नासिरगंज कस्बे में मोहर्रमुल हराम के पारंपरिक आयोजनों के तहत 9 मोहर्रम की रात ऐतिहासिक ‘आग का मातम’ अक़ीदत के साथ संपन्न हुआ। इस दौरान बड़ी संख्या में अज़ादारों ने दहकते अंगारों पर चलकर कर्बला के शहीदों को अपना पुरसा पेश किया। इस धार्मिक आयोजन को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग उमड़े। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, दुलदुल अलम और पारंपरिक ताजिया का जुलूस रात्रि में मुख्य हुसैनिया इमामबाड़े से निकाला गया। यह जुलूस विभिन्न निर्धारित मार्गों और शिया-सुन्नी समुदाय के घरों से होता हुआ वापस इमामबाड़े के प्रांगण में पहुंचा। देर रात इमामबाड़े के सहन में लकड़ियों को जलाकर दहकते अंगारों का एक लंबा रास्ता तैयार किया गया। इस दौरान अज़ादार ‘ग़मे हुसैन’ और अक़ीदत के अटूट जज़्बे में डूबे हुए नज़र आए। कई युवा अज़ादार नंगे पैर पूरी हिम्मत और अक़ीदत के साथ दहकते हुए लाल अंगारों के रास्ते पर चलते दिखे। पूरा माहौल ‘या हुसैन’, ‘या अब्बास’ की सदाओं से गूंज उठा, जब अज़ादारों ने लहकते अंगारों पर चलकर कर्बला के मजलूमों को अपना पुरसा पेश किया। इस ऐतिहासिक और संवेदनशील मातमी रिवायत के मद्देनजर स्थानीय पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच अंजुमन के वालंटियर्स और प्रबंधकों के विशेष सहयोग से यह पूरा आयोजन बेहद शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। मातम के समापन के बाद मोमिनीन द्वारा नम आंखों से ताजियों को उनके निर्धारित स्थानों पर अदब के साथ रखा गया।
नासिरगंज में ‘आग का मातम’:मोहर्रम पर अज़ादार दहकते अंगारों पर चले
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