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बस्ती जिले की हर्रैया तहसील के ग्राम सिसई से दो महिलाओं को पैतृक संपत्ति से जुड़े रास्ते के विवाद में न्याय नहीं मिल पा रहा है। उमा पत्नी अश्वनी कुमार और सुनरा पत्नी राम सुंदर ने तीन बार तहसील दिवस और स्थानीय थाने में शिकायत दर्ज कराई है, लेकिन उन्हें अब तक केवल आश्वासन ही मिला है। महिलाओं का कहना है कि वे जिस भूमि पर रहती हैं, उस पर उनका परिवार पाँच पीढ़ियों से काबिज है। वे अपने पुराने और जर्जर मकान को तोड़कर नया पक्का मकान बनाना चाहती हैं, जिसके लिए उन्हें सुगम रास्ते की आवश्यकता है। पीड़ित महिलाओं ने आरोप लगाया है कि गाँव का निवासी झगरू पुत्र पलटन उनके नए मकान के निर्माण में बाधा डाल रहा है। आरोपी जबरन निर्माण कार्य रोक रहा है और महिलाओं को आवागमन के लिए रास्ता देने से भी इनकार कर रहा है। महिलाओं ने बताया, “हम तीन बार तहसील दिवस और स्थानीय थाने के चक्कर काट चुके हैं। हर बार सिर्फ प्रार्थना पत्र ले लिया जाता है, लेकिन मौके पर कोई कार्रवाई नहीं होती।” एक ओर जहां शासन द्वारा तहसील दिवस और थाना दिवस के माध्यम से जनता की समस्याओं के त्वरित निस्तारण का दावा किया जाता है, वहीं इस मामले में बार-बार शिकायत के बावजूद कोई सुनवाई न होना स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है। पीड़ित महिलाओं ने उप-जिलाधिकारी (SDM) हर्रैया से मांग की है कि मामले का संज्ञान लिया जाए। उन्होंने मौके पर पुलिस और राजस्व टीम भेजकर उन्हें न्याय दिलाने और निर्माण कार्य पूरा कराने की अपील की है।
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दो महिलाओं की शिकायत पर कार्रवाई नहीं:पैतृक संपत्ति के रास्ते के विवाद में 3 बार तहसील दिवस पर गुहार
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