2028 में भारत-कोरिया मैत्री महोत्सव का ऐलान
नई दिल्ली। वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और व्यापारिक व्यवधानों के बीच भारत और दक्षिण कोरिया ने अपने व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) को अपग्रेड करने के लिए बातचीत शुरू करने पर सहमति जताई है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग के बीच सोमवार को हैदराबाद हाउस में हुई द्विपक्षीय वार्ता के बाद यह अहम घोषणा की गई।
वार्ता के दौरान दोनों देशों के बीच कई समझौता ज्ञापनों (एमओयू) और अन्य महत्वपूर्ण समझौतों का आदान-प्रदान भी हुआ, जो द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाई देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। संयुक्त संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ‘चिप्स से लेकर शिप्स, टैलेंट से लेकर टेक्नोलॉजी और एंटरटेनमेंट से लेकर एनर्जी तक भारत और कोरिया मिलकर सहयोग के नए अवसरों को साकार करेंगे।’ उन्होंने इस यात्रा को द्विपक्षीय संबंधों के लिए एक ‘महत्वपूर्ण मोड़’ बताते हुए इसे भविष्य उन्मुख साझेदारी की दिशा में निर्णायक कदम करार दिया।
प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत और दक्षिण कोरिया के बीच द्विपक्षीय व्यापार वर्तमान में लगभग 27 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है। दोनों देशों ने इसे वर्ष 2030 तक बढ़ाकर 50 अरब डॉलर तक ले जाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए ‘भारत-कोरिया वित्तीय मंच’ की स्थापना सहित कई ठोस पहल करने पर सहमति बनी है, जिससे निवेश और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।
डिजिटल और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में सहयोग को नई गति देने के लिए ‘इंडिया-कोरिया डिजिटल ब्रिज’ पहल शुरू करने की घोषणा भी की गई। इसके तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, सूचना प्रौद्योगिकी और उभरती डिजिटल तकनीकों में संयुक्त अनुसंधान और विकास को बढ़ावा दिया जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार, यह पहल दोनों देशों को वैश्विक टेक्नोलॉजी आपूर्ति श्रृंखला में अधिक प्रभावी भूमिका निभाने में मदद करेगी।
सांस्कृतिक संबंधों पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और कोरिया के बीच हजारों वर्ष पुराने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रिश्ते हैं। उन्होंने अयोध्या की राजकुमारी सूरीरत्ना और कोरिया के राजा किम-सुरो की कथा का उल्लेख करते हुए इसे साझा विरासत का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि भारत में कोरियाई पॉप संस्कृति और धारावाहिकों की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है, वहीं कोरिया में भारतीय सिनेमा और परंपराओं के प्रति आकर्षण भी बढ़ा है। इसी कड़ी में दोनों देशों ने वर्ष 2028 में ‘भारत-कोरिया मैत्री महोत्सव’ आयोजित करने की घोषणा की, जिससे सांस्कृतिक आदान-प्रदान को और गति मिलेगी।
वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वर्तमान समय में वैश्विक शांति और स्थिरता सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भारत और कोरिया इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में समान दृष्टिकोण साझा करते हैं और क्षेत्रीय शांति, स्थिरता तथा समावेशी विकास के लिए मिलकर काम करेंगे।
दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने भी द्विपक्षीय संबंधों को और सशक्त बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि दोनों देशों का लक्ष्य 2030 तक व्यापार को 50 अरब डॉलर तक पहुंचाना है। राष्ट्रपति ली ने बताया कि दोनों नेताओं के बीच मध्य पूर्व की स्थिति पर भी चर्चा हुई और इस बात पर सहमति बनी कि वहां शांति और स्थिरता की बहाली वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि दोनों देशों के बीच इलेक्ट्रॉनिक भुगतान प्रणालियों को जोड़ने के लिए एक समझौता हुआ है। इसके तहत दोनों देशों के नागरिक एक-दूसरे के यहां यात्रा के दौरान स्थानीय क्यूआर कोड के माध्यम से भुगतान कर सकेंगे, जिससे पर्यटन और व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
दोनों नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सहयोग बढ़ाने और वैश्विक संस्थाओं में सुधार की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि बदलती वैश्विक चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए समन्वित और बहुपक्षीय प्रयास जरूरी हैं। कुल मिलाकर, भारत और दक्षिण कोरिया के बीच यह नई पहल न केवल आर्थिक सहयोग को मजबूती देगी, बल्कि रणनीतिक, तकनीकी और सांस्कृतिक साझेदारी को भी एक नई दिशा प्रदान करेगी।












