नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्गों की निगरानी और रखरखाव व्यवस्था को डिजिटल एवं तकनीक आधारित बनाने के लिए नेटवर्क सर्वे वाहन (एनएसवी) प्रणाली लागू करने का निर्णय लिया है, जिससे सड़क सुरक्षा और पारदर्शिता को बढ़ावा मिलेगा।
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार ये अत्याधुनिक नेटवर्क सर्वे वाहन 3डी लेजर तकनीक, जीपीएस और हाई-रिजॉल्यूशन कैमरों से लैस हैं। ये सड़क की सतह पर मौजूद गड्ढों, दरारों और अन्य खामियों की पहचान कर विस्तृत डिजिटल डेटा तैयार करेंगे। पहले जहां एक दिन में 20 से 80 किलोमीटर सड़क का सर्वे किया जाता था, वहीं अब यह क्षमता बढ़कर लगभग 300 किलोमीटर प्रतिदिन हो गई है।
एनएसवी द्वारा एकत्र डेटा 48 घंटे के भीतर केंद्रीय सिस्टम तक पहुंचाया जाएगा और 10 दिनों के भीतर उसका विश्लेषण कर कार्रवाई योग्य रिपोर्ट तैयार की जाएगी। पहले यह प्रक्रिया 4 से 6 महीने में पूरी होती थी।
मंत्रालय ने कहा कि सभी रिपोर्ट डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से संबंधित एजेंसियों को भेजी जाएंगी और मरम्मत कार्य की निगरानी भी सिस्टम आधारित होगी। नई व्यवस्था के तहत निरीक्षण अधिकारी मोबाइल ऐप के जरिए मौके पर ही एनएसवी रिपोर्ट देख सकेंगे, जियो-टैग्ड फोटो अपलोड कर सकेंगे और टिप्पणी भी कर पाएंगे।
मंत्रालय के अनुसार इस पहल का उद्देश्य राष्ट्रीय राजमार्गों की गुणवत्ता सुधारना, सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाना और रखरखाव प्रणाली में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।
राष्ट्रीय राजमार्गों की डिजिटल निगरानी के लिए एनएसवी प्रणाली लागू करने का फैसला
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