बहराइच के तेजवापुर ब्लॉक से सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर भरोसे की एक प्रेरक कहानी सामने आई है। यहां की रेनू गौतम ने समय पर पहचान और नियमित इलाज से ‘बोन टीबी’ (हड्डियों की टीबी) जैसी गंभीर बीमारी से उबर कर पूरी तरह स्वास्थ्य लाभ प्राप्त किया है। जो महिला कभी महीनों तक दर्द के कारण बिस्तर से उठ नहीं पा रही थी, वही आज स्वस्थ होकर ‘टीबी चैंपियन’ के रूप में गांव-गांव जाकर लोगों को इस बीमारी के प्रति जागरूक कर रही हैं। वर्ष 2022 में गर्भावस्था के दौरान रेनू की कमर में तेज दर्द शुरू हुआ। प्रसव के बाद यह दर्द इतना बढ़ गया कि उनका चलना-फिरना मुश्किल हो गया। लखनऊ के एक निजी अस्पताल में एमआरआई जांच से उन्हें बोन टीबी होने की पुष्टि हुई। इसके बाद उन्होंने जनपद के सरकारी अस्पताल से निःशुल्क इलाज शुरू कराया। दवाओं का असर ऐसा रहा कि एक सप्ताह में वह सहारे से बैठने लगीं और एक महीने में फिर से चलने लगीं। नौ माह के नियमित इलाज और पौष्टिक आहार से वह पूरी तरह स्वस्थ हो गईं। रेनू बताती हैं कि इस दौरान उन्हें मायके और ससुराल दोनों परिवारों का पूरा सहयोग मिला। अब तक वह लगभग 300 लोगों को टीबी के प्रति जागरूक कर चुकी हैं। स्वस्थ होने के बाद रेनू ने जनवरी 2025 में वर्ल्ड हेल्थ पार्टनर संस्था से जुड़कर स्वास्थ्य विभाग से ‘टीबी चैंपियन’ का प्रशिक्षण लिया। अब तक वह स्कूलों, स्वास्थ्य केंद्रों और गांवों में 300 से अधिक लोगों को टीबी के लक्षण, मुफ्त जांच और उपचार की जानकारी दे चुकी हैं। वह लोगों को बताती हैं कि ‘समय पर जांच और पूरा इलाज ही टीबी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।
जिले में आधुनिक मशीनों से हो रही जांच जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. एम.एल. वर्मा ने बताया कि टीबी नाखून और बाल को छोड़कर शरीर के किसी भी अंग में हो सकती है, लेकिन समय पर पहचान और नियमित इलाज से यह पूरी तरह ठीक हो जाती है। जिले में शीघ्र जांच के लिए सभी सीएचसी और जिला स्तर पर 18 सीबीनाट व ट्रूनेट मशीनें स्थापित हैं, जिनसे कुछ ही घंटों में गुणवत्ता पूर्ण रिपोर्ट मिल जाती है। एक नजर में जिले के आंकड़े 175 संभावित मरीजों की प्रतिदिन हो रही है जांच 04 एआई आधारित पोर्टेबल एक्स-रे मशीनों से दूरदराज क्षेत्रों में जांच सुविधा
6347 मरीजों की निक्षय पोर्टल के माध्यम से हो रही नियमित मॉनिटरिं 46 ग्राम पंचायतें टीबी मुक्त घोषित
432 ‘टीबी चैंपियन’ निभा रहे हैं सक्रिय भूमिका
बोन टीबी से उबर बनीं ‘टीबी चैंपियन’:अब गांव-गांव फैला रहीं जागरूकता
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