बांदा।नवजात शिशुओं की मृत्यु दर को कम करने के उद्देश्य से नेशनल नियोनेटोलॉजी फोरम इंडिया द्वारा 10 मई को पूरे भारत में एनआरपी दिवस मनाया जा रहा है। यह देश के सबसे बड़े समन्वित प्रशिक्षण अभियानों में से एक है, जिसमें बड़े स्तर पर कौशल आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।यह ऐतिहासिक पहल इंडिया के अध्यक्ष डा. लल्लन कुमार भारती के नेतृत्व में आयोजित की जा रही है, जिनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक नवजात शिशु को जन्म के समय समय पर एवं प्रभावी पुनर्जीवन सहायता प्राप्त हो सके।भारत में नवजात मृत्यु एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या बनी हुई है। इन मौतों का एक बड़ा कारण जन्म के समय शिशु का सांस शुरू न कर पाना है।
जन्म के बाद के शुरुआती कुछ मिनट अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं, और प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा समय पर सहायता से इन रोकी जा सकने वाली मौतों को टाला जा सकता है। शिशुओं को जन्म के समय सांस दिलाने की सरल और वैज्ञानिक तकनीकें जीवन बचा सकती हैं।इस पूरे कार्यक्रम की योजना, समन्वय, मानकीकरण और क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिससे सभी केंद्रों पर उच्च गुणवत्ता का प्रशिक्षण सुनिश्चित हो सके।
यह राष्ट्रव्यापी प्रयास एक ही दिन में सबसे अधिक नवजात पुनर्जीवनध्श्वास सहायता प्रशिक्षण आयोजित करने का रिकॉर्ड स्थापित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।प्रशिक्षण के अन्त में प्रधानाचार्य, रानी दुर्गावती मेडिकल कालेज बांदा के द्वारा समस्त प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरण किया गया इस मौके पर समस्त एसएनसीयू चिकित्सक, स्टाफ नर्स, विभिन्न राजकीय चिकित्सालयों के द्वारा प्रतिभाग किया गया।












