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निचलौल कस्टम अधीक्षक पर तस्करों से सांठगांठ और मुखबिर की मुखबिरी करने का गंभीर आरोप


सूचना मिलते ही कस्टम अधीक्षक भगवान शाह ने तस्कर को किया अलर्ट, ‘मैनेज’ करने का ऑडियो और फोन कॉल आया सामने।


देश की सुरक्षा और राजस्व से खिलवाड़: तस्करों पर कार्रवाई के बजाय मुखबिर को ही तस्कर से मिलने का दबाव बना रहे जिम्मेदार।



रिपोर्ट:गजेंद्र गुप्ता

महराजगंज (निचलौल)।
भारत-नेपाल सीमा पर तैनात सीमा शुल्क (कस्टम) विभाग देश की आर्थिक सुरक्षा की रीढ़ माना जाता है, लेकिन जब इस विभाग के जिम्मेदार अधिकारी ही अपने कर्तव्यों को दरकिनार कर तस्करों के हमदर्द और मददगार बन जाएं, तो सीमा सुरक्षा भगवान भरोसे ही है। ऐसा ही एक बेहद चौंकाने वाला और शर्मनाक मामला निचलौल कस्टम कार्यालय से सामने आया है, जहां तैनात कस्टम अधीक्षक भगवान शाह पर तस्करों को संरक्षण देने और विभागीय गोपनीयता को सीधे तस्करों तक बेचने का गंभीर आरोप लगा है।



आइये जानते हैं क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, एक जागरूक नागरिक/मुखबिर द्वारा निचलौल कस्टम में कार्यरत कस्टम अधीक्षक भगवान शाह को पुख्ता सूचना दी गई कि ‘रेगहिया के धमौर’ के रास्ते तस्करों द्वारा भारी मात्रा में बीज (Seed Smuggling) की तस्करी की जा रही है। नियमतः, इस संवेदनशील सूचना पर तत्काल छापेमारी कर तस्करों को दबोचा जाना चाहिए था।
लेकिन, कस्टम अधीक्षक ने जो किया वह हैरान करने वाला था। आरोप है कि सूचना मिलते ही अधीक्षक भगवान शाह ने देश के प्रति अपने कर्तव्य को भूलकर, तुरंत इसकी जानकारी अपने ‘चहेते’ तस्कर को दे दी। यानी, जिस अधिकारी को तस्कर को पकड़ना था, वही तस्कर का ‘सुरक्षा कवच’ बन गया।

ट्रू-कॉलर पर खुला राज: ‘मैनेज’ करने का आने लगा फोन
सूचना लीक होने के तुरंत बाद पीड़ित (सूचना देने वाले व्यक्ति) के मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से फोन आता है। जब उस नंबर को ‘ट्रू कॉलर’ पर चेक किया गया, तो उस पर ‘शिव कुमार’ नाम प्रदर्शित हो रहा था। फोन करने वाला व्यक्ति (तस्कर का गुर्गा) सीधे तौर पर मामले को ‘मैनेज’ (लेन-देन और रफा-दफा) करने की बात करने लगा।

खुद अधीक्षक ने की पैरवी, बोले- ‘मैंने बोल दिया है, मिल लो।
हद तो तब हो गई जब इसके कुछ ही देर बाद खुद कस्टम अधीक्षक भगवान शाह का फोन सूचना देने वाले व्यक्ति के पास आता है। अधीक्षक महोदय विभाग की साख को ताक पर रखकर फोन पर कहते हैं— “मैं बोल दिया हूँ, वह आप से मिलने के लिए कह रहा है।”
साफ है कि कस्टम अधीक्षक खुद इस पूरे अवैध कारोबार और तस्करी को दबाने तथा मामले को ‘मैनेज’ कराने के लिए बिचौलिए और पैरवीकार की भूमिका में नजर आ रहे हैं।

*सवाल: ऐसे कैसे सुरक्षित रहेगी देश की सीमा?*
इस पूरे घटनाक्रम ने कस्टम विभाग की कार्यप्रणाली पर बहुत बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है।

*पहला सवाल:* जब रक्षक ही तस्करों का सूचना तंत्र बन जाएगा, तो सीमा पार से होने वाली अवैध गतिविधियों को कैसे रोका जाएगा?

*दूसरा सवाल:* जो मुखबिर अपनी जान जोखिम में डालकर विभाग को इनपुट देते हैं, अगर अधिकारी ही उनकी पहचान तस्करों के सामने उजागर कर देंगे, तो कल को कौन सूचना देने की हिम्मत करेगा?

*तीसरा सवाल:*
क्या उच्चाधिकारियों की नाक के नीचे निचलौल सीमा पर यह ‘मैनेजमेंट का खेल’ लंबे समय से चल रहा है?

कार्यवाही की उठ रही मांग।
कस्टम अधीक्षक भगवान शाह और तस्करों की इस कथित मिलीभगत, ऑडियो और कॉल डिटेल्स के सामने आने के बाद क्षेत्र में हड़कंप मचा हुआ है। यह सीधे तौर पर देश की सीमा सुरक्षा से खिलवाड़ और सरकारी राजस्व को चूना लगाने का मामला है। अब देखना यह है कि कस्टम विभाग के उच्चाधिकारी ऐसे ‘तस्कर मित्र’ अधीक्षक के खिलाफ क्या दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करते हैं।

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