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नानपारा CHC में चुनिंदा लैब से जांच कराने का मामला:महिला डॉक्टर ने कहा- ‘मेरी बताई लैब से जांच कराओ, तभी करूंगी इलाज’; OPD में बाहरी पुरुष बैठने से मरीज परेशान


सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) नानपारा में एक महिला चिकित्सक की तानाशाही और स्वास्थ्य विभाग के नियमों को ताक पर रखने का गंभीर मामला सामने आया है। अस्पताल में तैनात एक आयुष महिला चिकित्सक पर आरोप है कि उन्होंने एक मरीज को सिर्फ इसलिए इलाज देने से मना कर दिया क्योंकि उसने डॉक्टर की पसंदीदा पैथोलॉजी लैब से जांच नहीं कराई थी। इसके अलावा, महिला डॉक्टर के ओपीडी कक्ष में लगातार एक बाहरी पुरुष के बैठे रहने से अस्पताल आने वाली महिला मरीज बेहद असहज और परेशान हैं। मामला उस समय गरमा गया जब गुरुवार को एक युवक अपनी बीमार पत्नी को इलाज के लिए आयुष महिला चिकित्सक डॉ. आशा साहू के पास लेकर पहुंचा। मरीज ने अपनी जरूरी जांचें पहले ही किसी अन्य जगह से करवा रखी थीं। जब युवक ने वह जांच रिपोर्ट डॉक्टर को दिखाई, तो डॉ. आशा साहू भड़क गईं। उन्होंने रिपोर्ट देखने से साफ इनकार कर दिया और मरीज के पति से दो टूक शब्दों में कहा, “मैंने जिसके यहां भेजा है, उसी के यहां से जांच कराकर आओ, तभी मैं इलाज करूंगी।” डॉक्टर के इस अड़ियल रवैये के कारण मरीज को बिना इलाज के ही लौटना पड़ा। प्राइवेसी ताक पर: ओपीडी में रहता है बाहरी पुरुष, महिला मरीज बताने में झिझकती हैं बीमारी स्थानीय निवासियों और अस्पताल आने वाले मरीजों के अनुसार, डॉ. आशा साहू के ओपीडी कक्ष में हर दिन एक बाहरी व्यक्ति बैठा रहता है। स्वास्थ्य विभाग के स्पष्ट दिशानिर्देश हैं कि महिला चिकित्सक की ओपीडी में केवल महिला स्टाफ की ही तैनाती होनी चाहिए ताकि महिला मरीजों की निजता (प्राइवेसी) बनी रहे। लेकिन यहां नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। ओपीडी में इस अनजान पुरुष की मौजूदगी के कारण महिला मरीज अपनी गुप्त और संवेदनशील बीमारियों को डॉक्टर से साझा करने में संकोच करती हैं। सूत्रों का तो यहां तक दावा है कि इसी पुरुष के जरिए ओपीडी से मरीजों के पर्चे सीधे बाहर की निजी पैथोलॉजी लैब और कुछ चुनिंदा मेडिकल स्टोरों पर भेजे जा रहे हैं। डॉक्टर की दलील: ‘ओपीडी में पुरुष को बैठाना गलत नहीं, मैं उससे काम करवा रही हूं’ जब इस पूरे विवाद और ओपीडी में बाहरी व्यक्ति की मौजूदगी को लेकर डॉ. आशा साहू से बात की गई, तो उनके तेवर बदले हुए नजर आए। नियमों को दरकिनार करते हुए उन्होंने अपने बचाव में कहा, “मैं उससे कार्य करवा रही हूं। ओपीडी में पुरुष को बैठाना कोई गलत बात नहीं है।” डॉक्टर का यह बयान सीधे तौर पर स्वास्थ्य विभाग के सुरक्षा और गोपनीयता संबंधी नियमों को चुनौती देता है, जबकि सीएचसी अधीक्षक डॉ. नलिन रजा पहले ही अस्पताल परिसर में निजी पैथोलॉजी और मेडिकल स्टोर के एजेंटों के प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगाने के निर्देश जारी कर चुके हैं। पहले भी आ चुके हैं ऐसे मामले, सीएमओ ने दिए जांच के आदेश सीएचसी नानपारा में बाहरी तत्वों के दखल का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी अस्पताल की एक अन्य महिला चिकित्सक डॉ. पारुल यादव के ओपीडी कक्ष में एक बाहरी पुरुष के बैठने की शिकायत मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) से की गई थी। उस समय भी प्रशासन ने कार्रवाई का भरोसा दिया था। वर्तमान मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजय कुमार ने कहा है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जा रही है और जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषी चिकित्सक के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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