कोलकाता । राइटर्स बिल्डिंग को एक बार फिर राज्य सचिवालय के रूप में सक्रिय किए जाने के फैसले ने बिबादी बाग इलाके के छोटे व्यापारियों और फुटपाथ दुकानदारों में नई उम्मीद जगा दी है। करीब 13 वर्ष पहले राज्य सचिवालय को नवान्न स्थानांतरित किए जाने के बाद इस इलाके की आर्थिक गतिविधियों पर गहरा असर पड़ा था। अब व्यापारियों को उम्मीद है कि सरकारी कर्मचारियों और आम लोगों की आवाजाही बढ़ने से उनका कारोबार फिर से पटरी पर लौट सकेगा।
बिबादी बाग इलाके में वर्षों से चाय की दुकान चला रहे प्रवेश शाह ने बताया कि जब राइटर्स बिल्डिंग से राज्य सरकार का कामकाज चलता था तब उनकी दुकान पर सुबह से देर शाम तक भारी भीड़ रहती थी। सरकारी कर्मचारी, सुरक्षाकर्मी, वकील और दफ्तर आने-जाने वाले लोग लगातार दुकान पर आते थे। उन्होंने कहा कि सचिवालय के स्थानांतरण के कुछ ही महीनों के भीतर बिक्री में भारी गिरावट आ गई और आसपास की कई छोटी दुकानें बंद हो गईं।
इसी इलाके में नाश्ते की दुकान चलाने वाली मनोज साह ने कहा कि पहले उनकी दुकान में छह कर्मचारी काम करते थे, लेकिन कारोबार घटने के बाद अब केवल वह और उनके पति ही दुकान संभालते हैं। उन्होंने बताया कि कई बार ऐसी स्थिति आ गई जब मूल लागत निकालना भी मुश्किल हो गया। उनका मानना है कि यदि सरकारी दफ्तर दोबारा यहां लौटते हैं तो पूरा इलाका फिर से जीवंत हो जाएगा।
फोटोकॉपी और स्टेशनरी कारोबार से जुड़े दुकानदारों पर भी सचिवालय स्थानांतरण का सीधा असर पड़ा। राइटर्स बिल्डिंग के पास जेरॉक्स सेंटर चलाने वाले ने बताया कि पहले आवेदन पत्र, हलफनामा, कार्यालयी दस्तावेज और पहचान पत्रों की फोटोकॉपी के लिए ग्राहकों की लंबी कतार लगी रहती थी। लेकिन 2013 के बाद ग्राहक अचानक कम हो गए।
एक अन्य दुकानदार के अनुसार, इलाके की करीब 70 से 80 दुकानें किराया और बिजली बिल नहीं चुका पाने के कारण बंद हो गईं।
स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि प्रशासनिक गतिविधियां बीच-बीच में होने के बावजूद इलाके में पहले जैसी रौनक कभी वापस नहीं आई। उनका मानना है कि हजारों सरकारी कर्मचारियों की आवाजाही का सीधा लाभ छोटे दुकानदारों, फल विक्रेताओं, चाय दुकानों, सिगरेट स्टॉल और फुटपाथ फेरीवालों तक पहुंचता है। वर्तमान स्थिति यह है कि कई दुकानों के शटर दोपहर होते-होते गिर जाते हैं क्योंकि पर्याप्त ग्राहक नहीं मिलते।
अर्थशास्त्रियों का भी मानना है कि किसी प्रशासनिक केंद्र के स्थानांतरण का असर केवल सरकारी दफ्तरों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उससे जुड़ा पूरा अनौपचारिक व्यापार तंत्र प्रभावित होता है। बिबादी बाग और आसपास के क्षेत्रों में पिछले एक दशक के दौरान सैकड़ों छोटे व्यवसाय या तो बंद हो गए या उनका आकार काफी छोटा हो गया।
राज्य सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पुष्टि की है कि राइटर्स बिल्डिंग को स्थायी रूप से फिर से राज्य सचिवालय का दर्जा दिया जाएगा। ऐतिहासिक महत्व रखने वाली यह इमारत स्वतंत्रता आंदोलन के कई अहम घटनाक्रमों और पश्चिम बंगाल के अनेक मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल की गवाह रही है। वर्ष 2011 में सत्ता परिवर्तन के बाद कुछ समय तक मुख्यमंत्री कार्यालय यहीं से संचालित हुआ था, बाद में इसे नवान्न स्थानांतरित कर दिया गया था। अब सचिवालय की वापसी से पूरे बिबादी बाग क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों के फिर से बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।












