श्रावस्ती जनपद के सिरसिया ब्लॉक के रनिया भचकाही गांव में अधिवक्ता परिषद अवध की श्रावस्ती इकाई ने ‘समरसता दिवस’ का आयोजन किया। यह कार्यक्रम बाबा साहेब डॉ. भीमराव रामजी अम्बेडकर जयंती के अवसर पर सीमावर्ती जनजातियों को न्याय दिलाने और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था। रनिया भचकाही एक सीमावर्ती गांव है, जहां हाल ही में मानव तस्करी का एक मामला सामने आया था, जिससे इस क्षेत्र में जागरूकता की आवश्यकता बढ़ गई है। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और वंदे मातरम के साथ हुआ। इस अवसर पर थारू जनजाति की बालिकाओं ने अपनी पारंपरिक वेशभूषा में मातृभाषा में लोकनृत्य प्रस्तुत किया, जिसकी उपस्थित लोगों ने सराहना की। मुख्य अतिथि मीनाक्षी परिहार सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि समरसता दिवस का उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच बनाना और उसे न्याय दिलाना है। उन्होंने महिलाओं और बालिकाओं से शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और कानूनी समस्याओं पर चर्चा की तथा उनके समाधान के लिए संबंधित अधिकारियों से पहल करने का आश्वासन दिया। विशिष्ट अतिथि अरविंद सिंह ने संविधान द्वारा जनजातीय समाज के उत्थान में निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला और समाज से उनके विकास के लिए एकजुट होने का आह्वान किया। सशस्त्र सीमा बल के डिप्टी कमांडेंट ऋषि दस ने सीमावर्ती क्षेत्र में सतर्कता बनाए रखने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत सुरक्षा बलों को देने की अपील की। कार्यक्रम की अध्यक्षता ओ.पी. शुक्ला ने की, जबकि इसका संचालन अजय मिश्रा ने किया। इस अवसर पर ग्राम प्रधान राधेश्याम राना सहित कई गणमान्य व्यक्ति और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जनजातीय समाज में जागरूकता बढ़ाना और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना था।
श्रावस्ती के सीमावर्ती गांव में समरसता दिवस:थारू जनजाति के साथ जागरूकता कार्यक्रम आयोजित
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