HomeHealth & Fitnessसमाधान दिवस: DM की सख्ती और संवेदनशीलता,फरियाद देते समय महिला बेहोश

समाधान दिवस: DM की सख्ती और संवेदनशीलता,फरियाद देते समय महिला बेहोश

सरोजनीनगर। लखनऊ तहसील सरोजनीनगर में शनिवार को जिलाधिकारी विशाख जी. की अध्यक्षता में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस’ के दौरान प्रशासन के दो अलग रूप देखने को मिले। एक ओर जहाँ जिलाधिकारी ने एक पीड़ित महिला के प्रति मानवीय संवेदना दिखाई, वहीं दूसरी ओर कार्यों में शिथिलता बरतने वाले लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया।

पारिवारिक बंटवारे की फरियाद लेकर आई महिला हुई बेहोश

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संपूर्ण समाधान दिवस पहुंची प्रिया 40 वर्षीय पत्नी सत्येंद्र निवासिनी ग्राम अनौरा तहसील दिवस में न्याय की गुहार लगाने पहुँची थीं। उनका धारा 116 (पारिवारिक बंटवारा) वह अंतर्गत धारा 34 बिजनौर P3 से संबंधित वाद कोर्ट में लंबित है। जैसे ही महिला ने जिलाधिकारी के पास पहुँचकर अपना शिकायती पत्र आगे बढ़ाया, चंद सेकंड में ही वह अचानक गश खाकर जमीन पर गिर पड़ी।

जिलाधिकारी ने बिना समय गंवाए नायब तहसीलदार की निजी गाड़ी से महिला को तत्काल सीएचसी (CHC) सरोजनीनगर भिजवाया। समाधान दिवस के बाद डीएम स्वयं अस्पताल पहुँचे और महिला का हाल-चाल जाना। वहां उन्होंने डॉक्टरों से महिला के स्वास्थ्य की जानकारी ली और पीड़ित महिला को ढांढस बंधाते हुए आश्वासन दिया कि उनके पारिवारिक बंटवारे के लंबित मामले का त्वरित और पारदर्शी निस्तारण सुनिश्चित कराया जाएगा।

लापरवाही पर लेखपालों की लगी क्लास
जनसुनवाई के दौरान जिलाधिकारी तब बेहद सख्त नजर आए जब राजस्व कार्यों और शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही सामने आई। कार्यों में उदासीनता और जनता की शिकायतों को लंबित रखने को लेकर डीएम ने *लेखपाल तुषार और लेखपाल हर्ष स्वरूप को कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने दो टूक चेतावनी दी कि शासन की प्राथमिकताओं में लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों को बख्शा नहीं जाएगा और उनके विरुद्ध कठोर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

समाधान दिवस रिपोर्ट: 165 में से 56 का निस्तारण
आज के समाधान दिवस में कुल 165 शिकायतें दर्ज की गईं, जिनमें से 56 प्रकरणों का मौके पर ही निस्तारण किया गया। शेष 109 शिकायतों के लिए समय सीमा निर्धारित करते हुए जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों को सौंप दिया।

जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि पारिवारिक बंटवारे जैसे संवेदनशील मामलों में जनता को तहसील के चक्कर न काटने पड़ें, इसके लिए लेखपाल और राजस्व निरीक्षक जमीनी स्तर पर पारदर्शिता के साथ कार्य करें।

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