HomeUncategorizedदावेदारी की होड़ में संगठन किनारे,सिसवा सपा में गुटबाजी तेज,PDA सम्मेलन में...

दावेदारी की होड़ में संगठन किनारे,सिसवा सपा में गुटबाजी तेज,PDA सम्मेलन में बैनर से जिलाध्यक्ष का नाम-फोटो गायब

 

 

रिपोर्ट:गजेंद्र कुमार गुप्त।

 

महराजगंज। जैसे-जैसे उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की घड़ियां नजदीक आ रही हैं, वैसे-वैसे संभावित उम्मीदवारों का शक्ति प्रदर्शन और होड़ तेज होती जा रही है। हर दावेदार अपनी मजबूत दावेदारी पेश करने में जुटा है, लेकिन सिसवा विधानसभा क्षेत्र में आयोजित ‘पीडीए (PDA) महासम्मेलन’ के बाद पैदा हुआ अंदरूनी विवाद अब सरेआम हो चुका है। आयोजन की सफलता के बीच पार्टी के भीतर की खींचतान खुलकर चौराहे पर आ गई है।

17 अगस्त को सिसवा विधानसभा के खोन्हौली स्थित एक मैरिज हॉल में PDA महासम्मेलन का आयोजन किया गया था। खोन्हौली निवासी गौरी शंकर गुप्त उर्फ ‘फौजी भैया’ के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में समर्थकों की भारी भीड़ उमड़ी। क्षेत्र में जगह-जगह होर्डिंग्स और बैनर लगाए गए थे तथा कार्यक्रम में पहुंचे मुख्य अतिथि गाजीपुर सदर के सपा विधायक जयकिशन साहू की मौजूदगी में कार्यकर्ताओं का उत्साह चरम पर दिखा। जिलाध्यक्ष और संगठन की अनदेखी से उपजा विवाद विशाल जनसमूह के बावजूद मंच पर लगे मुख्य बैनर ने सभी का ध्यान आकर्षित किया, जहां पार्टी के राष्ट्रीय और प्रदेश स्तरीय नेताओं की तस्वीरें तो मौजूद थीं।लेकिन समाजवादी पार्टी के महराजगंज जिलाध्यक्ष विद्यासागर यादव की तस्वीर और नाम पूरी तरह नदारद थे। इतना ही नहीं, जिलाध्यक्ष सहित संगठन का कोई भी प्रमुख पदाधिकारी कार्यक्रम में मौजूद नहीं रहा। पत्रकारों द्वारा जिलाध्यक्ष की अनुपस्थिति पर सवाल पूछे जाने पर मुख्य अतिथि विधायक जयकिशन साहू ने सीधे तौर पर कहा कि वे इस पूरे घटनाक्रम और अनुशासनहीनता की शिकायत पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से करेंगे।

इस संबंध में जब सपा जिलाध्यक्ष विद्यासागर यादव से बात की गई तो उन्होंने साफ शब्दों में नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा:

> “आयोजक गौरी शंकर गुप्त ने पूर्व में कार्यक्रम की सामान्य बात जरूर की थी, लेकिन बिना जिला कार्यकारिणी की सहमति के यह आयोजन किया गया। जिला संगठन में 52 पदाधिकारी व सदस्य हैं और सिसवा विधानसभा कमेटी में 31 पदाधिकारी हैं। बिना किसी को सूचना दिए और मंच के बैनर से जिलाध्यक्ष का फोटो व नाम गायब रखकर पूरे संगठन को दरकिनार किया गया है। यह सीधे तौर पर जिला व विधानसभा कमेटी का अपमान है। व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए संगठन की मर्यादा को ठेस पहुंचाना बर्दाश्त योग्य नहीं है।”

राजनीतिक गलियारों में अब यह सवाल तेजी से कौंध रहा है कि क्या चुनाव से ठीक पहले अपनी निजी दावेदारी चमकाने के चक्कर में संगठन की अनदेखी की जा रही है? एक तरफ जहां गौरी शंकर गुप्त समर्थकों के जरिए अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने में लगे हैं, वहीं दूसरी तरफ पार्टी संगठन को नजरअंदाज करने के इस रवैये से निष्ठावान कार्यकर्ताओं में भारी रोष है। आम मतदाताओं के बीच भी यह संदेश जा रहा है कि चुनाव से पहले ही गुटबाजी और अनुशासनहीनता को बढ़ावा देने वाले नेतृत्व पर कैसे विश्वास किया जाए। फिलहाल, मामला राष्ट्रीय अध्यक्ष तक पहुंचने के आसार के बाद सिसवा की सपा राजनीति में हलचल और तेज हो गई है।

RELATED ARTICLES
- Advertisment -
Google search engine

Most Popular