बहराइच के रामनगर सेमरा नानपारा नवाबगंज के ढोड़े गाँव में शुक्रवार को हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में मजलिस का आयोजन किया गया। दसवीं मोहर्रम पर ताजियादारों ने ताजिया रखकर यह मजलिस आयोजित की। मजलिस में मौलाना मतीन अहमद ने इमाम हुसैन की याद में मनकबत, नोहा और मर्सिया पढ़े। इस दौरान उपस्थित अकीदतमंद गमगीन हो गए। मौलाना मतीन अहमद ने अपने संबोधन में कहा कि मोहर्रम इस्लामी साल का पहला और सबसे पाक महीना माना जाता है। इसे सब्र और कुर्बानी की मिसाल के तौर पर याद किया जाता है। उन्होंने बताया कि मोहर्रम का दसवां दिन यानी यौमे आसूरा बेहद महत्वपूर्ण है, जो इमाम हुसैन की शहादत की याद में मनाया जाता है। देखिए खबर से जुड़ी तस्वीरें… मौलाना ने आगे कहा कि यह दिन सब्र, बलिदान और इंसाफ की भावना का प्रतीक है। यह हर साल दुनिया भर के मुसलमानों को इंसानियत की राह पर चलने की प्रेरणा देता है। इस अवसर पर सलीम अहमद, पुत्तन खान, सेबू सलमानी, इमरान खान, युनुस सलमानी, लतीफ सलमानी, हलीम सलमानी, सलीम सलमानी, बहिर युसुफ सलमानी, गुड्डू सलमानी, जाहिद सलमानी और सोनू खान सहित कई लोग मौजूद रहे।
ढोड़े में हजरत इमाम हुसैन की याद में मजलिस:शहादत पर ताजिया रखकर मौलाना मतीन अहमद ने किया संबोधित
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