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UP में बेमौसम बारिश और आकाशीय बिजली से हाहाकार! CM योगी ने प्रभावित परिवारों को दिया मुआवजा देने का ऐलान

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में हाल की बेमौसम बारिश और आकाशीय बिजली के कारण हुई क्षति के मद्देनजर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) ने बुधवार को लखनऊ (Lucknow) में उच्च स्तरीय बैठक की। पिछले एक सप्ताह में प्राकृतिक आपदा के चलते प्रदेश में 20 लोगों की जान चली गई, 12 लोग घायल हुए और 33 पशु प्रभावित हुए हैं। बैठक में मुख्यमंत्री ने राजस्व और कृषि विभागों को प्रभावित किसानों और बटाईदारों के नुकसान का निष्पक्ष आकलन कर तत्काल रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए।

24 घंटे के भीतर राहत और कड़े निर्देश

सीएम योगी ने सभी जिलाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जनहानि, पशु हानि और घायल लोगों के परिवारों को 24 घंटे के भीतर मुआवजा दिया जाए। राहत आयुक्त कार्यालय सभी जिलों की स्थिति पर नजर रख रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि राहत कार्यों में कोई भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही स्टेट डिजास्टर रिलीफ फंड से जिलों को पर्याप्त धनराशि तुरंत उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।

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आवास और बीमा योजनाओं का लाभ

मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन परिवारों के घर आपदा में क्षतिग्रस्त हुए हैं, उन्हें ‘मुख्यमंत्री आवास योजना’ के तहत प्राथमिकता पर नए घर दिए जाएं। इसके साथ ही, पात्र लाभार्थियों को ‘कृषक दुर्घटना बीमा योजना’ के तहत तुरंत लाभ दिलाने के भी आदेश दिए गए हैं। अधिकारियों को बीमा कंपनियों से समन्वय कर फसल बीमा दावों का त्वरित निपटान सुनिश्चित करने को कहा गया है।

मंडी समितियों और सर्वे कार्य पर जोर

सीएम ने राजस्व और कृषि विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर बल दिया ताकि प्रभावित किसानों के नुकसान का सर्वे समयबद्ध तरीके से पूरा हो। उन्होंने मंडी समितियों को भी निर्देश दिया कि वे किसानों को हर प्रकार का सहयोग दें। अधिकारी सीधे प्रभावित किसानों तक पहुंचकर यह सुनिश्चित करें कि उन्हें सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ मिले।

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हर प्रभावित तक तुरंत सहायता पहुंचाना प्राथमिकता

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इस आपदा की स्थिति में सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता हर प्रभावित तक त्वरित सहायता पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि राहत वितरण में किसी भी प्रकार की देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और अधिकारी हर स्तर पर जवाबदेह रहेंगे। सरकार किसानों के साथ खड़ी है और संकट के समय उनकी मदद में कोई कमी नहीं आएगी।

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बच्चों ने निकाली ‘स्कूल चलो’ रैली:मुंडेरवा में साक्षरता का संदेश, अभिभावकों को जागरूक किया


मुंडेरवा के कन्या प्राथमिक विद्यालय में ‘स्कूल चलो अभियान’ के तहत बच्चों ने एक जागरूकता रैली निकाली। इस रैली का उद्देश्य अभिभावकों को अपने बच्चों का परिषदीय विद्यालयों में नामांकन कराने के लिए प्रेरित करना और शिक्षा का संदेश फैलाना था। यह रैली विद्यालय के सेवा क्षेत्र जगदीशपुर, नगर पंचायत कार्यालय, नटबाग, धुसवा और मुंडेरवा बाजार से होते हुए वापस विद्यालय परिसर में समाप्त हुई। रैली के दौरान बच्चों ने शिक्षा के समर्थन में नारे लगाए, जैसे ‘पढ़ी-लिखी लड़की रोशनी घर की’ और ‘अनपढ़ होना है अभिशाप, कोई न रहे अंगूठा छाप’। इस अवसर पर प्रधानाध्यापक उमाकांत शुक्ल ने अभिभावकों को संबोधित करते हुए कहा कि वे अपने बच्चों का प्रवेश परिषदीय विद्यालयों में ही कराएं। उन्होंने बताया कि इन विद्यालयों में प्रशिक्षित अध्यापक हैं और बच्चों को निःशुल्क पुस्तकें भी प्रदान की जा रही हैं। शुक्ल ने यह भी स्पष्ट किया कि समय पर नामांकन होने से डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) का पैसा अभिभावकों के खातों में समय पर पहुंच जाएगा। रैली के दौरान भारतीय जनता पार्टी के नगर पंचायत अध्यक्ष सुनील सिंह उर्फ टिंकू भैया ने नगर पंचायत कार्यालय पर बच्चों को मिठाई वितरित की। उन्होंने 6 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों का परिषदीय विद्यालयों में नामांकन कराने पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि वर्तमान भाजपा सरकार द्वारा परिषदीय विद्यालयों में कई योजनाएं चलाई जा रही हैं और निपुण लक्ष्य के माध्यम से बच्चों का समय-समय पर आकलन किया जा रहा है। कार्यक्रम के अंत में दैनिक जागरण के पत्रकार कल्याणचंद चौधरी ने बच्चों को अंक पत्र वितरित किए और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इस अभियान में सहायक नगर पंचायत लिपिक बजरंगी चौधरी, अध्यापक सुभाष चंद्र, श्रीमती छाया जायसवाल और रसोइया गुलाबचंद सहित कई अन्य लोग उपस्थित रहे।
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बस्ती न्यूज़: आज की ताज़ा खबर



बस्ती न्यूज़: आज की ताज़ा खबर


डिग्री कोर्स अब चार साल का होगा

महाराष्ट्र सरकार ने नई एजुकेशन पॉलिसी के मुताबिक राज्य में डिग्री एजुकेशन सिस्टम में बड़े बदलावों को मंज़ूरी दे दी है।सभी पब्लिक यूनिवर्सिटी, उनसे जुड़े कॉलेज और ऑटोनॉमस इंस्टीट्यूशन में एकेडमिक ईयर 2026-27 से चार साल के डिग्री कोर्स शुरू किए जाएंगे।(The undergraduate degree program will now be four years long)

चार साल का डिग्री कोर्स आठ सेमेस्टर में बंटा होगा

इसमें स्टूडेंट्स को दो तरह की डिग्री – ‘ऑनर्स’ और ‘ऑनर्स विद रिसर्च’ पाने का मौका मिलेगा।इस बारे में जारी सरकारी प्रस्ताव (GR) में कहा गया है कि यह फैसला पूरे राज्य में इस नए स्ट्रक्चर में एक जैसापन पक्का करने और इसे असरदार तरीके से लागू करने के मकसद से लिया गया है।यह चार साल का डिग्री कोर्स आठ सेमेस्टर में बंटा होगा। तीन साल पूरे करने के बाद स्टूडेंट्स के पास दो ऑप्शन होंगे।जो स्टूडेंट्स ‘ऑनर्स’ डिग्री करना चाहते हैं, उन्हें चार साल में 160 से 176 क्रेडिट पूरे करने होंगे, जिसमें आखिरी साल में इंटर्नशिप भी शामिल होगी।

मेन सब्जेक्ट में 12 क्रेडिट का रिसर्च प्रोजेक्ट या थीसिस पूरा करना होगा

साथ ही, ‘ऑनर्स’ विद रिसर्च चुनने वाले स्टूडेंट्स को अपने मेन सब्जेक्ट में 12 क्रेडिट का रिसर्च प्रोजेक्ट या थीसिस पूरा करना होगा। डिपार्टमेंट ऑफ़ हायर एंड टेक्निकल एजुकेशन ने साफ़ किया है कि चौथे साल में एडमिशन के लिए, पहले तीन सालों में कम से कम 120 से 132 क्रेडिट लेना ज़रूरी है।

रिसर्च डिग्री के लिए, स्टूडेंट्स को कम से कम 7.5 ‘CGPA’ लाने होंगे। इस कोर्स (सिलेबस) की एडमिशन कैपेसिटी अप्रूव्ड PhD मेंटर्स की अवेलेबिलिटी पर डिपेंड करेगी और हर मेंटर पाँच स्टूडेंट्स को एडमिशन दे सकता है।क्रेडिट ट्रांसफर और ‘मल्टीपल एंट्री-एग्जिट’ का फ़ायदा पाने के लिए स्टूडेंट्स के लिए ‘एकेडमिक बैंक ऑफ़ क्रेडिट्स’ (ABC) प्लेटफ़ॉर्म पर रजिस्टर करना ज़रूरी कर दिया गया है।

स्टूडेंट्स एलिजिबिलिटी और सीटों की अवेलेबिलिटी के हिसाब से चौथे साल के लिए दूसरे कॉलेज या यूनिवर्सिटी डिपार्टमेंट में एडमिशन ले सकते हैं।जिन कॉलेजों में अभी सिर्फ़ तीन साल के कोर्स हैं, उन्हें चौथे साल के लिए स्पेशल परमिशन लेनी होगी।हालांकि, जहाँ पोस्टग्रेजुएट कोर्स या PhD सेंटर पहले से अवेलेबल हैं, वहाँ ‘ऑनर्स’ और रिसर्च डिग्री कोर्स बिना किसी एक्स्ट्रा परमिशन के शुरू किए जा सकते हैं।

‘SWAYAM’ के ज़रिए कोर्स पूरा करने पर अलाउंस

स्टूडेंट्स का सेशनल बेसिस पर असेसमेंट किया जाएगा, जिसमें इंटरनल टेस्ट और सेशन के आखिर में होने वाले एग्जाम शामिल होंगे।इसके अलावा, ‘UGC’ के नियमों के मुताबिक, ‘SWAYAM’ जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के ज़रिए कोर्स का 40 परसेंट हिस्सा पूरा करने की भी इजाज़त दी गई है।

चार साल के डिग्री कोर्स के लिए क्राइटेरिया

आठ सेशन में 160 से 176 क्रेडिट पूरे करने ज़रूरी हैं।

ऑनर्स विद रिसर्च के लिए कम से कम 7.5 CGPA ज़रूरी है।

चौथे साल में एडमिशन के लिए पहले तीन सालों में 120 से 132 क्रेडिट की शर्त।

‘ABC’ पोर्टल पर रजिस्टर करके क्रेडिट ट्रांसफर की सुविधा।

ऑनलाइन तरीकों से कोर्स का 40 परसेंट हिस्सा पूरा करने की इजाज़त।

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स्ट्रेस में ओवर ईटिंग से शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है? जानिए बचने का तरीका

आज कल की भागदौड़ वाली जिंदगी में लोग छोटी-छोटी बातों पर तनाव लेने लगते हैं। किसी पर काम का अधिक प्रेशर है तो किसी पर परिवार की जिम्मेदारियां हैं। कभी-कभी तनाव होना आम बात है लेकिन जरूरत से ज्यादा आपकी सेहत पर प्रभाव डालता है। तनाव का असर आपके रोजमर्रा की जिंदगी पर भी पड़ता है। जैसे आप ऑफिस में चिड़चिडे हो जाते हैं, किसी से बात नहीं करने का मन करेगा। इसके अलावा खान-पान में भी बदलाव देखने को मिलता है।

अधिक तनाव होने पर कई लोग जरूरत से ज्यादा खाना खाते हैं। खासतौर से इस समय लोग मीठी चीजों का सेवन करते हैं। इन चीजों को खाने से एकदम से दिमाग में डोपामिन रिलीज होता है जिससे कुछ पल के लिए आराम मिलता है। इसे इमोशनल ईटिंग भी कहा जाता है। अगर आप बार-बार तनाव में जरूरत से ज्यादा खाना खा रहे हो तो मोटापा, डायबिटीज, ब्लड प्रेशर और नींद की समस्या जैसी समस्याएं हो सकती हैं। आइए जानते हैं तनाव में ओवर ईटिंग क्यों करते हैं?

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ओवर ईटिंग के कारण क्या हैं?

हार्मोन का असंतुलन

तनाव के दौरान शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन का लेवल बढ़ जाता है जिसकी वजह से भूख बढ़ जाती है। मनपसंद चीज खाने के बाद शरीर में सेरोटोनिन का लेवल बढ़ता है जिसे कोर्टिसोल कम होता है। खाना खाने के बाद सुकन मिलता है। इसलिए ज्यादातर लोग तनाव में अधिक खाना खाते हैं।

नींद की कमी

नींद की कमी की वजह से शरीर में एनर्जी कम लगती है। ऐसे में हमारा सारा ध्यान खाने की तरफ होता है। कई लोगों को लगता है कि खाना खाने से नींद आ जाती है।

दुख में खाने की आदत

कई लोगों को दुख या तनाव में मीठा खाने की आदत होती है। किसी भी प्रकार की परेशानी या दुख में दिमाग उन चीजों को करना पसंद करता है जिससे सुकून मिले।

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ओवर ईटिंग से बचने के तरीके

तनाव के कारण खाने की तलब ज्यादा होती है। ऐसे में जंक फूड की बजाय हेल्दी स्नैक्स खाएं। इसके अलावा आप ड्राई फ्रूट्स का सेवन कर सकते हैं।

माइंडफुल ईटिंग- खाने को हमेशा ज्यादा चबाकर खाना चाहिए। ऐसे करने से आप संतुष्ट महसूस करेंगे। टीवी या मोबाइल देखते हुए खाने की गलती न करें।

मनपसंद काम करें- तनाव में खाने की बजाय कोई अन्य एक्टिविटी करें। इसमें टहलना, गाना सुनना, ब्रीथिंग एक्सरसाइज और मेडिटेशन करें।

स्ट्रेस होने पर अपनी बात किसी से जरूर शेयर करें। कई बार अपनी फीलिंग्स शेयर करने से दुख कम होता है।

Disclaimar- यह आर्टिकल सामान्य जानकारी पर आधारित है। अधिक जानकारी के लिए हमेशा विशेषज्ञ से सलाह लें।

GDP वृद्धि में आ सकती बाधा, मुद्रास्फीति भी बढ़ सकती; RBI गवर्नर की चेतावनी

GDP वृद्धि में आ सकती बाधा, मुद्रास्फीति भी बढ़ सकती; RBI गवर्नर की चेतावनी

पश्चिम एशिया संकट का असर देश की जीडीपी वृद्धि पर पड़ने का अनुमान है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ​ने चेताया है कि पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण वित्त वर्ष 2027 में विकास दर कम रहने का अनुमान है। वित्त वर्ष 2025-26 में जहां अनुमानित विकास दर 7.6 फीसद थी। वहीं मौजूदा वित्त वर्ष में इसके 6.9 रहने का अनुमान है। बता दें कि ईरान युद्ध के कारण सप्लाई चेन में रुकावट आई है। ईंधन की बढ़ती कीमत का असर अन्य क्षेत्रों पर पड़ रहा है।

आईबीआई ने बुधवार को वित्तवर्ष 2026-27 के लिए पहली द्वि-मासिक मौद्रिक नीति जारी की। आईबीआई की मौद्रिक नीति कमेटी ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया। 5.25% रेपो रेट को बरकरार रखा। वित्तीय वर्ष 2027 में जीडीपी विकास दर 6.9 फीसद रहने का अनुमान है। पहले क्वार्टर में यह अनुमान 6.9% से घटाकर 6.8% कर दिया गया है। वहीं दूसरे क्वार्टर में भी इसे 7% से घटाकर 6.7% कर दिया गया है। तीसरे और चौथे क्वार्टर में अनुमानित विकास दर 7% और 7.2% रहने का अनुमान है।

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आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने कहा कि प्रमुख शिपिंग मार्गों में व्यवधान और माल ढुलाई व बीमा लागत में इजाफा के कारण माल निर्यात पर बुरा असर पड़ सकता है। दूसरी ओर सेवा क्षेत्र में लगातार बनी गति, जीएसटी युक्तिकरण का बना हुआ असर, विनिर्माण क्षेत्र में बढ़ती क्षमता उपयोगिता और वित्तीय संस्थानों व कॉरपोरेट्स की मजबूत बैलेंस शीट घरेलू मांग को समर्थन देना जारी रखेंगी।

आरबीआई गवर्नर ने आगे कहा कि भारत के व्यापक आर्थिक बुनियादी तत्व मजबूत वृद्धि और कम मुद्रास्फीति के साथ आत्मविश्वास जगाते हैं। मार्च में संघर्ष क्षेत्र के विस्तार और उसके तेज होने के साथ स्थितियां प्रतिकूल हो गईं। उन्होंने चेतावनी दी कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष से विकास में बाधा आ सकती है। वहीं आयातित मुद्रास्फीति बढ़ने की संभावना है।

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आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा का कहना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था के बुनियादी तत्व मौजूदा समय में पिछले संकटों और कई अन्य अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में अधिक मजबूत स्थिति में हैं। यह इसे झटकों को झेलने की अधिक क्षमता देते हैं। मगर ऊर्जा की बढ़ती कीमतें, अंतरराष्ट्रीय माल ढुलाई व बीमा लागत से जुड़ी अधिक इनपुट लागत, साथ ही सप्लाई चेन में रुकावटें वृद्धि को बाधित करेंगी।

उन्होंने कहा कि मौद्रिक नीति समिति का मानना ​​है कि संघर्ष की तीव्रता और अवधि तथा इसके नतीजे में ऊर्जा और अन्य बुनियादी ढांचों को होने वाला नुकसान मुद्रास्फीति और वृद्धि के लिहाज से जोखिम पैदा करता है।

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ईरान तनाव के बीच भारत-बांग्लादेश कूटनीति तेज, डोभाल-खलीलुर रहमान की डिनर मीट पर सबकी निगाह

News Desk

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया (West asia) में जारी संघर्ष के बीच भारत और बांग्लादेश (India and Bangladesh) के रिश्तों में नई हलचल दिख रही है। अजीत डोभाल और बांग्लादेश के विदेश मंत्री डॉ. खलीलुर रहमान के बीच दिल्ली में डिनर कूटनीति के तहत अहम मुलाकात होने जा रही है। इसे दोनों देशों के संबंधों में नई शुरुआत के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

‘डिनर डिप्लोमेसी’ में होंगे बड़े मुद्दों पर मंथन

सूत्रों के मुताबिक दोनों नेताओं के बीच सीमा प्रबंधन, व्यापार, सुरक्षा सहयोग और जल संसाधन जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। यह बैठक हाल के महीनों में पैदा हुए तनाव को कम करने और दीर्घकालिक साझेदारी मजबूत करने के उद्देश्य से हो रही है।यह मुलाकात तारिक रहमान के नेतृत्व वाली सरकार के भारत के साथ रिश्ते बेहतर करने के प्रयासों का हिस्सा मानी जा रही है।

पहली उच्चस्तरीय यात्रा

बताया जा रहा है कि बांग्लादेश में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की जीत के बाद रहमान भारत आने वाले पहले वरिष्ठ मंत्री हैं। उनके साथ प्रधानमंत्री के करीबी सलाहकार हुमायून कबीर भी मौजूद हैं।

इन भारतीय नेताओं से भी मुलाकात बांग्लादेशी विदेश मंत्री अपनी यात्रा के दौरान

एस. जयशंकर
पीयूष गोयल
हरदीप सिंह पुरी
से भी मुलाकात करेंगे।
ऊर्जा संकट के मद्देनजर ढाका ने भारत से अतिरिक्त ईंधन, खासकर डीजल की आपूर्ति का अनुरोध किया है।

इन मुद्दों पर हो सकती है चर्चा बैठक में संभावित रूप से जिन विषयों पर बातचीत हो सकती है:

वीजा प्रतिबंधों में ढील
बंद भूमि और समुद्री बंदरगाहों तक पहुंच बहाल करना
गंगा जल संधि के नवीनीकरण पर तेजी
सीमा पर गोलीबारी से जुड़े मुद्दे
व्यापार और ऊर्जा सहयोग

यात्रा से पहले अहम संपर्क
भारत में बांग्लादेश के साथ कूटनीतिक सक्रियता तब और बढ़ी जब भारतीय उच्चायुक्त प्रणय वर्मा ने ढाका में प्रधानमंत्री तारिक रहमान से मुलाकात कर द्विपक्षीय सहयोग पर चर्चा की। विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच यह पहल दक्षिण एशिया में स्थिरता और ऊर्जा सहयोग को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम साबित हो सकती है।

‘अंधविश्वास है या नहीं, हम तय करेंगे’, सबरीमला विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

'अंधविश्वास है या नहीं, हम तय करेंगे', सबरीमला विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

सबरीमला विवाद पर हो रही सुनवाई के बीच सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि उसे यह तय करने का अधिकार है कि किसी धर्म में कौन-सी प्रथा अंधविश्वास है या नहीं। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने दलील दी थी कि धर्म से जुड़े मामलों पर फैसला करना कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है। केंद्र सरकार ने यह भी का कि जज कानून के विशेषज्ञ हैं, धर्म के नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसा नहीं हो सकता कि जो विधायिका तय कर दे वही अंतिम हो जाए।

सबरीमला विवाद अब सुप्रीम कोर्ट में है और चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली 9-जजों की संविधान बेंच केरल के सबरीमला मंदिर समेत धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के प्रवेश से जुड़े कथित भेदभाव और विभिन्न धर्मों में धार्मिक स्वतंत्रता के दायरे से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। बुधवार को सुनवाई की शुरुआत में केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सवाल किया कि अदालत यह कैसे तय करेगी कि कोई प्रथा अंधविश्वास पर आधारित है। उन्होंने कहा, ‘मान लें कि कोई प्रथा अंधविश्वास पर आधारित है, तब भी यह तय करना अदालत का काम नहीं है। संविधान के अनुच्छेद 25(2)(बी) के तहत यह काम विधायिका का है कि वह सुधार के लिए कानून बनाए।’

सरकार ने क्या तर्क रखे?

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि संसद या राज्य विधानसभाएं किसी प्रथा को अंधविश्वास मानकर उसके खिलाफ कानून बना सकती हैं, जैसे काला जादू रोकने से जुड़े कानून। इस पर जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्ला ने कहा कि यह दलील बहुत सरल है क्योंकि अदालत के पास यह तय करने का अधिकार है कि कोई प्रथा अंधविश्वास पर आधारित है या नहीं। उन्होंने कहा, ‘इसके बाद क्या कदम उठाना है, यह विधायिका देख सकती है लेकिन यह नहीं कहा जा सकता कि जो विधायिका तय करे वही अंतिम होगा।’

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इसके बाद तुषार मेहता ने कहा कि एक धर्मनिरपेक्ष अदालत किसी धार्मिक प्रथा को अंधविश्वास नहीं कह सकती क्योंकि उसके पास धार्मिक मामलों में विशेषज्ञता नहीं होती। उन्होंने कहा, ‘माननीय जज कानून के विशेषज्ञ हैं, धर्म के नहीं।’ तुषार मेहता ने कहा कि भारत जैसे विविध समाज में, एक प्रथा जो चीज धार्मिक है, वह दूसरी जगह अंधविश्वास मानी जा सकती है। इस दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने सवाल उठाया कि अगर जादू-टोना किसी धर्म का हिस्सा बताया जाए तो क्या उसे अंधविश्वास नहीं माना जाएगा? उन्होंने सवाल किया कि अगर इस मामले पर विधायिका चुप है तो क्या अदालत सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य के आधार पर हस्तक्षेप नहीं कर सकती?

‘धर्म के सिद्धांतों पर हो फैसला’

इस पर तुषार मेहता ने जवाब दिया कि अदालत समीक्षा कर सकती है लेकिन यह ‘अंधविश्वास’ के आधार पर नहीं, बल्कि ‘स्वास्थ्य, नैतिकता और सार्वजनिक व्यवस्था’ के आधार पर। वहीं न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना ने कहा कि किसी धार्मिक प्रथा को समझने के लिए उसी धर्म के दर्शन के नजरिए से देखना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘किसी दूसरे धर्म के नजरिए से यह नहीं कहा जा सकता कि यह जरूरी धार्मिक प्रथा नहीं है। अदालत को उसी धर्म के सिद्धांतों के आधार पर फैसला करना चाहिए लेकिन यह सब स्वास्थ्य, नैतिकता और सार्वजनिक व्यवस्था के अधीन होना चाहिए।’

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बता दें कि सबरीमला मंदिर में रजस्वला महिलाओं के प्रवेश को लेकर हुए विवाद के मामले पर अब लगातार सुनवाई हो रही है। दरअसल, सितंबर 2018 में, पांच जजों की संविधान बेंच ने 4:1 के बहुमत से 10 से 50 वर्ष की आयु की महिलाओं के प्रवेश पर लगे प्रतिबंध को हटाते हुए इसे अवैध और असंवैधानिक करार दिया था। बाद में 14 नवंबर 2019 को, तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की दूसरी बेंच ने महिलाओं से भेदभाव के मुद्दे को 3:2 के बहुमत से बड़ी बेंच को भेज दिया था।

सबरीमाला में महिलाओं के प्रवेश को लेकर सुप्रीम कोर्ट में ऐतिहासिक सुनवाई शुरू

सबरीमाला में महिलाओं के प्रवेश को लेकर सुप्रीम कोर्ट में ऐतिहासिक सुनवाई शुरू

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट की नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने मंगलवार से सबरीमाला मंदिर सहित विभिन्न धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के प्रवेश और धार्मिक स्वतंत्रता के दायरे से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों पर सुनवाई शुरू कर दी। यह मामला न केवल लैंगिक समानता बल्कि विभिन्न धर्मों में परंपराओं और संवैधानिक अधिकारों के संतुलन को भी परखेगा।

संविधान पीठ की अध्यक्षता प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत कर रहे हैं। पीठ में न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना, न्यायमूर्ति एम एम सुंदरेश, न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह, न्यायमूर्ति अरविंद कुमार, न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह, न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी वराले, न्यायमूर्ति आर महादेवन और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची शामिल हैं।

सुनवाई से पहले केंद्र सरकार ने शीर्ष अदालत में लिखित दलीलें दाखिल कर सबरीमाला मंदिर में मासिक धर्म आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध को बरकरार रखने का अनुरोध किया। केंद्र का तर्क है कि यह मामला धार्मिक आस्था और संप्रदायिक स्वायत्तता से जुड़ा है, जिस पर न्यायिक हस्तक्षेप सीमित होना चाहिए।

गौरतलब है कि सितंबर 2018 में सुप्रीम कोर्ट की पांच-न्यायाधीशों की पीठ ने 4:1 के बहुमत से 10 से 50 वर्ष की आयु की महिलाओं के प्रवेश पर लगे प्रतिबंध को असंवैधानिक घोषित कर दिया था। इसके बाद 14 नवंबर 2019 को तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश  रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मुद्दे को व्यापक संवैधानिक प्रश्न मानते हुए बड़ी पीठ को भेज दिया था।

इस संदर्भ में केवल सबरीमाला ही नहीं, बल्कि मस्जिदों और दरगाहों में मुस्लिम महिलाओं के प्रवेश तथा गैर-पारसी पुरुषों से विवाह करने वाली पारसी महिलाओं के अगियारी में प्रवेश से जुड़े मामलों को भी शामिल किया गया है। इन सभी मुद्दों को धार्मिक स्वतंत्रता, समानता और मूल अधिकारों के व्यापक दायरे में परखा जा रहा है।

शीर्ष अदालत ने पूर्व में संकेत दिया था कि इन मामलों की अंतिम सुनवाई अप्रैल के दूसरे सप्ताह से शुरू होकर 22 अप्रैल तक चल सकती है। केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने 2018 के फैसले की समीक्षा की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि सभी आयु वर्ग की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति देने वाले निर्णय पर पुनर्विचार आवश्यक है।

अब उड़ेगा ईरान का रेल नेटवर्क? इजरायली सेना ने फारसी में धमकी दी

अब उड़ेगा ईरान का रेल नेटवर्क? इजरायली सेना ने फारसी में धमकी दी

इजरायली सेना ने मंगलवार को रेल नेटवर्क उड़ाने की इशारों में धमकी दी है। इजरायल ने फारसी भाषा में ईरान नागरिकों को आगाह किया कि वे स्थानीय समयानुसार कम से कम रात नौ बजे तक ट्रेन में यात्रा करने से बचें। इस धमकी से संकेत मिला है कि इजरायल के हवाई हमलों में नई जगहों को निशाना बनाया जा सकता है। इसमें रेल नेटवर्क भी शामिल होंगे।

सोशल मीडिया प्लटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में इजरायल की सेना ने यह चेतावनी दी है। पोस्ट में कहा गया है, ‘आपकी मौजूदगी आपके जीवन को खतरे में डाल सकती है।’ ईरान में कई हफ्ते से इंटरनेट पर पाबंदी है, लिहाजा ये मुश्किल लगता है कि साधारण ईरानी इस चेतवानी को देख पाएंगे।

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डोनाल्ड ट्रंप ने भी चेतावनी दी

इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को फिर से धमकी देते हुए कहा है कि पूरे देश को एक ही रात में तबाह किया जा सकता है। उनके मुताबिक वह रात मंगलवार यानी आज रात हो सकती है। ट्रंप ने ईरान के पुलों और बिजली संयंत्रों को नष्ट करने की धमकी देते हुए यह भी कहा कि उन्हें युद्ध अपराधों की कतई चिंता नहीं है।

अमेरिका के राष्ट्रपति ने चेतावनी दी कि अगर ईरान मंगलवार को रात आठ बजे तक आत्मसमर्पण नहीं करता है तो ईरान के असैन्य बुनियादी ढांचे पर हमले किए जाएंगे। अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा, ‘आज सबसे अधिक हमले होंगे और कल, आज से भी अधिक हमले किए जाएंगे।’ इससे पहले ईरान ने 45 दिन के युद्धविराम के प्रस्ताव को खारिज करते हुए कहा कि वह युद्ध का स्थायी अंत चाहता है।

आठ बजे तक अंतिम समयसीमा

उन्होंने कहा कि समझौता करने के लिए ईरान को दी गई मंगलवार रात आठ बजे की समयसीमा अंतिम है। ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि वह या तो निर्धारित समयसीमा के भीतर होर्मुज स्ट्रेट खोले या बिजली संयंत्रों और पुलों पर हमले का सामना करने के लिए तैयार रहे। हालांकि, ईरान ने समझौते के बारे में पाकिस्तान के माध्यम से अमेरिका को अपना जवाब दे दिया है।

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‘केवल युद्धविराम स्वीकार नहीं करेंगे’

काहिरा स्थित ईरानी राजनयिक मिशन के प्रमुख मुज्तबा फरदौसी पोर ने सोमवार को कहा, ‘हम केवल युद्धविराम स्वीकार नहीं करेंगे। हम युद्ध की समाप्ति तभी स्वीकार करेंगे जब हमें यह गारंटी दी जाए कि हम पर दोबारा हमला नहीं किया जाएगा।’ फरदौसी पोर ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट पर ईरानी और ओमानी अधिकारी जहाजरानी के इस महत्वपूर्ण मार्ग के प्रशासन के एक तंत्र विकसित करने पर काम कर रहे हैं।

ईरान द्वारा युद्धविराम प्रस्ताव खारिज किए जाने से पहले इजरायल ने सोमवार को ईरान के सबसे बड़े साउथ पार्स प्राकृतिक गैस क्षेत्र में स्थित अहम पेट्रो-संयंत्र पर हमला किया। इजरायली हमले में रिवोल्यूशनरी गार्ड के एक शीर्ष कमांडर की मौत हो गई।

दिल्ली की 1511 अनधिकृत कॉलोनियां होंगी वैध,‘जैसा है, जहां है’ आधार पर नियमितीकरण

दिल्ली की 1511 अनधिकृत कॉलोनियां होंगी वैध,‘जैसा है, जहां है’ आधार पर नियमितीकरण

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में वर्षों से चली आ रही अनधिकृत कॉलोनियों की समस्या के समाधान की दिशा में केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण पहल की है। शहरी विकास को गति देने और नागरिकों को बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सरकार ने ‘जैसा है, जहां है’ के आधार पर कॉलोनियों के नियमितीकरण के साथ यातायात आधारित विकास (टीओडी) नीति लागू करने की घोषणा की है।

केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने मंगलवार को आयोजित एक कार्यक्रम में बताया कि अब अनधिकृत कॉलोनियों को बिना लेआउट प्लान की स्वीकृति के वैधता प्रदान की जाएगी। इससे मालिकाना हक की प्रक्रिया सरल होगी और लोगों को वर्षों से लंबित समस्याओं से राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि दिल्ली में विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी और अधिकारों के टकराव के कारण नागरिकों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। अब सभी संबंधित संस्थाओं को एक मंच पर लाकर समाधान सुनिश्चित किया जा रहा है।

सरकार ने सर्कल रेट की विसंगतियों को भी दूर कर दिया है। पहले दिल्ली सरकार, डीडीए और एलएनडीओ के अलग-अलग सर्किल रेट थे, लेकिन अब एक समान दर लागू कर दी गई है। इससे रजिस्ट्रेशन, कन्वर्जन और लीज होल्ड संपत्तियों से जुड़ी समस्याएं कम होंगी। कन्वर्जन प्रक्रिया को जल्द ही अंतिम रूप देकर लागू किया जाएगा।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि 2019 की पीएम-उदय योजना के तहत अब तक लगभग 40 हजार संपत्तियों के हस्तांतरण दस्तावेज जारी किए जा चुके हैं, लेकिन तकनीकी अड़चनों के कारण प्रक्रिया धीमी थी। नई व्यवस्था के लागू होने से लगभग 50 लाख लोगों और 10 लाख परिवारों को लाभ मिलने की उम्मीद है। दिल्ली की 1731 अनधिकृत कॉलोनियों में से 1511 को इस योजना के तहत नियमित किया जाएगा, जबकि संरक्षित और पर्यावरणीय क्षेत्रों को इससे बाहर रखा गया है।

नई प्रणाली के तहत आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होगी। 24 अप्रैल 2026 से स्वगम पोर्टल के माध्यम से आवेदन किए जा सकेंगे। समयबद्ध व्यवस्था के तहत जीआईएस सर्वे सात दिनों में, त्रुटि सुधार 15 दिनों में और पूर्ण आवेदन पर 45 दिनों में कन्वेंस डीड जारी की जाएगी।

टीओडी नीति में भी महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। अब न्यूनतम प्लॉट साइज घटाकर 2000 वर्ग मीटर कर दिया गया है, जिससे निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ेगी। मेट्रो और रेलवे स्टेशनों के आसपास 500 मीटर क्षेत्र को टीओडी जोन माना जाएगा। कुल फ्लोर एरिया रेशियो का 65 प्रतिशत हिस्सा किफायती आवास के लिए आरक्षित रहेगा, जिससे मध्यम और निम्न आय वर्ग को लाभ मिलेगा। सरकार का मानना है कि इन सुधारों से न केवल अनधिकृत कॉलोनियों की समस्या का समाधान होगा, बल्कि दिल्ली में योजनाबद्ध शहरी विकास को भी नई दिशा मिलेगी।

साउघाट में बारिश से फसलों को नुकसान:गेहूं और भूसा तैयार न होने से किसान परेशान

बस्ती के साउघाट क्षेत्र में सुबह करीब 11 बजे से हुई बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। इस बेमौसम बरसात से खेतों में खड़ी फसलों को भारी नुकसान हुआ है। किसानों का कहना है कि बारिश के कारण अभी तक न तो गेहूं की कटाई हो पाई है और न ही पशुओं के लिए भूसा तैयार हो सका है। फसल खराब होने और कटाई न होने से किसान बेहद परेशान हैं। इसके साथ ही, सड़कों पर पानी भर जाने से राहगीरों को भी आवागमन में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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‘कहीं अखंड भारत का हिस्सा न बना दे’, UAE-भारत के बढ़ते संबंध से पाकिस्तान परेशान

'कहीं अखंड भारत का हिस्सा न बना दे', UAE-भारत के बढ़ते संबंध से पाकिस्तान परेशान

पाकिस्तान के सीनेटर मुशाहिद हुसैन ने मंगलवार को कहा कि भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच गहरे होते रिश्ते से भविष्य में बड़े भू-राजनीतिक प्रभाव पड़ सकते हैं। उन्होंने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि दोनों देशों के बढ़ते संबंध पाकिस्तान के लिए समस्या बन सकते हैं।

दुनिया न्यूज से बात करते हुए मुशाहिद हुसैन ने पाकिस्तान के यूएई को अरबों डॉलर के कर्ज चुकाने के फैसले का बचाव किया। उन्होंने कहा कि यह कर्ज चुकाना कोई मजबूरी नहीं है, बल्कि यह एक ‘मुसीबत में फंसे भाई’ की मदद है। उन्होंने दावा किया कि यूएई क्षेत्रीय संघर्षों और विदेश में पैसे भेजने के कारण परेशानी में है। इसलिए पाकिस्तान को ऐतिहासिक जिम्मेदारी निभाते हुए उसकी मदद करनी चाहिए।

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कहा- पाकिस्तान से हैं संबंध

मुशाहिद हुसैन ने कहा कि शेख जायद बिन सुल्तान अल नाहयान के समय से पाकिस्तान और यूएई के पुराने संबंध हैं। पाकिस्तान ने यूएई को बनाने में बड़ी भूमिका निभाई थी, जिसमें उसके सैनिकों को प्रशिक्षण देना भी शामिल था।

उन्होंने कहा, ‘अब वे फंस गए हैं और लाचार हो गए हैं।’ उन्होंने यूएई के यमन और सूडान जैसे संघर्षों में शामिल होने और विदेश में बड़े वित्तीय खर्च का जिक्र किया। साथ ही उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का हवाला देते हुए कहा कि खाड़ी देश से बड़ी मात्रा में पैसा बाहर जा रहा है। उन्होंने भारत में बड़ी संख्या में रहने वाले भारतीयों की ओर इशारा करते हुए चेतावनी दी, ‘ध्यान रखें कि उनके साथ दोस्ताना संबंध आपको अखंड भारत का हिस्सा न बना दें।’

3.5 अरब डॉलर की उधारी

ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं जब पाकिस्तान यूएई को करीब 3.5 अरब डॉलर लौटाने की तैयारी कर रहा है। यह पैसा 2019 में अबू धाबी फंड फॉर डेवलपमेंट के जरिए पाकिस्तान को बैलेंस ऑफ पेमेंट्स (भुगतान संतुलन) के लिए दिया गया था। पाकिस्तानी अधिकारी इसे ‘राष्ट्रीय गरिमा’ का मामला बता रहे हैं। हालांकि, इस चुकौती से पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ रहा है, जो फिलहाल करीब 16.3 अरब डॉलर के आसपास है।

यह चुकौती अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) कार्यक्रम के तहत पाकिस्तान की प्रतिबद्धताओं के साथ भी जुड़ी हुई है। इसमें चीन, सऊदी अरब और यूएई जैसे सहयोगियों से अरबों डॉलर की बाहरी मदद जुटानी होगी।

वॉशिंगटन से भी आलोचना

इसी बीच, वॉशिंगटन से भी पाकिस्तान की रणनीतिक स्थिति की आलोचना हो रही है। पूर्व पेंटागन अधिकारी माइकल रुबिन ने पाकिस्तान की सैन्य क्षमता को कमतर बताते हुए कहा कि पाकिस्तान अक्सर अपनी ताकत बढ़ा-चढ़ाकर बताता है और ईरान संकट से जुड़ी किसी भी अमेरिकी कार्रवाई में इसका कोई खास रोल नहीं होगा।


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क्षेत्र में तनाव बढ़ रहा है। ट्रंप ने ईरान को हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर धमकी दी है। ऐसे में पाकिस्तान को वित्तीय दबाव, क्षेत्रीय गठबंधनों और कूटनीतिक महत्वाकांक्षाओं के बीच संतुलन बनाने में काफी मुश्किलें आ रही हैं।

लालगंज-बानपुर मार्ग जर्जर, राहगीर परेशान:जगह-जगह गड्ढे, दुर्घटनाएं बढ़ीं; जल्द मरम्मत की मांग

बस्ती जनपद के कुदरहा विकास खंड अंतर्गत लालगंज-बानपुर मार्ग इन दिनों जर्जर हालत में है। सड़क पर जगह-जगह गड्ढे होने से राहगीरों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से जल्द से जल्द सड़क की मरम्मत कराने की मांग की है। बताया गया है कि इस मार्ग की मरम्मत लंबे समय से नहीं हुई है, जिसके कारण सड़क की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। जर्जर सड़क के कारण आए दिन छोटी-मोटी दुर्घटनाएं भी हो रही हैं, जिससे राहगीरों में रोष व्याप्त है। यह मार्ग ठोकवा, कबरा खास, मंझरिया, सिसई पंडित, कोपे, कटया पंडित और कचनी सहित दर्जनों गांवों को ब्लॉक मुख्यालय और जिला मुख्यालय से जोड़ता है। सड़क की खराब स्थिति का सीधा असर इन गांवों के हजारों निवासियों के दैनिक आवागमन पर पड़ रहा है। बनकटवा गांव निवासी इंजीनियर पंकज कुमार, संतोष चौधरी, वीरेंद्र पटेल और चंदन यादव ने सड़क की बदहाली पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने शासन-प्रशासन से इस समस्या पर तत्काल ध्यान देने और सड़क की मरम्मत कराने की अपील की है। वीरेंद्र पटेल ने विशेष रूप से बताया कि ठोकवा चौराहे पर सड़क पूरी तरह टूट चुकी है। इस स्थान पर कई यात्री गिरकर चोटिल हो चुके हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते सड़क की मरम्मत नहीं कराई गई तो कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती है। स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से आग्रह किया है कि वे इस गंभीर समस्या को प्राथमिकता से लें और शीघ्र ही सड़क की मरम्मत कराएं, ताकि क्षेत्र के लोगों को सुरक्षित और सुगम आवागमन की सुविधा मिल सके।
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‘गुजरातियों का हमेशा सम्मान किया’, विवाद पर मल्लिकार्जुन खरगे ने जताया खेद

'गुजरातियों का हमेशा सम्मान किया', विवाद पर मल्लिकार्जुन खरगे ने जताया खेद

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के एक बयान पर सियासी बखेड़ा खड़ा हो गया। खरगे ने कहा कि उनके बयान को जानबूझकर गलत तरीके से पेश किया गया। मगर उन्होंने कहा कि फिर भी मैं खेद व्यक्त करता हूं। एक दिन पहले ही बीजेपी ने खरगे पर गुजरातियों को अशिक्षित कहने का आरोप लगाया था। उनसे माफी मांगने की मांग भी की थी।

मल्लिकार्जुन खरगे ने बुधवार को एक्स पर लिखा, ‘हाल ही में केरल में दिए गए मेरे एक चुनावी भाषण की कुछ टिप्पणियों को जानबूझकर गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। फिर भी मैं अपनी तरफ से जिम्मेदारी के साथ खेद व्यक्त करता हूं। गुजरात के लोगों के प्रति मेरे मन में हमेश सर्वोच्च सम्मान रहा है और हमेशा रहेगा। वहां के लोगों की भावनाओं को आहत करना मेरा कभी उद्देश्य नहीं था।’

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केरल की रैली में क्या बोले थे खरगे?

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक केरल के इडुक्की में रविवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की रैली थी। इसी रैली में उन्होंने कथित तौर पर कहा, ‘राज्य के लोग शिक्षित और होशियार हैं। उन्हें गुमराह नहीं किया जा सकता है, जबकि गुजरात और कुछ अन्य जगहों के लोग अशिक्षित हैं।’

बीजेपी ने कांग्रेस को घेरा

खरगे के बयान के बाद बीजेपी नेता रविशंकर प्रसाद ने एक प्रेस वार्ता की। पार्टी अध्यक्ष खरगे के बयान पर उन्होंने सोनिया, प्रियंका और राहुल गांधी से सफाई मांग की क्या वे इस बयान से सहमत हैं। रविशंकर प्रसाद ने कहा, ‘जिस गुजरात की पावन भूमि ने कई संतों को जन्म दिया। गांधी जी वहां पैदा हुए। सरदार पटेल पैदा हुए। मोरारजी पैदा हुए और उस मिट्टी से देश पर इतना काम किया। उसको आप अशिक्षित कहते हैं। मैंने बार-बार संसद में कहा कि राहुल गांधी होमवर्क नहीं करते हैं। अध्यक्ष का भी वही हाल।’

माफी मांगे कांग्रेस अध्यक्ष: बीजेपी

रविशंकर प्रसाद ने आगे कहा, ‘गुजरात की साक्षरता दर 82 प्रतिशत है। मोदी के आने के बाद इसमें और इजाफा हुआ है। अगर आप मोदी से नफरत करते हैं तो कुछ भी बोल देंगे? कांग्रेस अध्यक्ष ने पूरे गुजरात को अशिक्षित कहा। बीजेपी की तरफ से हम मांग करते हैं कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे माफी मांगे।’

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‘राहुल गांधी करें बयान की निंदा’

रविशंकर प्रसाद ने पूछा कि सोनिया और प्रियंका गांधी यह साफ करें कि वह अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष के बयान से सहमत हैं। अगर राहुल गांधी में थोड़ी भी समझ है तो उन्हें इस टिप्पणी से खुद को अलग कर लेना चाहिए, इसकी निंदा करनी चाहिए और अपने अध्यक्ष से माफी मंगवानी चाहिए। रविशंकर प्रसाद ने आरोप लगाया कि इन्होंने सिर्फ गुजरातियों को अशिक्षित नहीं कहा, बल्कि बिहार और यूपी को भी कहा है।

बस्ती में मौसम बदला, बारिश से किसान चिंतित:गेहूं की कटाई और मड़ाई का काम रुका, फसल खराब होने का डर

बस्ती में मौसम के बदले मिजाज ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। आसमान में छाए काले बादलों, तेज हवाओं और हल्की बूंदाबांदी के कारण गेहूं की मड़ाई का काम रुक गया है। इससे साल भर की मेहनत के बाद फसल घर लाने की तैयारी कर रहे किसानों को नुकसान की आशंका है। सदर ब्लॉक के विभिन्न इलाकों में बुधवार सुबह से ही ठंडी हवाएं चल रही थीं और बारिश की संभावना बनी हुई थी। जिन किसानों ने अपनी कटी हुई फसल खेतों में सूखने के लिए छोड़ी थी, वे उसे आनन-फानन में तिरपाल से ढकते या सुरक्षित स्थानों पर ले जाते दिखे। इस अचानक बदलाव से मड़ाई का काम बीच में ही बाधित हो गया है। स्थानीय किसानों, जिनमें संजीव पांडे, राम किशोर, रामदीन चौधरी, रामविलास मौर्य, राम धीरज चौधरी और राम प्रकाश चौधरी शामिल हैं, ने बताया कि वे मड़ाई के लिए पूरी तरह तैयार थे, लेकिन बूंदाबांदी ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। किसानों का कहना है कि यदि बारिश तेज हुई तो गेहूं की बाली काली पड़ सकती है और दाने की चमक कम हो जाएगी। फसल भीगने के बाद उसे दोबारा सुखाने में कई दिन लगेंगे, जिससे लागत और समय दोनों बढ़ जाएंगे। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, कटाई के इस अंतिम चरण में बारिश गेहूं की फसल के लिए हानिकारक है। भीगने से अनाज की गुणवत्ता प्रभावित होती है और गीली फसल की मड़ाई मशीनों से संभव नहीं हो पाती। इसके अतिरिक्त, तेज हवाओं से कटी हुई फसल मिट्टी में मिल सकती है, जिससे पैदावार में भारी गिरावट का खतरा है। फिलहाल, किसान मौसम साफ होने की प्रार्थना कर रहे हैं ताकि उनकी तैयार फसल सुरक्षित रूप से घर पहुंच सके।
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