रामपुर। झारखंडी महादेव मंदिर में चल रहे 10 दिवसीय शिव पुराण कथा के तीसरे दिवस अयोध्या से आए कथा व्यास पंडित रमेश पांडे ने शिव महिमा का विस्तार से बखान किया। तथा प्रयागराज में स्थित गंगा जमुना सरस्वती व उससे बनने वाले संगम के महत्व पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि पुरुषोत्तम मास में शिव पुराण कथा सुनना बहुत ही लाभकारी है. कथा व्यास ने बताया कि सतयुग में सबसे पहले भगवान शिव ने माता पार्वती को कैलाश पर्वत पर यह कथा सुनाई थी. उसके बाद द्वापर युग में महर्षि वेदव्यास ने इसे 18 महापुराण में लिखा। इसके मूल में एक लाख श्लोक बताया जाता है। कलयुग में सीतापुर के नैमिषारण में 88000 ऋषियों को सुनाया था। इस कथा में सात संहिताए हैं।
कथा के मध्य झारखंडी महादेव मंदिर के प्रबंध समिति के अध्यक्ष राजकुमार श्रीवास्तव ने उपस्थित श्रद्धालुओं से अपील किया कि इस महापुराण कथा को सभी को आकर सुनना चाहिए। इससे सुनने मात्र से सारे कष्टों का निवारण हो जाता है। उन्होंने श्री झारखंडी महादेव मंदिर के बारे में बताया कि यहां का शिवलिंग स्वयंभू है।
स्वयंभू शिवलिंग के सामने कथा का फल सौ गुना बढ़ जाता है। इसके आयोजन में विष्णु गिरी ,सोनू गिरी,विनय गिरी, तथा प्रबंध समिति के प्रद्युमन सिंह, विजय सिंह,लाल भैया,अमरिंदर सिंह, संजय शर्मा ,पप्पू ,लकी गुप्ता ,मंगल प्रसाद वर्मा ,रघुनाथ शुक्ला,अजय मिश्रा एवं अजय श्रीवास्तव का सराहनीये सहयोग रहा। इस कथा के गायन कलाकार बाहर से आए थे. कथा को सुनने हजारों लोग शाम 7:00 बजे से 10:30 बजे तक उपस्थित रहकर अंत में प्रसाद भोजन ग्रहण करके जाते हैं। कथा के समापन पर मंदिर के पुजारी ने प्रबंधन समिति के अध्यक्ष राजकुमार श्रीवास्तव को 101 किलो का माला पहनाया।











