नई दिल्ली। ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की दो दिवसीय बैठक में वैश्विक दक्षिण की भूमिका, बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था और संयुक्त राष्ट्र सुधार को लेकर व्यापक चर्चा हुई। बैठक के बाद संयुक्त वक्तव्य जारी नहीं किया गया, लेकिन अध्यक्षीय वक्तव्य और परिणाम दस्तावेज में सदस्य देशों ने वैश्विक शासन व्यवस्था को अधिक न्यायसंगत, लोकतांत्रिक और संतुलित बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, बैठक में भारत की 2026 ब्रिक्स अध्यक्षता के विषय ‘लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण’ का सभी सदस्य देशों ने समर्थन किया। मंत्रियों ने कहा कि ब्रिक्स अब वैश्विक दक्षिण की आवाज को मजबूत करने वाला प्रभावशाली मंच बन चुका है और भविष्य में इसके संस्थागत विस्तार तथा सहयोग को और बढ़ाया जाएगा।
बैठक में गाजा, लेबनान, सूडान, सीरिया और पश्चिम एशिया की स्थिति पर चिंता व्यक्त की गई। सदस्य देशों ने युद्धविराम, मानवीय सहायता और अंतरराष्ट्रीय कानून के पालन का समर्थन करते हुए फिलिस्तीन के लिए दो-राष्ट्र समाधान और संयुक्त राष्ट्र में उसकी पूर्ण सदस्यता की मांग दोहराई। आतंकवाद के मुद्दे पर ब्रिक्स देशों ने सभी प्रकार के आतंकी हमलों की कड़ी निंदा की। 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकी हमले का उल्लेख करते हुए सदस्य देशों ने सीमा पार आतंकवाद, आतंक वित्तपोषण और आतंकियों को सुरक्षित पनाह देने वालों के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई की आवश्यकता बताई।
‘शून्य सहिष्णुता’ की नीति अपनाने पर भी सहमति बनी। इसके अलावा विश्व व्यापार संगठन में सुधार, जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा सुरक्षा, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और स्वास्थ्य सहयोग जैसे मुद्दों पर भी सदस्य देशों ने आपसी सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया।
ब्रिक्स देशों की दो दिवसीय बैठक में बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था पर दिया जोर
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