पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की लड़ाई अब राजधानी कोलकाता की ओर पहुंच गई है। पहले चरण की वोटिंग के बाद दूसरे चरण की सीटों को लेकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बीच जुबानी जंग जारी है। इसी बीच केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि ममता बनर्जी की सरकार ने कोलकाता को ‘झोपड़पट्टियों का शहर’ बना दिया है। यह सच भी है कि कोलकाता में बहुत सारी झुग्गी-बस्तियां हैं। यह समस्या सिर्फ कोलकाता की नहीं बल्कि देश के तमाम शहरों की है, जहां लाखों-करोड़ों लोग झुग्गियों में रहते हैं। समय के साथ यह समस्या और गंभीर होती जा रही है।
देश की राजधानी दिल्ली हो, आर्थिक राजधानी मुंबई हो या फिर कोई अन्य मेट्रो सिटी। रेल की पटरियों के किनारे, सरकारी जमीनों और अन्य इलाकों में बनी झुग्गियां कई तरह से समाज के लिए चुनौती भी रही हैं। इन इलाकों में मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराना हो, सामाजिक सुरक्षा की सुविधाएं देना हो या फिर सुरक्षा सुनिश्चित करना हो, ये क्षेत्र हर तरह से संवेदनशील रहे हैं और तमाम खतरे भी झेलते रहे हैं।
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कितनी हैं झुग्गियां, कितनी है आबादी?
इसके बारे में जानकारी के देने के लिए सबसे सटीक आंकड़े साल 2011 की जनगणना के हैं। इन आंकड़ों के मुताबिक, साल 2011 तक देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मिलाकर कुल 1.39 करोड़ परिवारों के 6.54 करोड़ लोग झुग्गी-बस्तियों में रह रहे थे। तब देश की राजधानी दिल्ली में कुल 3.67 लाख परिवारों के 17.85 लाख लोग झुग्गियों में रह रहे थे। राजधानी दिल्ली में तब 107 इलाके ऐसे थे जिनमें झुग्गियां बसी हुई थीं।
इसी तरह यूपी के 10.66 लाख परिवारों के 62.39 लाख लोग झुग्गियों में रह रहे थे। नोएडा में ही 11,510 परिवारों के 49,407 लोग झुग्गियों में रहते थे। तब उत्तर प्रदेश में कुल 293 इलाके ऐसे थे जहां झुग्गियां बसी हुई थीं और उनमें लाखों लोग रहा करते थे।
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मेट्रो शहरों में भी झुग्गियों की भरमार
दिल्ली, नोएडा के अलावा चेन्नई के 3.29 लाख परिवारों के 13.42 लाख लोग, बेंगुलरु में 1.65 लाख परिवारों के 7.12 लाख लोग, कोच्चि के 1594 परिवारों के 5182 लोग, लखनऊ के 65629 परिवारों के 3.64 लाख लोग और पटना के 13,696 परिवारों के 77,034 लोग झुग्गियों में रह रहे थे।
पश्चिम बंगाल का क्या है हाल?
चुनावी राज्य पश्चिम बंगाल में साल 2011 में कुल 13.91 लाख परिवारों के 64.18 लाख परिवार झुग्गियो में रह रहे थे। कुल 122 इलाके ऐसे थे जिनमें झुग्गियां बसी हुई थीं। तब राजधानी कोलकाता में ही 3 लाख से ज्यादा परिवार झुग्गियों में रह रहे थे। इन परिवारों के 14.09 लाख लोग झुग्गियों के निवासी थे।












