नयी दिल्ली। भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने कहा है कि भारत में निजी पूंजीगत व्यय में तेज उछाल देश के निवेश चक्र में मजबूत और व्यापक पुनरुद्धार का सबसे बड़ा संकेत बनकर सामने आया है। उद्योग संगठन के अनुसार सितंबर 2025 तक निजी क्षेत्र का पूंजीगत व्यय बढ़कर 7.7 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया, जो सितंबर 2024 के 4.6 लाख करोड़ रुपये की तुलना में 67 प्रतिशत अधिक है। सीआईआई ने लगभग 1,200 कंपनियों के आंकड़ों के विश्लेषण के आधार पर यह निष्कर्ष जारी किया। संगठन के मुताबिक यह वृद्धि शुद्ध स्थायी परिसंपत्तियों और निमार्णाधीन पूंजीगत कार्यों में वार्षिक बदलाव के आधार पर दर्ज की गई है। रिपोर्ट में कहा गया कि एक दशक से अधिक समय बाद निजी क्षेत्र इतने बड़े स्तर पर निवेश बढ़ा रहा है।
निजी निवेश में विनिर्माण क्षेत्र सबसे आगे रहा। इस क्षेत्र का योगदान कुल पूंजीगत व्यय का लगभग आधा यानी 3.8 लाख करोड़ रुपये रहा। धातु, आॅटोमोबाइल और रसायन उद्योग ने इसमें सबसे बड़ी भूमिका निभाई। वहीं सेवा क्षेत्र का योगदान करीब 3.1 लाख करोड़ रुपये रहा, जिसमें व्यापार, संचार और आईटी-आईटीईएस क्षेत्रों ने प्रमुख बढ़त दिखाई।
सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा कि क्षमता उपयोग दर 75.6 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है, ऑर्डर बुक में 10 प्रतिशत से अधिक वृद्धि दर्ज हुई है और वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी छमाही में बैंक ऋण वृद्धि करीब 14 प्रतिशत रही है। उनके अनुसार ये संकेत बताते हैं कि भारत का निवेश चक्र निर्णायक रूप से बदल चुका है।
सीआईआई ने पश्चिम एशिया संकट के मद्देनजर उद्योग और सरकार के लिए पांच-सूत्रीय कार्ययोजना भी सुझाई है। इसमें पेट्रोल और डीजल पर मार्च में घटाए गए केंद्रीय उत्पाद शुल्क को छह से नौ महीने के भीतर चरणबद्ध तरीके से वापस लेने की सिफारिश की गई है, ताकि सरकारी राजस्व पर पड़ रहे बोझ को कम किया जा सके और उपभोक्ताओं पर अचानक दबाव भी न बढ़े।
निजी पूंजीगत व्यय में निवेश उछला, उद्योग जगत ने सरकार को दिए बड़े सुझाव
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