सिद्धार्थनगर में वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की जयंती श्रद्धा, हर्षोल्लास और गौरवपूर्ण वातावरण में मनाई गई। नगर के सियाराम राम वाटिका में आयोजित इस कार्यक्रम में समाज के विभिन्न वर्गों और गणमान्य नागरिकों ने महाराणा प्रताप के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उनके शौर्य और बलिदान को याद किया। कार्यक्रम के दौरान मुख्य वक्ताओं ने महाराणा प्रताप के जीवन दर्शन पर प्रकाश डाला और समाज के नवनिर्माण का संकल्प लिया। अतिथियों ने उनके व्यक्तित्व के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की। क्षत्रिय महासभा के प्रदेश उपाध्यक्ष और सिविल सिद्धार्थ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अखण्ड प्रताप सिंह ने कहा कि महाराणा प्रताप केवल एक राजा नहीं, बल्कि स्वाभिमान के वैश्विक प्रतीक थे। उन्होंने अधिवक्ताओं और युवाओं से महाराणा के मूल्यों को अपनाकर समाज में न्याय और सत्य की स्थापना करने का आह्वान किया। पूर्व प्राचार्य प्रोफेसर केपी त्रिपाठी ने इस अवसर पर कहा कि नई पीढ़ी को महाराणा प्रताप के त्यागपूर्ण इतिहास से परिचित कराना अनिवार्य है। उन्होंने उनके संघर्षों को शैक्षणिक पाठ्यक्रम के साथ-साथ जीवन का हिस्सा बनाने पर जोर दिया। समाजसेवी समरेन्द्र प्रताप सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि महाराणा प्रताप ने कठिन परिस्थितियों में भी कभी झुकना स्वीकार नहीं किया। उनका जीवन हमें विपरीत हालातों में अडिग रहकर राष्ट्र की सेवा करने का संदेश देता है। समाजसेवी अमय पाण्डेय ने सामाजिक समरसता पर बल देते हुए कहा कि महाराणा प्रताप ने समाज के हर वर्ग को साथ लेकर स्वाधीनता की लड़ाई लड़ी थी। उन्होंने क्षेत्र के विकास के लिए उसी एकजुटता के साथ आगे आने का आह्वान किया। इस अवसर पर नागा हनुमान दास, सौरभ सिंह, अनुपमा सिंह दूबे, संभा मिश्रा, अरूणेश पाठक, सुषमा मिश्रा, ऊधव प्रताप सिंह, विवेक सिंह, अरविंद सिंह, हर गोविन्द साहू, बीर बहादुर सिंह, श्रषि श्रीवास्तव और मोहित पासवान सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
बांसी में महाराणा प्रताप जयंती पर आयोजित कार्यक्रम:श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाई गई जयंती, शौर्य और बलिदान को याद किया
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