गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक महिला द्वारा खुद को IAS अधिकारी बताकर बेरोजगार युवाओं से ठगी करने का खुलासा हुआ है। किला थाना क्षेत्र निवासी मुसाहिद नामक युवक की शिकायत पर जब पुलिस ने जांच शुरू की, तो इस फर्जीवाड़े की परतें खुलती चली गईं। पीड़ित के मुताबिक, आरोपी महिला ने सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर उससे 5 लाख 21 हजार रुपये वसूल लिए। पैसे लेने के बाद न तो नौकरी मिली और न ही रकम वापस की गई।
शिकायत के आधार पर की गई जांच में सामने आया कि खुद को IAS बताने वाली महिला विप्रा दरअसल एक संगठित ठगी गिरोह की मास्टरमाइंड है, IAS से लेकर ADM तक का फर्जी रौब, बेरोजगारों को बनाती थी निशाना जांच में यह भी सामने आया कि विप्रा अकेले नहीं बल्कि अपनी सगी बहनों-शिखा शर्मा और दीक्षा-के साथ मिलकर इस गिरोह को चला रही थी।
तीनों मिलकर खुद को कभी IAS, कभी PCS तो कभी ADM अधिकारी बताकर लोगों को प्रभावित करती थीं और नौकरी दिलाने के नाम पर मोटी रकम ऐंठती थीं। बरेली के SSP पंकज श्रीवास्तव के अनुसार, विप्रा इस पूरे नेटवर्क की मास्टरमाइंड थी, जो सुनियोजित तरीके से बेरोजगार युवाओं को अपने जाल में फंसाती थी।
लग्जरी कार पर ‘ADM’ का बोर्ड, लाखों की रकम और कई दस्तावेज बरामद
पुलिस कार्रवाई के दौरान आरोपियों के कब्जे से एक लग्जरी कार बरामद हुई, जिस पर ‘ADM’ लिखा हुआ था। इसके अलावा 10 से अधिक चेकबुक, दो लैपटॉप, कई मोबाइल फोन और अलग-अलग बैंक खातों में जमा करीब 55 लाख रुपये की जानकारी मिली है। इन खातों को फिलहाल फ्रीज कर दिया गया है। मौके से साढ़े 4 लाख रुपये नकद भी बरामद किए गए हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह ने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है।
गिरफ्तार बहनों से पूछताछ जारी, और भी खुलासों की उम्मीद
फिलहाल पुलिस ने विप्रा, शिखा और दीक्षा को गिरफ्तार कर लिया है और उनसे गहन पूछताछ जारी है। तीनों के खिलाफ धोखाधड़ी समेत अन्य गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि नौकरी की तलाश में भटक रहे युवाओं को किस तरह ठग गिरोह आसानी से निशाना बना रहे हैं। पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के झांसे में आकर पैसे देने से पहले पूरी जांच-पड़ताल जरूर करें।












