटने के आरोप लगे, जिससे विवाद और बढ़ गया।
आसनसोल दक्षिण से एक उम्मीदवार की कार पर पत्थरबाजी की घटना ने चुनावी माहौल को और गर्म कर दिया। वहीं कुमारगंज में एक अन्य प्रत्याशी के साथ मारपीट की खबर भी सामने आई। मुर्शिदाबाद में बमबाजी और धरने की घटनाएं भी सामने आईं, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे।
तकनीकी गड़बड़ियां भी चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करती दिखीं। कई जगहों पर ईवीएम खराब होने से मतदान बाधित हुआ, जिससे मतदाताओं में नाराजगी देखी गई। सिलीगुड़ी में एक युवती ने आरोप लगाया कि उसका वोट पहले ही डाला जा चुका था। डोमकल में कुछ मतदाताओं को मतदान से रोकने के आरोपों पर चुनाव आयोग ने रिपोर्ट तलब की है।
इन घटनाओं के बावजूद मतदाताओं में उत्साह कम नहीं हुआ। दोपहर 3 बजे तक राज्य में 78.77 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो काफी ऊंचा माना जा रहा है। दक्षिण दिनाजपुर, पश्चिम मेदिनीपुर और झाड़ग्राम जैसे जिलों में 80 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ। प्रधानमंत्री ने भी लोगों से अधिक से अधिक मतदान करने की अपील की और इसे लोकतंत्र का उत्सव बताया। चुनाव आयोग ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं और हजारों केंद्रीय बलों की तैनाती की गई है।
इसके विपरीत तमिलनाडु में सभी 234 सीटों पर एक ही चरण में मतदान अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण ढंग से हुआ। भीषण गर्मी के बावजूद मतदाताओं में उत्साह देखा गया। दोपहर 3 बजे तक राज्य में लगभग 70 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जबकि शुरूआती घंटों में ही 56 प्रतिशत से अधिक वोटिंग हो चुकी थी।
राज्यभर में 75 हजार से अधिक मतदान केंद्र बनाए गए हैं और करीब डेढ़ लाख सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई है। चुनाव आयोग के अनुसार, मतदान प्रक्रिया व्यवस्थित और शांतिपूर्ण रही। तमिलनाडु में मुख्य मुकाबला दो बड़े गठबंधनों के बीच है, जबकि कुछ क्षेत्रों में त्रिकोणीय मुकाबले भी देखने को मिल रहे हैं। बड़ी संख्या में युवा और महिला मतदाताओं की भागीदारी इस चुनाव की खास बात रही।
दोनों राज्यों के अनुभवों ने चुनावी प्रबंधन की अलग-अलग चुनौतियों और स्थितियों को उजागर किया है। पश्चिम बंगाल में हिंसा और आरोपों के बीच भी रिकॉर्ड मतदान लोकतंत्र में जनता की भागीदारी को दर्शाता है, वहीं तमिलनाडु का शांतिपूर्ण मतदान चुनावी प्रक्रिया के सुचारू संचालन का उदाहरण बनकर सामने आया है। अब सबकी नजर आगामी चरणों और अंतिम नतीजों पर टिकी है।












