दिल्ली में पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता से अभी मौसम सुहावना बना रहेगा। 18 मार्च के बाद एक बार फिर से मौसम करवट लेने जा रहा है। मौसम विभाग ने इस सप्ताह चार दिन गरज चमक और तेज हवाओं के साथ बारिश की चेतावनी दी है। मौसम विभाग का अनुमान है कि बृहस्पतिवार, शुक्रवार, रविवार और सोमवार को अलग-अलग इलाकों में तेज हवा के साथ बारिश हो सकती है। इससे तापमान में गिरावट आएगी।
मौसम विभाग के अनुसार, 28 मार्च को छोड़कर 26, 27, 29 और 30 मार्च को हवा की गति 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा रहने का अनुमान है। वहीं, मौसम विभाग की ओर से साझा किए गए ताजा अपडेट के अनुसार, इस सप्ताह 30 मार्च तक मौसम में उतार चढ़ाव देखा जाएगा। मौसम ज्यादातर गीला रहने से तापमान में भी किसी बड़े उछाल की संभावना नहीं है।
बुधवार को दिनभर तेज धूप के चलते लोगों को गर्मी का अहसास हुआ। हालांकि, हवा चलने से मौसम खुशनुमा रहा। लेकिन, सुबह से ही निकल रही धूप ने लोगों को खासा परेशान किया हुआ है। इस दौरान अधिकतम तापमान 33.5 और न्यूनतम तापमान 16.4 डिग्री दर्ज हुआ। दिल्ली में अधिकतम आर्द्रता 94 प्रतिशत और न्यूनतम आर्द्रता 33 प्रतिशत रही।
मौसम विभाग के अनुसार, रिज में 34, आया नगर में 33.7, लोधी रोड में 33.8 और पालम में 31.9 अधिकतम पारा दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अधिकारियों ने पहले ही ऐसी संभावना जताई थी, क्योंकि पहाड़ों पर लगातार बर्फबारी हो रही है। मौसम में आए इस बदलाव की वजह पश्चिमी विक्षोभ को बताया जा रहा है।
ईरान युद्ध ने दुनियाभर में ऊर्जा संकट खड़ा कर दिया है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में वाणिज्यिक जहाजों का यातायात सामान्य नहीं है। ईरान के हमलों के कारण खाड़ी के कई देशों ने ईंधन का उत्पादन बंद कर दिया है। असर यह है कि मांग और पूर्ति में भारी अंतर पैदा हो गया है। अमेरिका लगातार ईरान को धमकी देने में जुटा है, ताकि होर्मुज को खुलवाया जा सके। मगर ईरान झुकने को तैयार नहीं है। वहां से गुजरने वाले जहाजों पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया जा रहा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने से तेल और गैस के अलावा एक और संकट खड़ा होने वाला है। शायद दुनिया की निगाह इस पर बहुत ही कम गई है।
मध्य पूर्व के समुद्री मार्ग पर आई रुकावट से दुनियाभर में सल्फर (गंधक) का बड़ा खतरा पैदा होने की आशंका है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बीच ड्रोन और मिसाइल के बारिश के कारण कोई भी जहाज कंपनी वहां से गुजरने का जोखिम नहीं उठा रही है। यहां से दुनियाभर में करीब 20 फीसद तेल और 20 फीसद ही प्राकृतिक गैस का निर्यात होता है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते ही दुनिया को सल्फर का एक बड़ा हिस्सा मिलता है। जहाज का आवागमन ठप होने से दुनिया के सामने सल्फर का संकट खड़ा हो सकता है।
एक आंकड़े के मुताबिक दुनियाभर का करीब 41 फीसद सल्फर का व्यापार स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते होता है। ईरान युद्ध के बाद इसकी कीमतों में लगभग 25 फीसद का इजाफा हो चुका है। मध्य पूर्व में दुनिया का 24 फीसद सल्फर का उत्पादन होता है। दुनियाभर में सल्फर से ही सल्फ्यूरिक एसिड का निर्माण किया जाता है। अमेरिका अपनी जरूरत का सल्फर खुद ही उत्पादित करता है। वह अपने 90 फीसद सल्फर का इस्तेमाल सल्फ्यूरिक एसिड बनाने में करता है। मगर कई देश अन्य देशों पर से आने वाले सल्फर पर निर्भर हैं। सल्फर संकट से इन देशों के औद्योगिक विकास को बड़ा झटका लगेगा, क्योंकि कोई देश औद्योगिक तौर पर कितना प्रगतिशील है, इसका अनुमान उसके सल्फ्यूरिक एसिड बनाने की क्षमता से लगता है।
ताबा संकट: बिना सल्फ्यूरिक एसिड के शुद्ध तांबा नहीं बन सकता है। खाना से निकला अयस्क अपने साथ कई अशुद्धियां समेटे होता है। सल्फ्यूरिक एसिड का इस्तेमाल करके शुद्ध तांबे को अलग किया जाता है। बाद में इसी तांबे का इस्तेमाल पावरग्रिड, ट्रांसफार्मर और मोटारों में किया जाता है। अगर सल्फर की सप्लाई चेन में रुकावट आई तो दुनिया भर में तांबा संकट पैदा होगा और बाद में यह बिजली व्यवस्था में व्यवधान के तौर पर बदल सकता है, जिससे दुनियाभर में गैस और तेल के बाद बिजली संकट भी पैदा हो सकता है।
तांबे का इस्तेमाल संचार हार्डवेयर, सैन्य अड्डों और रक्षा कारखानों को चलाने में भी खूब होता है। पायने इंस्टीट्यूट के विश्लेषण के मुताबिक बहरीन और कतर में दो प्रमुख अमेरिकी रडार नष्ट हुए हैं। इन्हें बदलने के लिए 30 हजार किलोग्राम से ज्यादा तांबे लगेगा। अगर जॉर्डन, कुवैत, सऊदी अरब और यूएई में नष्ट हुए अन्य अमेरिकी संचार उपकरणों, सेंसरों और रडारों की मरम्मत की जाए तो हजारों किलो और तांबे की जरूरत होगी।
कोबाल्ट संकट: सल्फ्यूरिक एसिड के बिना शुद्ध कोबाल्ट को नहीं निकाला जा सकता है। खनन से निकले कोबाल्ट के अयस्क को सल्फ्यूरिक एसिड में खोला जाता है। इससे शुद्ध कोबाल्ट अलग हो जाता है। बाद में इसी कोबाल्ट का लिथियम-आयन बैटरी में इस्तेमाल होता है। लैपटॉप, मोबाइल फोन और इलेक्ट्रिक गाड़ियों में लिथियम-आयन बैटरी का उपयोग होता है। सल्फर आपूर्ति रुकने से कोबाल्ट से लिथियम आयन बैटरी और बाद में फोन, लैपटॉप और इलेक्ट्रिक गाड़ियों के प्रोडक्शन पर इसका असर पड़ेगा।
कोबाल्ट से विशेष मिश्रधातु का निर्माण होता है। यह धातुएं न केवल मजबूत होती हैं, बल्कि गर्मी प्रतिरोधी होती है। इन विशेष धातुओं का गैस टरबाइन, ड्रोन और जेट इंजन में किया जाता है। इसके अलावा शक्तिशाली चुंबक, पेंट, कांच और सिरेमिक व कैंसर के इलाज में काम आने वाली रेडियोथेरेपी में कोबाल्ट का इस्तेमाल होता है।
सेमीकंडक्टर: सल्फर संकट का असर सेमीकंडक्टर क्षेत्र में पड़ेगा। सिलिकॉन वेफर्स से माइक्रोचिप्स का निर्माण होता है। इन वेफर्स की सफाई और नक्काशी में बेहद शुद्ध सल्फ्यूरिक एसिड की जरूरत होती है। यही कारण है कि सल्फर की आपूर्ति में आने वाले बाधा सेमीकंडक्टर के अलावा ऑटो मोबाइल, मिसाइल, एयर डिफेंस सिस्टम और फाइटर जेट के उत्पादन को प्रभावित कर सकती है, क्योंकि एवियोनिक्स से कंप्यूटिंग संरचना में इसका खूब इस्तेमाल होता है।
मध्य पूर्व में सल्फर का उत्पादन
मध्य पूर्व दुनियाभर का करीब 24 फीसद सल्फर का उत्पादन करता है। यानी हर चार किलो सल्फर में एक किलो यही से आता है। आंकड़ों के मुताबिक साल 2024 में मध्य पूर्व में करीब 21 से 28 मिलियन टन सल्फर का उत्पादन हुआ।
सऊदी अरब
संयुक्त अरब अमीरात
कतर
इराक
दुनिया के 10 सबसे बड़े सल्फर उत्पादक
दुनियाभर में सल्फर का उत्पादन खदानों से बेहद कम होता है। 90 फीसद तक सल्फर का उत्पादन तेल और गैस रिफाइनिंग से बाय-प्रोडक्ट के तौर पर होता है। चीन दुनिया में सबसे अधिक सल्फर बनाता है।
दिल्ली-एनसीआर सहित उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान में 15 मार्च को अचानक मौसम बदल गया, जिससे अधिकतम और न्यूनतम दोनों तापमान में भारी गिरावट देखने को मिली। जहां लोग मान चुके थे कि गर्मियां आ चुकी हैं और सूरज अपनी गर्मी का अहसास भी करवाने लगा था, ऐसे में रविवार को हुई बारिश ने मौसम में एक बार फिर से ठंडक ला दी।
उत्तर प्रदेश में रविवार सुबह नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ, अयोध्या समेत 15 शहरों में तेज हवाओं के साथ हल्की बारिश हुई। लखनऊ में बूंदाबांदी के साथ धूलभरी आंधी चली। आसमान में काले बादल छा गए। यही सिलसिला सोमवार को भी जारी रहा और कई शहरों और जिलों में तेज हवाएं चल रही हैं।
दिल्ली-एनसीआर में पश्चिमी विक्षोभ की वजह से आज भी सुबह से ही मौसम सुहावना है। सौमवार को भी 30 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने बताया है कि दिल्ली-एनसीआर में 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चली हैं। यही नहीं बारिश की वजह से अधिकतम तापमान में 6 डिग्री सेल्सियस गिरावट दर्ज की गई है, जबकि न्यूनतम तापमान में भी 3-4 डिग्री सेल्सियस गिरावट हुई है।
मौसम विभाग ने 21 मार्च तक के मौसम का पूर्वानुमान जारी किया है, जिसमें मौसम में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे। इसमें बताया गया है कि 21 मार्च तक दिल्ली-एनसीआर में ठंडक बनी रहेगी और लोगों को अभी फिलहाल गर्मी से राहत मिलेगी।
मौसम विभाग ने सोमवार को अपने ताजा बुलेटिन में जानकारी देते हुए बताया कि पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, सिक्किम, असम और मेघालय, त्रिपुरा में रात का न्यूनतम तामपान 14-18 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा। इसका साफ मलतब है कि इन राज्यों में रात का मौसम सुहावना हो रहा है। गर्मी को अभी थोड़ा इंतजार करना पड़ेगा।
सर्दियों के मौसम में गर्म पानी से नहाना बहुत सुकून देता है लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आपके गीजर के अंदर क्या चल रहा है? लंबे समय तक सफाई न होने के कारण गीजर के टैंक में कैल्शियम, मैग्नीशियम और जंग की एक मोटी परत जमा हो जाती है। यह जमा हुआ पानी गीजर की क्वालिटी को खराब कर देता है जिससे नहाते समय आपकी स्किन सीधे हानिकारक तत्वों के संपर्क में आती है।
जब गीजर के अंदर का पानी महीनों तक जमा रहता है और टैंक की सफाई नहीं होती तो इस वजह से वह बैक्टीरिया जैसे लेजियोनेला के पनपने का ठिकाना बन जाता है। गीजर का गंदा पानी स्किन के नेचुरल ऑयल को सोख लेता है जिससे स्किन बैरियर कमजोर हो जाता है। नतीजा यह होता है कि नहाने के बाद आपको स्किन में खिंचाव, सूखापन और रैशेज महसूस होने लगते हैं।
हर सीजन की शुरुआत में प्रोफेशनल मैकेनिक से गीजर के टैंक की सफाई जरूर करवाएं।
मैग्नीशियम एनोड रॉड बदलें: यह रॉड टैंक को जंग से बचाती है। इसे हर 1-2 साल में बदलना चाहिए।
तापमान पर नियंत्रण: पानी को बहुत ज्यादा गर्म न करें, क्योंकि इससे स्केलिंग तेजी से होती है। गीजर का तापमान कम से कम 60°C पर सेट करें ताकि बैक्टीरिया पनपे ना।
यदि पानी का रंग पीला या मटमैला दिख रहा हो, तो तुरंत सफाई करवाएं।
अयोध्या के राम मंदिर परिसर में अब राम मंदिर आंदोलन के दौरान बलिदान देने वाले कार सेवकों के लिए स्मारक और पुराने राम मंदिर से जुड़े स्मारक को विकसित करने का काम किया जा रहा है। कारसेवकों के लिए बने स्मारक का काम मार्च तक पूरा हो जाएगा, अप्रैल तक, उस जगह, जहां रामलला ‘विराजमान’ हुए थे, उसे बना लिया जाएगा। श्री राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने बताया है कि अभी सिर्फ दो स्थलों का निर्माण चल रहा है।
कारसेवकों के स्मारक और पुराने मंदिर, दोनों को स्मारक के तौर पर संरक्षित किया जाएगा। उन्होंने उम्मीद जताई है कि दोनों काम जल्द ही पूरे होने वाले हैं। नृपेंद्र मिश्रा ने कहा है कि उम्मीद है कि 31 मार्च या 30 अप्रैल तक ये काम खत्म हो जाएंगे। कारसेवकों का स्मारक करीब 11 मीटर ऊंचा है। अस्थाई मंदिर को वंशी पहाड़पुर के लाल पत्थरों से विकसित किया जाएगा। करीब 70 फीसदी तक काम पूरा हो चुका है।
मंदिर परिसर में म्यूजियम भी बन रहा है, जिसमें कुल 20 गैलरी होंगी। इनमें राम जन्मभूमि आंदोलन और भगवान राम से जुड़ी कहानियां दिखाई जाएंगी। अभी इन गैलरियों के लिए विषय चुना जा रहा है। म्यूजियम में आम श्रद्धालुओं को सितंबर के बाद सीमित संख्या में जाने की अनुमति दी जा सकती है।
नृपेंद्र मिश्रा,राम जन्मभूमि मंदिर कंस्ट्रक्शन समिति, अध्यक्ष:- अभी हम जिस मुख्य निर्माण की देखरेख कर रहे हैं, वह खास तौर पर स्मारक और पुराना मंदिर है, जहां भगवान विराजमान थे। उसे एक स्मारक के तौर पर रखा जाएगा। ये दोनों अभी बन रहे हैं। हमें पूरी उम्मीद है कि यह 31 मार्च या 31 अप्रैल तक पूरा हो जाएगा।
रामलला दरबार, राम मंदिर। Photo Credit: Ram Janmbhoomi
कब सभी जगह दर्शन कर सकेंगे श्रद्धालु?
नृपेंद्र मिश्रा,राम जन्मभूमि मंदिर कंस्ट्रक्शन समिति, अध्यक्ष:-
अभी, म्यूजियम की 20 गैलरी में दिखाए जाने वाले कंटेंट के लिए एक स्क्रिप्ट लिखी जा रही है। मैं रिक्वेस्ट करूँगा कि सितंबर के बाद आम विज़िटर्स को लिमिटेड बेसिस पर म्यूज़ियम आने दिया जाए… यह तय किया गया है कि 19 मार्च को प्रेसिडेंट के दौरे के बाद, भक्तों को शुरू में पास सिस्टम के ज़रिए सभी जगहों पर जाने दिया जाएगा।
नृपेंद्र मिश्रा ने कहा, ‘संग्रहालयों में जाने के लिए सामान्य रूप से कोई पास नहीं बनाया जाएगा। सबको मौका मिलेगा। कुछ जगहों के लिए पास बनाया जा सकता है। जैसे हनुमान जी की गैलरी है। अगर कोई वहां जाएगा तो 12 मिनट की पूरी कहानी दिखाई जाएगी। उसके बैठने की व्यवस्था की जाएगी। जितनी सीटें होंगी, उतने ही लोग जा सकेंगें।’
हनुमान गैलरी में क्या होगा खास?
राम मंदिर परिसर में ही हनुमान पर केंद्रित एक गैलरी है। उसे IIT चेन्नई की ओर से तैयार किया जा रहा है। 30 सितंबर तक इसका काम पूरा हो जाएगा। तब लोग जा सकेंगे।
कब पूरा मंदिर घूम सकेंगे श्रद्धालु?
नृपेंद्र मिश्रा ने बताया है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 19 मार्च को अयोध्या आने वाली हैं। उनके दौरे के बाद पहले पास सिस्टम से श्रद्धालुओं को सभी जगहों पर जाने की इजाजत मिलेगी। श्रद्धालु ‘रामलला’ के साथ-साथ अब म्यूजियम और अन्य स्थलों का भी दौरा कर सकेंगे। उन्होंने कहा है कि मार्च-अप्रैल तक कुछ अहम फैसले लिए जाएंगे, जिसके बाद म्यूजियम और अन्य सुविधाएं धीरे-धीरे आम श्रद्धालुओं के लिए खुल जाएंगी।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अगुवाई में अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी 2026 को ईरान पर बड़ा हमला शुरू किया, जिसे ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ नाम दिया गया। इस हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई समेत कई बड़े नेता मारे गए। अमेरिका और इजरायल का मानना था कि इससे ईरान की सरकार कमजोर हो जाएगी और कोई अमेरिका के इशारों पर नाचने वाला नेता आ जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
हमले के बाद ईरान ने और ज्यादा आक्रामक रुख अपनाया। ईरान ने नए सुप्रीम लीडर के रूप में अली खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई को चुना। वह अपने पिता से कहीं ज्यादा कट्टर और सख्त हैं। ईरान ने मिसाइल और ड्रोन से मध्य पूर्व में कई जगहों पर हमले किए। अमेरिका के ज्यादातर सैन्य बेस या तो तबाह हो चुके हैं, या उन्हें बड़ा नुकसान पहुंचा है। तेल टैंकरों पर ईरान भीषण हमले कर रहा है, आरामको जैसे तेल प्लांट तक प्रभावित हो चुके हैं।
ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल टैंकर और व्यापारिक जहाजों को अब गुजरने नहीं दे रहा है। पूरी दुनिया, अब ईरान की रहम पर निर्भर है। होर्मुज से दुनिया का 20 फीसदी तेल गुजरता है, वहां अब ईरान का पूरा नियंत्रण है। दुनिया में तेल की कीमतें बहुत बढ़ गईं है। भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश जैसे देशों में गैस संकट पैदा हो रहा है।
2 दिन में ईरान का सरेंडर चाहते थे ट्रंप, खुद सरेंडर मोड में
अमेरिका को उम्मीद थी कि यह युद्ध कुछ हफ्तों में खत्म हो जाएगा, लेकिन अब यह खुला युद्ध बन गया है। अमेरिकी सेना को ज्यादा नुकसान हुआ है। 13 सैनिक मारे गए और 140 घायल हुए हैं। अमेरिका में जनता युद्ध के खिलाफ है और गैस की कीमतें बढ़ने से ट्रंप की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
डोनाल्ड ट्रंप ने मोजतबा खामेनेई और उनके सहयोगियों की जानकारी देने पर 1 करोड़ डॉलर का इनाम घोषित किया है लेकिन वह बुरी तरह फंस गए हैं। अमेरिका, इस जंग का मकसद ही साबित नहीं कर पाएगा। अब वह फ्रांस और जापान जैसे देशों से मदद के लिए गिड़गिड़ा रहे हैं।
ईरान में मोजतबा खामेनेई की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है। Photo Credit: PTI
डोनाल्ड ट्रंप, राष्ट्रपति, अमेरिका:- कई देश, खासकर वे जो ईरान के होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने से प्रभावित हैं, अमेरिका के साथ मिलकर, इस स्ट्रेट को खुला और सुरक्षित रखने के लिए अपने युद्धपोत भेजेंगे। हमने ईरान की 100 फीसदी सैन्य क्षमता को पहले ही नष्ट कर दिया है। उनके लिए एक-दो ड्रोन भेजना, कोई माइन गिराना या इस स्ट्रेट के आस-पास या इसके अंदर कहीं भी कम दूरी की मिसाइल दागना आसान है, भले ही वे कितनी भी बुरी तरह से हार गए हों। उम्मीद है कि चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन और अन्य देश, जो इस परेशानी से जूझ रहे हैं, इस क्षेत्र में अपने जहाज भेजेंगे, जिससे होर्मुज में अब उस देश की ओर से कोई खतरा न रहे, जिसकी सैन्य शक्ति पूरी तरह से खत्म हो चुकी है।
अमेरिका में ही डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को लेकर आलोचना झेल रहे हैं। Photo Credit: PTI
ईरान को कम आंक गए बेंजामिन नेतन्याहू और डोनाल्ड ट्रंप
ट्रंप प्रशासन ने खुफिया जानकारी के आधार पर जल्दी हमला किया, जिससे ईरान के सभी बड़े नेता एक साथ मारे जाएं। लेकिन हमले इतने बड़े थे कि जिन लोगों को अमेरिका ईरान का नया लीडर बनाने की उम्मीद कर रहा था, वे भी मारे गए। डोनाल्ड ट्रंप ने खुद माना कि जिन्हें हम चाहते थे, वे मर गए। अब नए लीडर मोजतबा खामेनेई हैं, जो बदला लेने की बात कर रहे हैं। वह खून का बदला खून से ही चाहते हैं।
ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य बंद कर दिया। अमेरिका दावा करता रहा कि आप लोग रिस्क पर अपने जहाज को ले जाइए, अमेरिकी जहाज रेस्क्यू करेंगे। सच यह है कि अमेरिका खुद जहाज उतरने से डर रहा हैं। अमेरिका के कई जहाज ईरान ने मार गिराए हैं। दुनिया का 20 फीसदी तेल जहां से गुजरता है, वहीं ईरान अपने सबसे हिंसक रूप में है।
ईरान ने तेल टैंकरों पर हमले किए, कई टैंकर जले। अमेरिका ने भी जोर आजमाइश की। तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गईं। अमेरिका में पेट्रोल 3.63 डॉलर प्रति गैलन हो गया।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का पूरा कंट्रोल ईरान के पास है। Photo Credit: PTI
अमेरिका ने खार्ग द्वीप पर बमबारी की, जो ईरान का मुख्य तेल निर्यात केंद्र है। अमेरिका के हमलों से ईरान और सख्त हो गया है। अब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का खुलना मुश्किल है। नौसेना से जहाजों की सुरक्षा की बात चल रही है, लेकिन अमेरिका फारस की खाड़ी में फिसड्डी साबित हुआ है।
बेंजामिन नेतन्याहू और डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ दुनियाभर में प्रदर्शन हो रहे हैं। Photo Credit: PTI
ईरान नहीं, अमेरिका करेगा सरेंडर?
डोनाल्ड ट्रंप हारकर भी अपनी जीत की दावेदारी पेश कर रहे हैं। उनका कहना है कि जंग जल्द खत्म हो जाएगी, लेकिन उनके मंत्री यह बात मानने को तैयार नहीं है। मार्को रुबियो और पीट हेगसेथ ने बार-बार कहा है कि जंग खत्म होने में 4-6 हफ्ते लग सकते हैं।
अमेरिकी कांग्रेस में डेमोक्रेट्स पहले से नाराज हैं। डोनाल्ड ट्रंप के समर्थक सांसद भी नाराज हैं क्योंकि कोई साफ योजना नहीं दिख रही है। अमेरिका के पास ईरान की ऐसी दुविधापूर्ण नीति, पहले की किसी भी सरकार में नहीं रही। अमेरिका के सहयोगी देश जैसे जर्मनी और कतर चिंतित हैं। क्षेत्र में अमेरिकी नागरिकों को निकालने की नौबत आ गई है। ईरान ने पड़ोसी देशों पर लगातार हमले किए हैं।
डोनाल्ड ट्रंप, राष्ट्रपति, अमेरिका:- अमेरिका समुद्र तट पर जोरदार बमबारी करेगा। लगातार ईरानी नावों और जहाजों को पानी में ही तबाह करता रहेगा। किसी भी तरह से, हम जल्द ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खुला, सुरक्षित और मुक्त करवा लेंगे।
अमेरिका, ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल, नौसेना और न्यूक्लियर प्रोग्राम को खत्म करना चाहता है। ईरान मजबूती से टिका हुआ है। युद्ध लंबा खिंच सकता है। दुनिया की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ रहा है। डोनाल्ड ट्रंप के पास ईरान के लिए कोई साफ नीति नहीं है। वह खुद कह रहे हैं कि जब तक मुझे लगेगा, जंग जारी रहेगा। उनके इस रवैये से पड़ोसी और सहयोगी देश फंसे हैं। डोनाल्ड ट्रंप की वजह से पश्चिम एशिया जल रहा है और आग की लपटें में खुद अमेरिका जल रहा है।
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी की बेटी हिमायनी पुरी ने दिल्ली हाई कोर्ट में मानहानि का केस दायर किया है। उन्होंने जेफरी एपस्टीन से जुड़े आरोपों वाली ऑनलाइन खबरें, पोस्ट, वीडियो और दूसरे कंटेंट को हटवाने की मांग की है। हिमायनी ने 10 करोड़ रुपये का हर्जाना मांगा है। साथ ही उन्होंने सोशल मीडिया कंपनियों और अज्ञात लोगों के खिलाफ स्थायी रोक लगाने की गुहार लगाई है। उन्होंने दुनिया भर के ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से ये सामग्री हटवाने का आदेश मांगा है।
उन्होंने एक्स, गूगल, मेटा (फेसबुक-इंस्टाग्राम) और लिंक्डइन जैसी कंपनियों से कहा है कि अगर भविष्य में ऐसे ही झूठे और मानहानिकारक आरोप उनके नोटिस में आएं, तो उन्हें तुरंत हटा दिया जाए। कोर्ट में यह केस जल्द ही, शायद मंगलवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हो सकता है।
हिमायनी के मुताबिक, 22 फरवरी 2026 से सोशल मीडिया पर कई जगहों पर उनके खिलाफ आरोप लगाए जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि उनका जेफरी एपस्टीन से सीधा या अप्रत्यक्ष व्यापारिक, आर्थिक, निजी या कोई और संबंध था। साथ ही उनके अपराधों से जुड़े थे।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया गया कि जहां हिमायनी काम करती थीं, रियल पार्टनर्स एलएलसी (Realm Partners LLC) को एपस्टीन या उनके साथियों से फंडिंग, आर्थिक फायदा या गलत तरीके से पैसे मिले थे। रॉबर्ट मिलार्ड नाम के व्यक्ति के साथ मिलकर उन्होंने एक बड़े बैंक लेहमन ब्रदर्स को गिराने में भूमिका निभाई थी।
कहा- आरोप दुर्भावनापूर्ण हैं
हिमायनी का कहना है कि ये सभी आरोप पूरी तरह झूठे, दुर्भावनापूर्ण हैं और इनके खिलाफ किसी भी प्रकार का कोई सबूत नहीं है। उनके केस में लिखा है कि कुछ लोग (डिफेंडेंट नंबर 1 से 14 और कई अज्ञात लोग) ने जानबूझकर ये झूठी बातें फैलाई हैं। वे एडिटेड वीडियो, गुमराह करने वाले कैप्शन और फर्जी थंबनेल इस्तेमाल करके लोगों में गुस्सा भड़काना चाहते हैं। इससे सोशल मीडिया पर वायरल होकर उनके सम्मान को ठेस पहुंची है।
केस में कहा गया है कि उन्हें भारत और दुनिया भर में एक सोची-समझी साजिश के तहत निशाना बनाया जा रहा है। सिर्फ इसलिए क्योंकि वह केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी की बेटी हैं।
जेठमलानी ने तैयार किया केस
केस में यह भी लिखा है कि हिमायनी एक बहुत सफल और खुद पर निर्भर प्रोफेशनल महिला हैं लेकिन सिर्फ उनके पिता के कैबिनेट मंत्री होने की वजह से उन पर इतनी बुरी तरह से हमला किया जा रहा है।
यह केस सीनियर एडवोकेट महेश जेठमलानी ने तैयार किया है। इसे लेक्सस्टर लॉ एलएलपी के वकीलों शांतनु अग्रवाल, मधुलिका राय शर्मा, मनस अरोड़ा और सैयद हमजा गयूर ने दायर किया है।
खराब लाइफस्टाइल की वजह से बाल रूखे और बेजान नजर आते हैं। साथ ही हम केमिकल्स वाले प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते हैं जो बालों से जुड़ी समस्याओं को बढ़ा देते हैं। अगर आप बाल झड़ने की समस्या से परेशान हैं तो मोरिंगा का इस्तेमाल कर सकते हैं। मोरिंगा को हिंदी में सहजन कहा जाता है। यह सिर्फ सेहत के लिए ही नहीं बालों के लिए भी बहुत फायदेमंद माना जाता है। इसमें आयरन की भरपूर मात्रा होती है जो ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ाता है।
मोरिंगा में विटामिन ए और ई की भरपूर मात्रा होती है जो स्कैल्प को मजूबत करने में मदद करता है। इसके अलावा जिंक और एमिनो एसिड पाया जाता है। आप बालों के झड़ने की समस्या से परेशान हैं तो मोरिंगा के तेल या मास्क का इस्तेमाल कर सकते हैं।
बाल झड़ने की समस्या से परेशान हैं तो आप मोरिंगा के तेल, पाउडर और मास्क का इस्तेमाल कर सकते हैं। आइए जानते हैं आप मोरिंगा का इस्तेमाल कैसे कर सकते हैं।
मोरिंगा ऑयल
मोरिंगा का ऑयल लगाकर आपको 10 मिनट तक मसाज करना है और फिर एक लिए 1 घंटे के लिए छोड़ दें। इसके बाद माइल्ड शैंपू और क्लींजर का इस्तेमाल करें। इससे बालों में चमक आएगी। साथ ही रूखेपन की समस्या से भी छुटकारा मिलता है।
मोरिंगा पाउडर
बालों के लिए हेल्दी बनाने के लिए मोरिंगा पाउडर का इस्तेमाल करें। इसमें फाइटोकेमिकल्स, विटामिन सी, ए और ई, आयरन और जिंक भरपूर मात्रा में पाया जाता है। मोरिंगा का पाउडर बालों की क्वालिटी को सुधारता है।
अगर आपको डैंड्रफ की समस्या है तो मोरिंगा का हेयर मास्क लगाए। हेयर मास्क बालों के लिए बहुत फायदेमंद है। मोरिंगा हेयर मास्क बनाने के लिए आपको 4 चम्मच मोरिंगा पाउडर में 2 चम्मच दही और 1 चम्मच शहद मिलाकर पेस्ट तैयार कर लेना है। इस हेयर मास्क को बालों में 30 से 40 मिनट तक लगाकर रखें। इसके माइल्ड शैंपू से धो लें।
साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी को लगने जा रहा है। इस बार लगने वाले सूर्य ग्रहण में ‘रिंग ऑफ फायर’ देखने का मौका मिलेगा। भारत के लोगों के लिए राहत की बात यह है कि यहां इसका प्रभाव नहीं पड़ेगा। भारतीय समय के अनुसार यह ग्रहण दोपहर में शुरू तो होगा लेकिन भारत के किसी भी हिस्से में यह दिखाई नहीं देगा।
यह ग्रहण भारत मे दिखाई नहीं दे रहा है इसलिए ज्योतिण शास्त्र के अनुसार यहां सूतक काल मान्य नहीं होगा। इसका मतलब है कि देशभर के मंदिरों के कपाट खुले रहेंगे, पूजा-पाठ हमेशा की तरह होगा और रोज के कामों पर कोई पाबंदी नहीं रहेगी।
भारतीय समय के अनुसार यह सूर्य ग्रहण दोपहर से शुरू होकर शाम तक चलेगा। ग्रहण की शुरुआत दोपहर 3 बजकर 26 मिनट पर होगी। यह शाम 5 बजकर 42 मिनट पर अपने चरम पर रहेगा। इसी समय ‘रिंग ऑफ फायर’ दिखाई देगा। ग्रहण की समाप्ति शाम 7 बजकर 57 मिनट पर होगी। इस तरह यह पूरी घटना लगभग 4 घंटे 32 मिनट तक चलेगी।
क्या होता है ‘रिंग ऑफ फायर’?
इस बार ग्रहण में ऐसी स्थिति बन रही है जिसमें चंद्रमा, सूर्य को पूरी तरह ढक नहीं पाता जिससे सूर्य का बाहरी हिस्सा एक चमकती हुई अंगूठी यानी रिंग की तरह नजर आता है। यही कारण है कि इसे ‘रिंग ऑफ फायर’ का नाम दिया गया है। इस स्थिति को ‘वलयाकार सूर्य ग्रहण’ (Annular Solar Eclipse) कहा जाता है।
दुनिया में कहां दिखेगा यह नजारा?
भले ही हम भारत में इसे न देख पाएं लेकिन दुनिया के कई हिस्सों में यह साफ नजर आएगा। इसमें अंटार्कटिका और दक्षिणी महासागर के कई इलाके, दक्षिण अफ्रीका, तंजानिया, जाम्बिया और जिम्बाब्वे जैसे अफ्रीकी देश शामिल है।
सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) ने मिडिल ईस्ट के कई देशों में होने वाली कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं को पूरी तरह से रद्द करने का फैसला लिया है। यह कदम अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध के हालातों और सुरक्षा संबंधी चिंताओं को देखते हुए उठाया गया है। बोर्ड ने साफ किया है कि उनका सबसे पहला मकसद छात्रों, शिक्षकों और परीक्षा स्टाफ की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इस फैसले के बाद अब उन देशों में कोई भी बची हुई परीक्षा नहीं होगी जो 16 मार्च से 10 अप्रैल 2026 के बीच होनी थी।
सीबीएसई का यह फैसला मिडिल ईस्ट के उन सभी देशों में लागू होगा जहां सीबीएसई से मान्यता प्राप्त स्कूल मौजूद हैं। इन देशों में मुख्य रुप से बहरीन, ईरान, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) शामिल हैं। इन सभी जगहों पर मोर्च-अप्रैल 2026 के सत्र में होने वाली परीक्षाएं अब नहीं कराई जाएंगी। इससे पहले भी बिगड़ते हालातों की वजह से कुछ परीक्षाओं को टाला गया था। लेकिन अब सुरक्षा को देखते हुए पूरे शेड्यूल को ही खत्म कर दिया गया है।
बोर्ड ने अपने अधिकारिक नोटिस में यह भी स्पष्ट कर दिया है कि जो परीक्षाएं पहले 1 मार्च, 3 मार्च, 5 मार्च, 7 मार्च और 9 मार्च 2026 को पोस्टपोन की गई थीं, वे भी अब पूरी तरह से रद्द मानी जाएंगी। इसका मतलब यह है कि अब उन पुरानी तारीखों वाली परीक्षाओं को दोबारा आयोजित करने की कोई योजना नहीं है। छात्रों को अब उन विषयों के लिए फिर से परीक्षा केंद्र पर जाने की जरूरत नहीं होगी।
परीक्षा रद्द होने के बाद अब सबसे बड़ी बात यह है कि छात्रों का रिजल्ट किस तरह तैयार होगा। सीबीएसई ने बताया है कि वे इसके लिए एक नया तरीका ढूंढ रहे हैं। इसका मतलब यह है कि छात्रों को उनके पुराने रिकॉर्ड या स्कूल में हुए टेस्ट के आधार पर नंबर दिए जा सकते हैं। रिजल्ट का सही तरीका और नियम क्या होंगे इसकी जानकारी बोर्ड जल्द ही एक नए नोटिस जारी करेगी।
मिडिल ईस्ट में हालात बहुत खराब है जिसकी वजह से वहां स्कूल चलाना या एग्जाम लेना मुमकिन नहीं है। सीबीएसई ने यह फैसला सिर्फ इसलिए लिया है ताकि किसी भी छात्र या टीचर को कोई खतरा न हो। अब सभी स्कूलों और बच्चों को बोर्ड के अगले आदेश का इंतजार करना होगा जिससे यह पता चलेगा कि उनके फाइनल नंबर कैसे तय किए जाएंगे।
भारत ने अमेरिका के साथ होर्मुज स्ट्रेट में युद्धपोत भेजने पर कोई द्विपक्षीय बातचीत नहीं की है। यह जानकारी विदेश मंत्रालय ने सोमवार को दी। यह बात अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के बीच आई है, जिसमें उन्होंने कई देशों से अपील की कि वे अपने युद्धपोत भेजकर इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को सुरक्षित और खुला रखें।
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया कि चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन और अन्य देश, जो ईरान की वजह से प्रभावित हैं, इस क्षेत्र में युद्धपोत भेजें ताकि जलमार्ग सुरक्षित रहे लेकिन इन देशों ने अभी तक ऐसा कोई वादा नहीं किया है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल से जब पूछा गया कि क्या अमेरिका ने भारत से युद्धपोत भेजने के लिए संपर्क किया है और भारत का क्या रुख है, तो उन्होंने कहा, ‘हम इस मुद्दे पर कई देशों की चर्चा से वाकिफ हैं। हमने अभी तक इसे द्विपक्षीय स्तर पर नहीं चर्चा की है।’
जायसवाल ने कहा कि भारत इस मामले पर कई पक्षों से बातचीत जारी रखेगा। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने फाइनेंशियल टाइम्स को दिए इंटरव्यू में भी इस पर बात की। जयशंकर ने कहा कि भारत के पास ईरान के साथ भारतीय जहाजों के लिए कोई ‘कंप्लीट व्यवस्था’ नहीं है, लेकिन तेहरान से सुरक्षित मार्ग पर को लेकर बातचीत चल रही है और यह कुछ नतीजे दे रही है।
दो जहाजों ने पार किया था स्ट्रेट
शनिवार को दो भारतीय जहाजों शिवालिक और नंदा देवी ने 92,712 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर होर्मुज स्ट्रेट पार किया। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के बीच फोन पर बातचीत और विदेश मंत्री जयशंकर तथा ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची की चर्चा के बाद हुआ।
जानकारों का कहना है कि भारत ने लाल सागर या होर्मुज में बहुराष्ट्रीय नौसेना बल में शामिल नहीं हुआ है, लेकिन भारतीय नौसेना ने भारतीय जहाजों की सुरक्षा के लिए युद्धपोत तैनात किए हैं और अन्य देशों की नौसेनाओं के साथ समन्वय किया है।
जायसवाल ने दोहराया कि भारत और ईरान के बीच पुराने संबंध हैं और भारतीय जहाजों के सुरक्षित गुजरने के बदले भारत ने कुछ भी नहीं दिया। उन्होंने कहा, ‘यह हमारी साझेदारी का आधार है, यह कोई लेन-देन नहीं है।’
भारत ने जारी किया बयान
भारत ने इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ शुरू युद्ध पर 28 फरवरी, 3 मार्च और 9 मार्च को बयान जारी किए। जायसवाल ने कहा, ‘हम लगातार डी-एस्केलेशन, संयम बरतने और बातचीत व कूटनीति के रास्ते पर चलने की अपील करते हैं ताकि यह संघर्ष जल्द खत्म हो। हमने कहा है कि सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान होना चाहिए।’
यूरोपीय संघ से मिले थे जयशंकर
जयशंकर ब्रुसेल्स में यूरोपीय संघ के मंत्रियों से मिलने गए हैं, जहां पश्चिम एशिया के हालात एजेंडे में ऊपर रहेंगे। जायसवाल ने कहा कि वहां प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा जैसे सभी महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी।
शिपिंग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने बताया कि होर्मुज के पश्चिम में फारस की खाड़ी में 22 भारतीय जहाज फंसे हैं। इनमें 6 एलपीजी कैरियर, एक एलएनजी कैरियर और 4 क्रूड ऑयल टैंकर शामिल हैं। इन पर 611 भारतीय नाविक सुरक्षित हैं, लेकिन ये कब घर लौट पाएंगे, इसकी जानकारी नहीं है।
यह स्थिति ईरान-अमेरिका तनाव के कारण बनी है, जहां ईरान ने स्ट्रेट को बंद करने की कोशिश की, जिससे तेल की कीमतें बढ़ गई हैं और भारत जैसे देशों को ऊर्जा सुरक्षा की चिंता है। भारत कूटनीति से अपना हित सुरक्षित रखने की कोशिश कर रहा है।
हमारे शरीर के लिए विटामिन्स और मिनरल्स बहुत जरूरी होते हैं। भारत में 60% से ज्यादा लोग मैग्नीशियम की कमी से जूझ रहे हैं। National Library Of Medicine की रिपोर्ट में यह स्टडी पब्लिश हुई है। मैग्नीशियम एक जरूरी सप्लीमेंट्स है जो शरीर में 300 से ज्यादा एंजाइम्स को बांधने का काम करता है। ये आपके मसल्स, नर्वस सिस्टम और हार्ट के लिए जरूरी है। साथ ही आपके ब्लड शुगर को कंट्रोल करता है। इसके अलावा हड्डियों को मजबूत बनाए रखने में मदद करता है।
आज कल लोग विटामिन्स और मिनरल्स की टैबलेट्स बिना डॉक्टर की सलाह के खाने लगते हैं। इसकी वजह से आपके हृदय, किडनी समेत अन्य अंगों पर प्रभाव पड़ता है। मैग्नीशियम को अगर अधिक मात्रा में लेते हैं तो सेहत के लिए कितना खतरनाक है? किन चीजों में मैग्नीशियम पाया जाता है और कितनी मात्रा में लेना चाहिए। हमने इस बारे में न्यूट्रीप्लस की डायरेक्टर और सीनियर क्लीनिकल न्यूट्रिशनिस्ट डॉक्टर अंजलि फाटक से बात की।
ज्यादा मात्रा में मैग्नीशियम लेने से क्या नुकसान होता है?
अगर आप मैग्नीशियम को ज्यादा मात्रा में लेते हैं तो सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। एक व्यक्ति को हर दिन 350 माइक्रोग्राम लेना चाहिए। इसमें भी जो महिलाएं हैं उन्हें 310 से 320 माइक्रोग्राम लेना चाहिए। पुरुष को प्रति दिन 400 माइक्रोग्राम से ज्यादा मैग्नीशियम नहीं लेना चाहिए। अगर आप जरूरत से ज्यादा मैग्नीशियम की टैबलेट्स लेते हैं तो पेट में दर्द, पेट में ऐंठन, उल्टी, मितली की समस्या हो सकती है।
हृदय पर पड़ता है प्रभाव
मैग्नीशियम की मात्रा ज्यादा होने से ब्लड प्रेशर कम होने लगाता है। इसकी वजह से चक्कर आने लगता है। इसके अलावा हृदय पर भी प्रभाव पड़ता है। अनियमित हार्ट बीट का खतरा बढ़ जाता है।
किडनी पर दबाव बढ़ता है
मैग्नीशियम की मात्रा ज्यादा होने की वजह से किडनी पर प्रभाव पड़ता है। कई लोग बिना डॉक्टर को दिखाए मैग्निशियम खाते रहते हैं जिसकी वजह से मसल्स कमजोर हो जाती है, सांस लेने में दिक्कत होती है। इस सब कारणों से हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है।
अगर मैग्नीशियम की कमी है तो कितनी कमी है? इसके लिए आपको सीरम मैग्नीशियम टेस्ट करवाना पड़ेगा। ये टेस्ट बताता है कि ब्लड में मैग्नीशियम का कितना लेवल है। इस टेस्ट के हिसाब से डॉक्टर आपको सलाह देता है कि आपका खानपान बदलने से ठीक हो जाएगा। क्या सप्लीमेंट्स लेने पड़ेंगे या फिर इंजेक्शन की जरूरत है। कितने दिनों तक दवा चलेगी? इन सभी चीजों के बारे में डॉक्टर से पूछें। खुद से डॉक्टर न बनें।
पालक, दालें, बादाम, सीताफल के बीज, सूरजमूखी के बीज, अलसी के बीज, हरी पत्तेदार सब्जियां, बीन्स,राजमा, काला चना, अंजीर, सोयाबीन और डार्क चॉकलेट ले रहे हैं क्योंकि उसमें 70 कोको होता है। ये सभी चीजें मैग्नीशियम का अच्छा सोर्स है।
चाय-कॉफी का सेवन कम करें। इन दोनों की वजह से शरीर में मैगनीशियम कम एब्जॉर्ब होता है। इसके अलावा तली-भूनी चीजों का सेवन कम करना चाहिए। अगर शरीर में विटामिन डी की कमी है तो मैग्नीशियम अच्छे से एब्जॉर्ब नहीं होगा।
आध्यात्मिक और व्यावहारिक दृष्टि से 17 फरवरी 2026 का दिन बेहद महत्वपूर्ण है। फाल्गुन महीने की अमावस्या होने के कारण यह दिन आत्म-चिंतन करने का समय है। साथ ही पुरानी बातों को पीछे छोड़ कर नई शुरुआत करने का भी है। चंद्रमा इनोवेशन की राशि कुंभ में रहेंगे जो लोगों को लीक से हटकर सोचने की प्रेरणा देंगे। वहीं 17 फरवरी मूलांक 8 का है, जिसके स्वामी शनि देव हैं।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मंगलवार और शनि के मूलांक का यह मेल उन लोगों के लिए बेहतरीन नतीजे लाएगा जो मेहनत और अनुशासन में विश्वास रखते हैं। आज जल्दबाजी के बजाय ‘धीरे मगर पक्के’ कदम उठाना आपको लंबी अवधि का लाभ और आर्थिक मजबूती देगा। आइए जानते हैं आपकी राशि के लिए आज के सितारे क्या संकेत दे रहे हैं?
ईरान ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को जान से मारने की धमकी दी है। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने वादा किया है कि इजरायल और अमेरिका के साथ युद्ध जारी रहने पर वे नेतन्याहू को निशाना बनाएंगे और मार डालेंगे। यही नहीं IRGC ने नेतन्याहू का ‘पीछा करके उन्हें मार डालने’ की कसम खाई। इस धमकी के बाद युद्ध में एक नया मोड़ आ गया है।
इससे पहले अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमला करके तेहरान में 28 फरवरी को ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को हवाई हमले में मार दिया था। इस हमले के बाद ही यह खूंखार जंग शुरू हुई है।
ईरान सेना ने रविवार को इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को चेतावनी देते हुए कहा, ‘अगर यह बच्चों को मारने वाला अपराधी जिंदा है, तो हम पूरी ताकत से उसका पीछा करते रहेंगे और उसे मार डालेंगे।’
दरअसल, IRGC का यह बयान इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू की कथित मौत की खबरों को खारिज करने के बाद आया है। इजरायली प्रधानमंत्री के ऑफिस ने न्यूज एजेंसी अनादोलु अजानसी को बताया कि नेतन्याहू की हत्या के बारे में सोशल मीडिया पर चल रहे दावे फेक न्यूज हैं। साथ ही कहा कि प्रधानमंत्री ठीक हैं।
दरअसल, नेतन्याहू की मौत की अफवाहें तब आनी शुरू हुईं जब उन्होंने शुक्रवार को अपने X अकाउंट पर एक वीडियो पोस्ट की। इसी दौरान सोशल मीडिया पर दावा किया जाने लगा कि नेतन्याहू के दाहिने हाथ पर एक एक्स्ट्रा उंगली देखी गई है। इस बात से अंदाजा लगाया जाने लगा कि उनकी हत्या हो गई है।
अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध आज 16वें दिन में प्रवेश कर गया। अमेरिका लगातार ईरान पर मिसाइल और ड्रोन हमले करके सैन्य ठिकानों और हथियारों के गोदाम को खत्म कर रही है। ईरान भी जवाबी हमले करते हुए गल्फ देशों में अमेरिकी एयर बेस और उनके लड़ाकू विमानों को मार रहा है। इस बीच ईरान की सरकारी मीडिया के मुताबिक, जंग में 2,000 से अधिक लोग मारे गए हैं। इसमें से 13,00 लोग अकेले ईरान में हैं।
आज देश में राज्यसभा की 11 सीटों के लिए मतदान हुआ। ये सीटें हरियाणा, बिहार और ओडिशा से हैं। शाम 5 बजे मतदान खत्म होने के बाद वोटों की गिनती शुरू हुई। बिहार में सभी 5 सीटों पर एनडीए के उम्मीदवारों ने जीत हासिल की है। ओडिशा में बीजेपी को 3 सीटें मिलीं (एक निर्दलीय सहित), जबकि बीजेडी को 1 सीट मिली। हरियाणा में गिनती विवाद के कारण रुकी हुई है लेकिन एनडीए को फायदा होने की उम्मीद है।
यह चुनाव इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि अप्रैल में कई राज्यसभा सदस्यों का कार्यकाल खत्म हो रहा है। कुल 37 सीटों में से 26 उम्मीदवार पहले ही बिना मुकाबले के चुने जा चुके थे। बाकी 11 सीटों पर आज वोट डाले गए। एनडीए को इन चुनावों से ऊपरी सदन में अपनी ताकत बढ़ाने में मदद मिल सकती है। एनडीए के पास पहले से करीब 130 सीटों का बहुमत है।
बिहार की 5 राज्यसभा सीटों पर एनडीए ने पूरी जीत दर्ज की। जीतने वाले उम्मीदवार हैं- नीतीश कुमार (जेडीयू), रामनाथ ठाकुर (जेडीयू), नितिन नवीन (बीजेपी), उपेंद्र कुशवाहा (राष्ट्रीय लोक मोर्चा) और शिवेश कुमार (बीजेपी)। ये सभी उम्मीदवार जीतकर राज्यसभा पहुंच गए हैं।
महागठबंधन (आरजेडी, कांग्रेस आदि) को बड़ा झटका लगा है। खास बात यह है कि महागठबंधन के 4 विधायकों ने वोटिंग ही नहीं की। आरजेडी के फैसल रहमान, कांग्रेस के मनोहर प्रसाद, सुरेंद्र कुशवाहा और मनोज विश्वास ने मतदान से दूरी बनाई। इससे महागठबंधन की स्थिति कमजोर हो गई।
बीएसपी के इकलौते विधायक सतीश यादव ने महागठबंधन के पक्ष में वोट डाला। उन्होंने कहा कि एनडीए से भी कई ऑफर आए लेकिन उन्होंने महागठबंधन का साथ दिया। सतीश ने दावा किया कि पांचवीं सीट महागठबंधन जीत सकता था लेकिन 4 विधायकों के न आने से ऐसा नहीं हुआ।
ओडिशा में हंगामा, क्रॉस वोटिंग का आरोप
वहीं ओडिशा की 4 सीटों पर मतदान के दौरान काफी हंगामा हुआ। पोलिंग बूथ पर बीजेपी और बीजेडी विधायकों के बीच हाथापाई हो गई। स्थिति को किसी तरह से काबू में किया गया। परिणामों में बीजेपी को 2 सीटें मिलीं। बीजेपी के वरिष्ठ नेता और ओडिशा प्रमुख मनमोहन सामल और मौजूदा सांसद सुजीत कुमार जीते। बीजेपी के समर्थन वाले निर्दलीय उम्मीदवार और पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप रे भी जीते। यहां कई बीजेडी और कांग्रेस विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की, जिससे दिलीप रे को फायदा हुआ।
बीजेडी के संत्रुप्त मिश्रा एक सीट जीतकर पार्टी का प्रतिनिधित्व बचाए रखा। पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने बीजेपी पर ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बीजेपी ने आपराधिक इतिहास वाले कई लोगों को इकट्ठा किया और उन्हें वोट दिलवाए।
हरियाणा में विवाद, गिनती रुकी
हरियाणा की 2 सीटों पर मतदान हुआ। यहां गिनती विवाद के कारण रोक दी गई है। परमवीर सिंह, भरत बेनीवाल और अनिल विज के वोट पर यहां आपत्ति लगी। बीजेपी ने कांग्रेस विधायकों के दो वोटों पर आपत्ति लगाई कि गोपनीयता भंग हुई। कांग्रेस ने बीजेपी के अनिल विज के वोट पर सवाल उठाए।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने चुनाव आयोग को पत्र लिखा। उन्होंने धांधली का आरोप लगाते हुए तुरंत हस्तक्षेप की मांग की। उन्होंने कहा कि हरियाणा में हो रही धांधली पर रोक लगाई जाए। कांग्रेस ने एक बैठक की मांग भी की। चुनाव आयोग के फैसले का इंतजार है। उसके बाद ही गिनती आगे बढ़ेगी।
इन चुनावों से एनडीए को राज्यसभा में मजबूती मिलने की संभावना है। बिहार में क्लीन स्वीप और ओडिशा में 3 सीटों से पार्टी को फायदा हुआ। हरियाणा का परिणाम भी एनडीए के पक्ष में आने की उम्मीद है।